हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , दफ़्तर ए नुमाइंदगी आयतुल्लाहिल उज़्मा सिस्ताऩी लखनऊ की जानिब से हुसैनिया क़ायमा खातून सज्जाद बाग़ में मरजा-ए-आला आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली हुसैनी सिस्ताऩी दाम ज़िल्लहु के भाई आयतुल्लाह सैयद हादी सिस्ताऩी रहमतुल्लाह अलैह की वफ़ात पर मजलिस-ए-तरहीम का एहतेमाम किया गया।

जलसे का आग़ाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-करीम से हुआ। इसके बाद मौलाना सैयद अम्मार काज़िम जरवली, मौलाना सैयद फ़रीदुल हसन तक़वी प्रिंसिपल जामिया नाज़िमिया लखनऊ, मौलाना सैयद अरशद हुसैन मूसवी उस्ताद यूनिटी कॉलेज लखनऊ, मौलाना मुहम्मद इब्राहीम उस्ताद जामिअतुत तबलीग़ लखनऊ, मौलाना सैयद मुहम्मद मूसा रज़वी उस्ताद जामिया सुल्तानिया लखनऊ, मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रज़वी मसऊल जामिअतुल ज़हेरा तंज़ीमुल मकातिब लखनऊ, मौलाना फ़िरोज़ अली बनारसी उस्ताद जामिया इमामिया तंज़ीमुल मकातिब लखनऊ और आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली सिस्ताऩी दाम ज़िल्लहु के नुमाइंदा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अशरफ़ अली ग़रवी ने तक़रीरें कीं।

मुक़र्रिरीन ने आयतुल्लाह सैयद हादी सिस्ताऩी मरहूम की शख़्सियत और किरदार पर रौशनी डालते हुए कहा कि मरहूम आयतुल्लाह हादी सिस्ताऩी, अज़ीम मरजा-ए-तक़लीद आयतुल्लाहुल उज़्मा सैयद अली सिस्ताऩी दाम ज़िल्लहु के भाई थे, लेकिन उन्होंने कभी इस निस्बत का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि एक आम आलिम-ए-दीन की तरह ज़िंदगी बसर की। जिस तरह मरजइयत से पहले और बाद में आयतुल्लाहिल उज़्मा सिस्ताऩी दाम ज़िल्लहु की ज़ाती ज़िंदगी में कोई फ़र्क़ नहीं आया, उसी तरह मरहूम आयतुल्लाह सैयद हादी की ज़िंदगी में भी कोई तब्दीली नहीं आई। इन्केसारी उनका ख़ास्सा थी और वे नाम-ओ-नुमूद व शोहरत से दूर रहते थे।
मुक़र्रिरीन ने मज़ीद कहा कि मरहूम आयतुल्लाह सैयद हादी सिस्ताऩी को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से ख़ास अक़ीदत थी। वे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजालिस और ज़ियारत का ख़ास एहतमाम करते थे।

उन्होंने बयान किया कि आप इस तरह ज़िंदगी बसर करते थे कि रोज़ाना मिलने वाले भी नहीं जानते थे कि आप एक अज़ीम मरजा-ए-तक़लीद के भाई हैं। अगर कहीं इसका ज़िक्र हो जाता तो फ़ौरन मौज़ू बदल देते थे। आपने एक मुख़्लिसाना ज़िंदगी गुज़ारी।
इस मौक़े पर मौलाना सैयद नक़ी अब्बास और मौलाना मुहम्मद रज़ा ने बारगाह-ए-अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम में मन्ज़ूम नज़राना-ए-अक़ीदत पेश किया।
आख़िर में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी इमाम ए जुमआ लखनऊ ने मजलिस-ए-तरहीम से ख़िताब किया। प्रोग्राम की निज़ामत के फ़राइज़ मौलाना सैयद अली हाशिम आबिदी ने अंजाम दिए। जलसा-ए-ताज़ियत व मजलिस-ए-तरहीम में उलेमा, अफ़ाज़िल, तलबा जामिया इमामिया व जामिअतुर रिसालतुल इलाहिया लखनऊ और मोमिनीन ने शिरकत की।
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