शुक्रवार 29 अगस्त 2025 - 15:56
"स्निप-बैक मैकेनिज्म" मनोवैज्ञानिक युद्ध है, असली लड़ाई अर्थव्यवस्था और संस्कृति की है आयतुल्लाह आलमुल होदा

हौज़ा / मशहद ए मुक़द्दस में जुमआ की नमाज़ के खुत्बे में आयतुल्लाह सैयद अहमद आलमुल होदा ने कहा कि दुश्मन "स्निप-बैक मैकेनिज्म" को हथियार बनाकर ईरानी जनता का हौसला तोड़ने और अर्थव्यवस्था व संस्कृति पर प्रहार करने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरानी राष्ट्र के एकता, दूरदर्शिता और दृढ़ता के सामने यह साजिशें कभी सफल नहीं होंगी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मशहद-ए-मुक़द्दस के इमाम-ए-जुमआ और खुरासान रिज़वी में वली-ए-फकीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह सैयद अहमद आलमुल होदा ने जुमे के खुत्बों में कहा कि ईरान के खिलाफ दुश्मन का युद्ध अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक "संयुक्त युद्ध" का रूप ले चुका है जिसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और मीडिया सभी शामिल हैं। उनके अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगी ईरानी जनता को डराने और उनके ईमान को कमजोर करने की नाकाम कोशिश कर रहा हैं।

उन्होंने कहा कि दुश्मन जान बूझकर बेहयाई और नैतिक पतन को बढ़ावा दे रहा है ताकि युवा पीढ़ी को धार्मिक मूल्यों से दूर किया जा सके।अगर हमारे युवा इमाम हुसैन (अ.स.) और इमाम जमाना (अ.स.) से भावनात्मक और आस्थापरक रिश्ता खो बैठें तो फिर वे दुश्मन के सामने डटे नहीं रह सकेंगे।

इसी तरह आयतुल्लाह आलमुल होदा ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिजाब-ए-इस्लामी को कमजोर करना दुश्मन की योजना में शामिल होने के बराबर है, इसलिए इस मैदान में दृढ़ता जरूरी है।

इमाम-ए-जुमआ मशहद ने यह भी कहा कि दुश्मन का एक और हथियार जनता के भरोसे को कमजोर करना है।आज यह प्रोपेगैंडा किया जा रहा है कि टीवी, रेडियो और यहाँ तक कि रहबर-ए-इंकिलाब की बातों पर भी ध्यान न दिया जाए। मकसद सिर्फ और सिर्फ बदगुमानी फैलाना और मिल्लत को क़यादत से अलग करना है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "स्निप-बैक मैकेनिज्म" दरअसल एक मनोवैज्ञानिक खेल है ताकि ईरानी कौम को कृत्रिम संकट के डर से लकवाग्रस्त कर दिया जाए उनके अनुसार, अगर जनता और जिम्मेदार लोग सजग रहें और आर्थिक व सांस्कृतिक क्षेत्र को मजबूत करें तो दुश्मन की यह साजिश भी नाकाम हो जाएगी।

आयतुल्लाह आलमुल होदा ने याद दिलाया कि 45 सालों में मिल्लत-ए-ईरान ने बार-बार दुश्मन की साजिशों को नाकाम बनाया है।युद्ध हो या प्रतिबंध, टारगेट किलिंग (निशाना बनाकर हत्या) हो या प्रोपेगैंडा, इस कौम ने हमेशा एकता और ईमान के जरिए दुश्मन को हराया है।

आज भी अगर हम दूरदर्शिता और दृढ़ता के साथ डटे रहें तो जीत निश्चित है और अमेरिका और ज़ायोनी शासन (इजरायल) को एक बार फिर नाकामी के सिवा कुछ हाथ नहीं आएगा।

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