हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हिंदुस्तान के मशहूर खतीब ज़ाकिर ए अहलेबैत अ.स.डॉक्टर मौलाना सैयद शहावर हुसैन नक़वी से हज़रत ज़ैनब स.ल. की शहादत के मौके पर एक खुसूसी इंटरव्यू लिया गया जिसमें उन्होंने कहां, हज़रत ज़ैनब स.ल. की जिंदगी तमाम लोगों के लिए नमूना है उनके किरदार को समाज में स्थापित किया जाना चाहिए
इंटरव्यू कुछ इस प्रकार है:
हौज़ा न्यूज़ : मौलाना साहब सलाम अलैकुम व रहमतुल्लाह,पहला सवाल यह है कि आज दुनिया के सामने हज़रत ज़ैनब स.अ. की सीरत को पेश करने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। ऐसा क्यों? खास तौर पर आज की औरतों के लिए उनकी शिक्षाएँ कितनी प्रासंगिक हैं?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : देखिए, आज का दौर भ्रम और संकट का दौर है। खासकर महिलाएं अनेक तरह के दबावों, हिंसा और अन्याय का सामना कर रही हैं। ऐसे में उन्हें केवल सुख-सुविधा या सतही सशक्तिकरण का नहीं, बल्कि आंतरिक बल और सिद्धांतों पर अडिग रहने का एक ठोस आदर्श चाहिए। हज़रत ज़ैनब स.अ. सिर्फ एक पीड़ित या शोकाकुल बहन नहीं थीं। वह इतिहास के सबसे क्रूर और निर्मम हादसे (कारबला) के बाद भी, सच्चाई की वकील, एक शिक्षक के रूप में उभरीं। उन्होंने दिखाया कि अत्याचार के सामने चुप्पी नहीं, बल्कि हिम्मत से सत्य बोलना ही विरासत को ज़िंदा रखता है। यही सबक आज हर महिला और हर युवा के लिए ज़रूरी है।
हौज़ा न्यूज़ : आपने कहा कि उन्होंने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया जो शायद ही किसी ने किया हो। उनकी उस 'हिम्मत और जुर्रत' का स्रोत क्या था? आज के संदर्भ में हम उस स्रोत से कैसे जुड़ सकते हैं?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : उनकी हिम्मत का स्रोत था अपने मिशन पर अटूट विश्वास और ज्ञान। वह सिर्फ भावनाओं से प्रेरित नहीं थीं, बल्कि वह जानती थीं कि उनके भाई इमाम हुसैन अ.स. का संदेश क्या है। उनका विश्वास और उनका इल्म ही उनकी ताकत था। आज हम उस स्रोत से तभी जुड़ सकते हैं जब हम सतही ज्ञान से आगे बढ़कर, उस सिद्धांत और विचार को समझें जिसके लिए कुर्बानी दी गई। केवल रोना-पीटना नहीं, बल्कि उस संदेश को पढ़ना, समझना और उसे अपने जीवन में उतारना ज़रूरी है यही असली 'कनेक्शन' है।
हौज़ा न्यूज़ :हज़रत ज़ैनब स.अ. आलेमा-ए-ग़ैरे मोअल्लेमा थीं इसका क्या मतलब है?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : इसका मतलब यह है कि हज़रत ज़ैनब स.अ.ने किसी इंसानी शिक्षक से इल्म हासिल नहीं किया, बल्कि उनका इल्म इलाही था। वह उस घर की परवरदा थीं जहाँ क़ुरआन नाज़िल हुआ यानी नबूवत और विलायत का घर। उनकी हर बात, हर अल्फ़ाज़ और हर तर्क क़ुरआन की तफ़्सीर था। वह ऐसी “आलेमा” थीं जिनकी शिक्षा सीधे रूह-ए-वह्य से जुड़ी थी।
हौज़ा न्यूज़ : इतिहास में ज़िक्र है कि उन्होंने हज़रत अली अ.स.के ज़माने में औरतों को क़ुरआन की तफ़्सीर सिखाई। यह घटना क्या बताती है?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : यह वाक़िया इस बात का सुबूत है कि हज़रत ज़ैनब स.अ.का इल्म केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि शिक्षात्मक भी था वह न सिर्फ़ क़ुरआन को समझती थीं बल्कि उसे लोगों तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी निभा रही थीं। जब हज़रत अली (अ.स.) ने अपनी बेटी को तफ़्सीर करते देखा, तो उन्होंने उसकी तारीफ़ की यह उनकी विद्वता की खुली गवाही है।
हौज़ा न्यूज़ :कर्बला के बाद दरबार-ए-कूफ़ा और दरबार-ए-शाम में हज़रत ज़ैनब स.अ. ने जो खुत्बे दिए, उनमें उन्होंने क़ुरआन को किस तरह इस्तेमाल किया?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : उन खुत्बों में हज़रत ज़ैनब स.अ.ने क़ुरआन की आयतों को अपने तर्क और सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्होंने यज़ीद और इब्ने ज़ियाद जैसे अत्याचारी हाकिमों के सामने क़ुरआन की रोशनी में हक़ और बातिल का फ़र्क़ स्पष्ट कर दिया। कूफ़े के दरबार में उन्होंने जो आयतें पढ़ीं, उन्होंने लोगों के दिलों को हिला दिया और यह साबित किया कि अहले बैत (अ.स.) ही क़ुरआन के असली वारिस हैं।
हौज़ा न्यूज़ :आपने अपने बयान में कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) की ज़बान पर क़ुरआन जारी था इसे आप कैसे समझाते हैं?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : इसका मतलब यह है कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) का हर शब्द, हर दलील, हर प्रतिक्रिया क़ुरआन की रूह से निकलती थी। उनके अंदर क़ुरआन इस हद तक समा गया था कि उनकी सोच, बोलचाल और अमल सब कुछ क़ुरआन का आईना बन गया था। वह खुद क़ुरआन की तफ़्सीर बन गई थीं।
हौज़ा न्यूज़ :आज के दौर में जब लोग मुश्किलों में अक्सर क़ुरआन और दीन से दूर हो जाते हैं, हज़रत ज़ैनब (स.अ.) का संदेश हमें क्या सिखाता है?
मौलाना शहवार हुसैन सहाब : हज़रत ज़ैनब स.अ.ने सिखाया कि चाहे कैसी भी मुसीबत क्यों न हो इंसान को क़ुरआन का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कर्बला की तबाही में भी क़ुरआन को अपनी ताक़त बनाया। उनका संदेश यह है कि जब दुनिया अंधेरे में डूब जाए, तब क़ुरआन ही रौशनी है। यही कर्बला वालों का आख़िरी पैग़ाम है क़ुरआन से जुड़ो, यही हक़ की राह है।
हौज़ा न्यूज़ : आपका बहुत-बहुत शुक्रिया मौलाना साहब, आपके विचारों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला और आपने युवाओं को एक संदेश दिया
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