हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ख़ुरासान रज़वी के वक्ताओं के समाज के सदस्य हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली ग़फ़ूरी मनिश ने इमाम रज़ा अ.स. के रौज़े में उम्मत के नेता की याद में आयोजित विशेष शोक सभा को संबोधित किया। इमाम रज़ा (अ.स.) के रौज़े के इमाम खुमैनी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में अफ़ग़ानिस्तान से आए शरणार्थी ज़ायरीन ने भी शिरकत की।
उन्होंने इस्लामी संस्कृति में शहीदों के उच्च स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा,शहीदों ने अपनी जानों का बलिदान देकर उम्मते-इस्लामी के लिए इज़्ज़त, स्वतंत्रता और बुलंदी का मार्ग प्रशस्त किया है और ईमान, निष्ठा और बलिदान के साथ राह-ए-ख़ुदा में शहादत का उच्च पद प्राप्त किया है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अली ग़फ़ूरी मनिश ने पवित्र क़ुरआन की एक आयत का हवाला देते हुए कहा, इस्लामी शिक्षाओं में यह स्पष्ट किया गया है कि जो लोग राह-ए-ख़ुदा में शहीद होते हैं वे मुर्दा नहीं बल्कि अपने परवरदिगार के पास जीवित होते हैं और रिज़्क़-ए-इलाही से नवाज़े जाते हैं। यह सच्चाई शहीदों के महान स्थान और हक़ के रास्ते में बलिदान के बेमिसाल मूल्य को दर्शाती है।
उन्होंने आगे कहा,शहीदों ने अपनी क़ुर्बानियों के ज़रिए हक़ और इंसाफ़ के रास्ते को ज़िंदा रखा और इस्लामी समाज को शांति और इज़्ज़त अता की। आज उम्मत ए इस्लामी की ज़िम्मेदारी है कि वह उनके रास्ते को जारी रखे और समाज में बलिदान और शहादत की संस्कृति को ज़िंदा रखे।
ख़ुरासान रिज़वी के वक्ताओं के समाज के सदस्य ने अंत में कहा: रहबर-ए-शहीद इमाम ख़ामेनई का रास्ता प्रतिबद्धता, ईमान और हक़ के रास्ते में स्थायित्व का एक उज्ज्वल उदाहरण है। ज़ुल्म और विचलन के मुक़ाबले में शहादत और प्रतिरोध का चुनाव समाज और आने वाली नस्लों के लिए हमेशा प्रेरणा और हौसले का स्रोत बनता है।
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