बुधवार 4 मार्च 2026 - 06:13
रोज़े के अहकाम । रमज़ान के महीने यात्रा का हुक्म

न्यायशास्त्र और शरई अहकाम के विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन वहीद पुर ने रमज़ान के महीने के अहकाम बयान किए है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दीनी मुद्दो के विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन वहीदपुर ने रमज़ान के महीने के अवसर पर शरई अहकाम बयान किए है। जिन्हे शरई मसाइल मे रूचि रखने वालो के लिए बयान किया जा रहा है।

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम

क्योकि इस वर्ष रमज़ान का महीना और ईरान मे ईद नौरोज़ एक साथ आ रहे है इसलिए कुछ बिंदुओ का उल्लेख करना अत्यंत ज़रूरी है और उनका जानना ईरानीयो के अलावा दूसरे लोगो के लिए भी लाभकारी है।

प्रत्येक रमज़ान के महीने मे यात्रा करने के मुद्दे से संबंधित सवाल किया जाता है। हालाकि ईद नौरोज़ के पहले दो तीन दिन मे कि जब रमज़ान का महीना शुरू नही हो रहा यात्रा करने के हुक्म का रमज़ान के महीने से कोई संबंध नही है लेकिन अगर रमज़ान का पवित्र महीना के आरम्भ मे कोई यात्रा करना चाहे तो उसके लिए है किः

रमज़ान के महीने मे यात्रा करने मे शरई हिसाब से कोई समस्या नही है यहा तक कि अगर कोई रमज़ान के महीने के रोज़ो से फ़रार के लिए भी यात्रा करे तो वह भी हराम नही है बल्कि मकरूह है। लेकिन वह लोग जो रमज़ान के रोज़ो से फ़रार के लिए नही बल्कि सिले रहमी, ज़ियारत या कोई वैध मनोरंजन इत्यादि के लिए यात्रआ पर जाए तो उनके लिए शरई कोई रोक टोक नही है। लेकिन रमज़ान के महीने के बाद आने वाले रमज़ान से पहले छूठ जाने वाले रोज़ो की क़ज़ा करना ज़रूरी है। हालाकि वह जहा यात्रा मे जाए वहा पर अगर दस दिन से अधिक रुकने का इरादा हो तो वह वहा रमज़ान के महीने के रोज़े भी रख सकता है।

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