गुरुवार 27 फ़रवरी 2025 - 06:13
आह; आफ़ताबे खिताबत मौलाना सय्यद नईम अब्बास नौगांवी

हौज़ा / मौलाना सय्यद ग़ाफिर रिज़वी फ़लक छौलसी ने मौलाना मुहम्मद सिब्तैन आबिदी के पुत्र मौलाना सय्यद नईम अब्बास आबिदी के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आफ़ताबे ख़िताबत के दुखद निधन पर अपना दुख इस तरह व्यक्त किया: वह व्यक्तित्व जिसकी वक्तृता का सार अद्वितीय और सार्वभौमिक था, जिसके शब्द हमेशा उसकी जबान से निकलने के लिए बेचैन रहते थे, जिसे दुनिया आफ़ताबे खिताबत के नाम से याद करती थी, वह आफ़ताब मंगलवार, 25 फरवरी 2025, 26 शाबान 1446 को सुबह की हल्की हवा के आगोश में हमेशा के लिए सो गया।

मौलाना ग़ाफ़िर ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "वह सुबह कितनी दुखद थी जब मैं रो रहा था!" वही मौलाना नईम अब्बास आबिदी, जिनकी शख्सियत बुलबुल हजार दास्तान थी, उनकी जुबान ऐसी बंद हो गई कि वह एक वाक्य भी नहीं बोल पाते थे।

मंगलवार के गमगीन माहौल ने विद्वानों और आस्थावानों की मंडली को गमगीन कर दिया, उसी दिन सुबह दिल्ली के प्रसिद्ध "होली फैमिली" अस्पताल से यह आवाज उठी कि नौगांवा सादात की जानी-मानी हस्ती मौत से अनंत घर को प्रस्थान कर गई है।

मौलाना ग़ाफ़िर रिज़वी ने अपनी तकरीर जारी रखते हुए कहा कि अहंकार के अल्प शोध के अनुसार मौलाना नईम अब्बास साहब विद्वानों की जमात में एकमात्र ऐसी शख़्सियत थे जिनकी शान उनके जीवनकाल में ही जामिया अल-मुंतज़िर, नौगावां सादात में उनके अपने छात्रों के प्रयासों से हासिल हुई। मुझे भी इस कार्यक्रम में भाग लेने का सम्मान मिला। जहाँ तक विद्वानों का सवाल है, जम्मे ग़फ़ीर मानवता की एक ऐसी उत्कृष्ट कृति थे जो मरहूम मौलाना के बारे में बहुत कुछ बयां करती है।

मौलाना फ़न्ने खिताबत के क्षेत्र में बेजोड़ थे। मुझे उनकी कई मजलिसो में भाग लेने का सम्मान मिला है। मौलाना की एक विशेष खूबी यह थी कि वह थोड़े से शब्दों में बहुत कुछ कह देते थे, जिसे फ़न्ने ख़िताबत के क्षेत्र में एक महान कला माना जाता है।

मौलाना ग़ाफ़िर ने जो कुछ देखा उसका वर्णन करते हुए कहा कि मौलाना की एक खूबी यह थी कि जब भी वह किसी सभा को संबोधित करने जाते तो अपने साथ अपने किसी शिष्य को अवश्य ले जाते।
यूं तो मौलाना भारत के हर कोने में अपने फ़न्ने खिताबत का लोहा मनवा चुके थे, लेकिन जिन सभाओं में उन्होंने भाग लिया, उनमें छौलस, जारचा, नूरपुर, नौगांवा, मुजफ्फरनगर, बिडोली और जौली में उन्होंने जो सभाएं संबोधित कीं, वे उल्लेखनीय हैं।

मौलाना नईम अब्बास साहब एक उत्कृष्ट वक्ता होने के अलावा एक मदरसे के संस्थापक, शिक्षक और प्रशासक भी थे। आपके छात्र देश-विदेश में महान व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते हैं; आपके मदरसे के बुजुर्गों ने मदरसे का नाम दूर-दूर तक रोशन किया है।

मौलाना ग़ाफ़िर ने कहा कि मरहूम मौलाना की तकरीरें इतनी दिलचस्प होती थीं कि हम जैसे छात्र उनसे मिलने के लिए आतुर रहते थे, कभी महफ़िल के बहाने, कभी मजलिस के बहाने, कभी मीटिंग के बहाने, कभी खास मीटिंग के बहाने। मानो हम किसी भी तरह उनकी सेवा में उपस्थित होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हों।

यदि हमें अचानक हमारे हृदय के प्रिय किसी व्यक्ति के बारे में यह समाचार मिले कि वह इस फ़ानी दुनिया से दारे बक़ा में चला गया है, तो हमारा हृदय इसे स्वीकार करने में हिचकिचाता है, लेकिन हमें क़ज़ा ए इलाही के आगे झुकना ही पड़ता है।

1950 में जन्मे इस व्यक्ति ने 2025 में उरूसे अजल को हमेशा के लिए गले लगा लिया और अपने सभी प्रियजनों को आंसुओं में डूबा छोड़कर अपनी असली मंजिल की ओर निकल पड़ा।

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