बुधवार 28 जनवरी 2026 - 19:05
ईरान के खिलाफ अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे

हौज़ा / सऊदी अरब के शासक मुहम्मद बिन सलमान ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़ेश्कियान के साथ टेलीफोन वार्ता में सऊदी अरब की उस स्थिति पर दोबारा जोर दिया जिसमें ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया गया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,सऊदी अरब के शासक मुहम्मद बिन सलमान ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़ेश्कियान के साथ टेलीफोन वार्ता में सऊदी अरब की उस स्थिति पर दोबारा जोर दिया जिसमें ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया गया है।

सऊदी समाचार एजेंसी (SPA) के अनुसार, शाही वारिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब की सरकार ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए अपने हवाई क्षेत्र या राज्य क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देगा।

उन्होंने वार्ता के माध्यम से मतभेदों को दूर करने की कोशिशों के लिए सऊदी समर्थन पर भी जोर दिया और कहा कि इससे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता मजबूत होगी।

एसपीए ने कहा कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण की निरंतर प्रक्रिया और दोनों पक्षों की चिंताओं के संबंध में विचारों के आदान-प्रदान के दायरे में हुई।

ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के मुताबिक:
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़ेश्कियान ने अपनी चर्चा में सरकार की आंतरिक और क्षेत्रीय सिद्धांत-आधारित नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की नीति विभिन्न जातियों और संप्रदायों की एकता और राष्ट्रीय एकजुटता को बनाए रखने पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर भाईचारे और मैत्रीपूर्ण संबंधों के विस्तार के आधार पर इस्लामी देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे दृढ़ विश्वास है कि मुस्लिम राष्ट्र और इस्लामी देश एक-दूसरे के भाई हैं और हम मिलकर अपने लोगों के लिए एक सुरक्षित, विकसित और उन्नत क्षेत्र का निर्माण कर सकते हैं।

राष्ट्रपति पिज़ेश्कियान ने अपने कार्यभार संभालने के बाद से ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों में आर्थिक दबाव, युद्ध थोपना और हाल की घटनाओं में दंगा भड़काने वालों और उपद्रवियों को उकसाने, समर्थन और सहायता प्रदान करने में सीधा हस्तक्षेप शामिल है, जिसके कारण ईरान के बड़ी संख्या में लोग और सुरक्षा बल शहीद हुए हैं और सार्वजनिक संपत्ति, राहत उपकरण, बाजारों और मस्जिदों को भारी नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने कहा कि शत्रु देश सोचते थे कि ईरान को सीरिया या लीबिया जैसा बना देंगे, लेकिन वे ईरान के लोगों की सच्चाई, प्रकृति और महानता को नहीं पहचान सके। ईरानी राष्ट्र की व्यापक और सचेत उपस्थिति ने उनकी योजनाओं और साजिशों को विफल कर दिया है।

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