रविवार 30 नवंबर 2025 - 15:54
हौज़ात ए इल्मिया हमेशा तहक़ीक व इज़तेहाद का मरकज़ है।

हौज़ा / मरकज़े फिक्ही अईम्मा अतहार अ.स. के प्रमुख आयतुल्लाह जवाद फाज़िल लंकरानी ने कहा है कि हौजात ए इल्मिया ने इतिहास के हर चरण में शोध, गहन चिंतन और वैज्ञानिक परिपक्वता का केंद्र बनकर धर्म की मजबूती में बुनियादी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज इस्लामी क्रांति की बरकत से हज़ारों शोध के क्षेत्र खुले हैं जो शोधकर्ताओं के इंतजार में हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आयतुल्लाह फाज़िल लंकरानी मरकज़े फिक्ही अईम्मा अतहार अ.स. के प्रमुख ने चौथे विशेष पुस्तक मेला "फिक्ह व कलाम मुआसिर" के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसमें हौज़ा और विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

इल्म अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है:

उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत हदीस-ए-नबवी (स.अ.व.व.) से की और कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम (स.अ.व.व.) ने इल्म को अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत बताया है, जो इंसान को सही रास्ता दिखाती है और समाज को जीवन प्रदान करती है।

टिकाऊ सरकारें वही हैं जो इल्म की बुनियाद पर कायम हों:

आयतुल्लाह फाज़िल लंकरानी ने कहा कि धर्म की मज़बूती और सरकारों की स्थिरता का रहस्य इल्म और शोध से जुड़ा हुआ है। जो सरकारें इल्म और ज्ञान से मुंह मोड़ती हैं, वह टिकाऊ नहीं रह सकतीं।

हौज़े के खिलाफ प्रोपेगंडा बेबुनियाद है:

उन्होंने दीन के दुश्मनों की तरफ से हौजात ए इल्मिया के बारे में फैलाए जा रहे नकारात्मक प्रोपेगंडे का खंडन करते हुए कहा कि हौजा आज भी सक्रिय, जीवंत और वैज्ञानिक केंद्र है। हमारे खिलाफ यह कहा जाता है कि हौजा ए इल्मिया खामोश है या कमजोर पड़ गया है, जबकि हकीकत यह है कि हौज़ा हमेशा से इल्म और शोध का स्रोत रहा है।

इंकलाब-ए-इस्लामी ने नए वैज्ञानिक क्षेत्र खोले:

आयतुल्लाह फाज़िल लंकरानी ने कहा कि इमाम खुमैनी (र.ह.) की सोच और इस्लामी क्रांति ने ऐसे विज्ञान के दरवाजे खोले हैं जिनसे आज शोधकर्ता भरपूर फायदा उठा रहे हैं। हमारे पास हजारों शोध के क्षेत्र मौजूद हैं, जो अहले इल्म के इंतजार में हैं ताकि शुद्ध और प्रभावी धार्मिक सोच को दुनिया के सामने पेश किया जा सके।

पुस्तक मेले के महत्व को बयांन करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी नई विचारशील दिशाओं, नई चर्चाओं और समकालीन सवालों के जवाब तलाशने का मौका प्रदान करती है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कई महत्वपूर्ण विषय अभी भी शोध के इंतजार में हैं, जैसे हिजाब का मसला जिस पर गंभीर और गहन शोध की ज़रूरत है।

आयतुल्लाह फाज़िल लंकरानी ने हौजात एल्मिया के भविष्य को उज्जवल बताते हुए आशा जताई कि यह प्रदर्शनी इस्लाम, मकतबे अहले अ.स. और इमाम खुमैनी (र.ह.) के अफकार-ए-इंकेलाब के प्रचार-प्रसार में एक प्रभावी कदम साबित होगी।

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