गुरुवार 15 जनवरी 2026 - 10:41
इमाम मूसा काज़िम (अ) के मदीना से इराक़ जबरन निष्कासन के कारण

हौज़ा / हौज़ा न्यूज़ के रिपोर्टर ने आस्ताने क़ुद्स रज़वी मे इस्लामिक रिसर्च फ़ाउंडेशन के सोशल स्टडीज़ डिपार्टमेंट के शोधकर्ता के साथ हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ) की जीवनी के संबंध मे बातचीत की।

 हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा न्यूज़ के रिपोर्टर ने आस्ताने क़ुद्स रज़वी मे इस्लामिक रिसर्च फ़ाउंडेशन के सोशल स्टडीज़ डिपार्टमेंट के शोधकर्ता  डॉ़ मुर्तजव़ी इंफ़ेरादी ने हज़र इमाम मूसा काज़िम (अ) का मदीना से इराक की ओर निष्कासन सहित विभिन्न मुद्दो पर बातचीत की है। जिसे संक्षिप्त रूप मे हौज़ा न्यूज़ के पाठको की सेवा मे प्रस्तुत किया जा रहा है।

डॉ़ इंफ़ेरादी ने कहाः प्रवासन का मुद्दा पैग़म्बर (स) साथ भी पेश आया और समय के तक़ाज़ो के अनुसार आप (स) ने मक्का से यसरब (मदीना) शहर की और प्रवासन किया।

उन्होने आगे कहाः जबरी प्रवासन या निष्कासन को अरबी भाषा मे लोगो के शब्दो मे बयान किया जाता है और अहले बैत (अ) की जीवनी मे कर्बला की घटना मे उनकी असीरी (गिरफ्तारी) के दौर के अलावा इसका आरम्भ हज़रत इमाम काज़िम (अ) के समय मे हुआ था। दूसरो शब्दो मे जब हज़रत इमाम रज़ा (अ) युवा अवस्था मे थे और उनकी आयु 31 वर्ष थी तो आप (अ) ने अपने पिता की गिरफ्तारी और फ़िर मदीना से इराक की ओर निष्कासन को देखा।

बस हकीक़त मे आइम्मा अलैहेमुस्सलाम मे यह जबरी प्रवासन और इजबारी निष्कासन इमाम काज़िम (अ) से शुरू हुआ और उनकी बाकी संतान तक जारी रहा।

डॉ़ मुर्तजवी इंफ़ेरादी ने कहाः हज़रत इमाम मूसा काजिम (अ) की गिरफ्तारी और निष्कासन के बारे मे एतिहासिक स्रोत के अंदर कई कारण बयान किए गए है। उदाहरण स्वरूप यह है कि वह क्योकि हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के पुत्र थे, जो कई इल्मी मरातिब पर फ़ाइज़ होकर पूरे इस्लामी जगत मे शुद्ध इस्लामी पहचान को फ़ैलाने मे सफ़ल रहे थे और यह चीज़ उस दौरान के शासको के लिए अच्छी नही थी।

हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ) ने पहली बार अपने वकीलो का एक नेटवर्क स्थापित करके और विभिन्न क्षेत्रो मे अपने प्रतिनिधि भेज कर तत्कालीन सरकार के लीडरो को एक प्रकार की राजनीतिक और सामाजिक मुशकेलात मे डाल दिया।

उन्होने आगे कहाः हज़रत इमाम मूसा काज़िम (अ) की गिरफ़्तारी और निष्कासन का एक कारण यह है कि इमाम (अ) के कुछ रिश्तेदारो और परिवार के विशेष तौर पर इमाम मूसा काज़िम (अ) के भतीजे मुहम्मद बिन इस्माईल की ओर से उनके ऊचे पद के साथ हसद, खलीफ़ा के सामने इमाम (अ) के खिलाफ़ बोहतान तराशी और कीना का कारण बना। क्योकि अब्बासी खलीफ़ा ने इमाम काज़िम (अ) को मदीना से इराक़ और बसरा शहर निष्कासित करके एक साल तक वहा क़ैद कर दिया और फ़िर बसरा से बग़दाद स्थानांतरित करके इसी शहर मे शहीद कर दिया, जहा आप (अ) की पवित्र दरगाह है। 

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