तेहरान, क़ुम, नजफ़-ए-अशरफ़ और कर्बला-ए-मौअल्ला में लाखों इंक़लाब-दीवानों की ऐतिहासिक और पुरशकोह तशयी के बाद शहीद रहबर का जिस्म-ए-ख़ाकी मशहद-ए-मुक़द्दस पहुँच गया, जहाँ उनकी आख़िरी आरामगाह के लिए…