हौज़ा/पहली और दूसरी रकाअत में कोई हर्ज नहीं रखता लेकिन तीसरी और चौथी रकाअत में अगर जानता हो कि सुरह हम्द पढ़कर रुकूं में इमामे जमाअत के साथ शामिल नहीं हो सकता तो इक्तेदा और जमाअत में शमिल होने…