शाम-ए-ग़रीबाँ केवल हमें रुलाने के लिए नहीं आती, बल्कि यह बताने आती है कि सत्य के मार्ग में बलिदान की अंतिम मंज़िल क्या होती है, सब्र की मेराज क्या होती है, और अत्याचार सहने की वह अवस्था क्या…