रोज़े के अहकाम: (7)
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धार्मिकशरई अहकाम | अरफ़ा के दिन रोज़ा रखना
हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामनेई (र) ने अरफ़ा के दिन रोज़ा रखन के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर दिया है।
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धार्मिकरोज़े के अहकाम । रमज़ान के महीने यात्रा का हुक्म
न्यायशास्त्र और शरई अहकाम के विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन वहीद पुर ने रमज़ान के महीने के अहकाम बयान किए है।
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धार्मिकरोज़े के अहकाम । यात्रीयो के लिए रमज़ान के महीने मे खुल्लम ख़ुल्ला जल पान करने का हुक्म
न्यायशास्त्र और शरई अहकाम के अध्यापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन वहीदपुर ने रमज़ान के महीने के अहकाम का वर्णन किया है।
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धार्मिकरोज़े के अहकाम । इस हालत में हमारे रोज़े का क्या हुक्म है, जब हमें पता ही नहीं चला कि अज़ान हो रही है और हम सहरी खाने में व्यस्थ थे?
रोज़े के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में से एक यह है कि हम सहरी के समय उठे और सहरी खाने में व्यस्थ थे। अचानक हमने देखा कि अज़ान हो चुकी है और निवाला अभी भी हमारे मुँह में है, तो हमें…
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धार्मिकरोज़े के अहकामः बीमार साल क्या है और उसने जो रोज़े नहीं रखे उनका क्या हुक्म है?
अगर कोई इंसान पूरे साल बीमार रहता है, यानी रमज़ान के महीने को छोड़कर बीमार रहता है, तो उसे रोज़ों की क़ज़ा नहीं करनी पड़ती और उस पर इस मुबारक महीने के रोज़े फ़र्ज़ नहीं हैं और उसे फ़िदया (कम…
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धार्मिकशरई अहकाम | यदि कोई व्यक्ति इस बात पर आश्वस्त है कि रोज़ा रखने से उसे कोई नुकसान नहीं होगा, तो वह रोज़ा रखता है और बाद में उसे पता चलता है कि रोज़ा रखना हानिकारक था, तो क्या हुक्म है?
अगर किसी व्यक्ति को भरोसा हो कि रोज़ा उसके लिए हानिकारक नहीं है और वह रोज़ा रखे और मगरिब के बाद उसे पता चले कि रोज़ा उसके लिए इतना हानिकारक था कि वह इसकी परवाह करता तो (एहतियाते वाजिब की बिना…
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धार्मिकजब अल्लाह जीविका देता है, तो इंसान मज़दूरी क्यों तय करता है?
हौज़ा/तौहीद के नज़रिए से, अल्लाह ही असली देने वाला है और इंसान सिर्फ़ जीविका देने का एक माध्यम है। इंसानों को जीविका देना अल्लाह की मर्ज़ी पर है, उससे अलग और आज़ाद नहीं। इस बात को समझने से इंसान…