हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम मोहसिन क़राअती ने समाज में क़ुरआन के प्रति उदासीनता पर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि क़ुरआन इस्लाम की सभी नींवों का केंद्र है और इसकी मज़लूमियत अहले बैत अलैहिमुस्सलाम से भी अधिक है।
उन्होंने कुछ राजनीतिज्ञों से मुलाकात में कहा कि क़ुरआन की तफ़सीर (व्याख्या) इस प्रकार होनी चाहिए कि पाठक को महसूस हो कि अल्लाह सीधे उससे संवाद कर रहा है। तफ़सीर ऐसी हो कि आम लोग भी समझ सकें और विशेषज्ञ भी पसंद करें।
हुज्जतुल इस्लाम क़राअती ने कहा,हमने क़ुरआन को वह महत्व नहीं दिया जिसका वह अधिकारी था, यहाँ तक कि आइम्मा ए अतहार अलैहिमुस्सलाम की ओर भी आवश्यक ध्यान नहीं दिया। क़ुरआन की मज़लूमियत अहले बैत अलैहिमुस्सलाम से भी अधिक है, जैसा कि पैग़म्बर इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने फरमाया है कि क़ुरआन मज़लूम है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को क़ुरआन का मुफ़स्सिर बनना चाहिए। महीने रजब, शाबान और रमज़ान क़ुरआन से निकटता और उसकी तफ़सीर के लिए उत्तम अवसर हैं।
हिज़्बे मोतालफ़ ए इस्लामी के अध्यक्ष असदुल्लाह बादामचियान ने कहा कि उनकी पार्टी की गतिविधियाँ अहादीस ए अहले बैत अलैहिमुस्सलाम और क़ुरआन की शिक्षाओं पर आधारित हैं।
हुज्जतुल इस्लाम क़राअती ने मुलाकात के समापन पर ज़ोर देते हुए कहा,क़ुरआन से ग़ाफ़िल न हों, इसकी तफ़सीरें युवाओं के लिए सुलभ और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करें।"
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