हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरानी विदेश मंत्रालय ने यमन के खिलाफ जायोनी कब्जे वाली सरकार की ताजा आतंकवादी कार्रवाई की सबसे सख्त शब्दों में निंदा की है, जिसके नतीजे में प्रधानमंत्री अहमद गालिब नासिर अर रहवी और उनके कई मंत्री शहीद हो गए।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि जायोनी सरकार की ओर से यमन के आवासीय इलाकों और बुनियादी ढांचे पर हमले और यमनी उच्च अधिकारियों व आम नागरिकों की कायराना टारगेट किलिंग न सिर्फ खुला युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ जुर्म है बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि यह नकली सरकार उस राष्ट्र से बदला ले रही है जो फिलिस्तीन के मजलूम लोगों के समर्थन में हर कुर्बानी देने को तैयार है।
बयान में आगे कहा गया कि आतंकवादी हमले और यमनी नेतृत्व की शहादत से यमन की आजादी पसंद और बहादुर राष्ट्र के संकल्प और इरादे डगमगाएंगे नहीं बल्कि इसके उलट मुस्लिम उम्माह और वैश्विक जनमत में जायोनी सरकार और उसके समर्थकों खासतौर पर अमेरिका के खिलाफ नफरत और गुस्से में और इजाफा होगा।
ईरान ने शहीद यमनी प्रधानमंत्री और अन्य शहीदों के परिजनों को संवेदना और संबल प्रदान करते हुए वैश्विक समुदाय और खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र को आगाह किया कि वह इस गंभीर जुर्म के सामने चुप्पी न साधे।
विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता और दोहरे मापदंड अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नैतिक बुनियादों को खोखला कर रहे हैं जिससे न सिर्फ क्षेत्र बल्कि दुनिया भर में शांति और सुरक्षा गंभीर खतरे में है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि वैश्विक समुदाय पर यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी आती है कि वह गाजा में जारी नरसंहार और यमन में जायोनी आतंकवाद को रोके, फिलिस्तीनी लोगों पर थोपे गए अकाल और घेराबंदी के खात्मे के लिए तत्काल कदम उठाए और जायोनी राजनीतिक व सैन्य नेताओं को उनके युद्ध अपराधों पर अंतरराष्ट्रीय अदालतों के कटघरे में लाए।
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