सोमवार 9 मार्च 2026 - 15:00
ट्रम्प की धमकीयो से ईरानी जनता डरने वाली नहीः मौलाना तक़ी अब्बास कलकत्तवी

ट्रम्प की धमकीया वैश्विक स्तर पर ईरान के खिलाफ़ बढ़ते हुए दबाव का हिस्सा है, लेकिन ईरानी जनता इन धमकीयो को एक नया चैलेंज समझ कर उनका सामना करने के लिए तय्यार दिखाई देती है।

लेखकः मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी कलकत्तवी

हौज़ा न्यूज़ ! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेताया है कि अगर उन्होने अमेरिका के मफ़ादात को नुकसान पहुचाने का प्रयास किया तो अमेरिका ईरान को गंभीर रूप से निशाना बनाएगा। यह धमकिया नई नही है, बल्कि उनकी निरंतरता उस पालिसी का हिस्सा है जो उनसे पहले राष्ट्रपतियो ने अपने राष्ट्रपति शासन काल मे अपनाई थी। ट्रम्प ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम और उसके मध्य एशिया मे बढ़ते हुए असर और रुसूख के खिलाफ़ बार बार कठोर स्टेंड अपनाया। लेकिन एक सवाल जो वैश्विक स्तर पर उभरता है वह है कि क्या इन धमकीयो से ईरान पर कोई प्रभाव पड़ेगा? क्या ईरान वास्तव मे ट्रम्प की धमकीयो से डर जाएगा?

सर्वप्रथम तो यह सझना ज़रूरी है कि ईरान एक ऐसा देश है जिसने पिछले कई दशको मे निरंतर विदेशी दबाव का सामना किया है। अमेरिका की ओर से आर्थिक प्रतिबंध, सैनिक हस्तक्षेप और परमाणु समझौते का निरस्तीकरण जैसी कार्रवाईया ईरान के लिए नई बात नही है। ईरान के नेतृत्व ने हमेशा अपनी जनता को अपने लाभो की रक्षा के संबंध से मजबूत और मोहकम रहने की ओर आकर्षित किया है।

ईरान का परमाणु प्रोग्राम और उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता

ईरान के परमाणु प्रोग्राम, जो वैश्विक स्तर पर तनाज़े का विषय बन चुका है, ईरानी नेतृत्व की दृष्टि मे एक आवश्यक प्रतिरक्षात्मक टूल है। ईरान के नेतृत्व का कहना है कि उनका परमाणु प्रोग्राम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है, लेकिन पश्चिमी देश इस पर संदेह और आशंका जताते है। ईरान की सरकार हमेशा इस बात पर ज़ोर देती है कि वह अपनी जनता की संप्रभूता को हर मूल्य पर बचाने के लिए तैयार है, चाहे उसके लिए उन्हे वैश्विक शक्तियो के साथ युद्ध ही क्यो ना करना पड़े।

ट्रम्प की धमकिया और ईरान की प्रतिक्रिया

ट्रम्प की धमकिया वैश्विक स्तर पर ईरान के खिलाफ़ बढ़ते हुए दबाव का हिस्सा है, लेकिन ईरानी जनता इन धमकीयो को एक नया चैलेंज समझ कर उनका सामना करने के लिए तैयार दिखाई देती है। ईरानी सरकार के प्रवक्ताओ और नेताओ ने ट्रम्प के इलज़ामात और धमकीयो का जवाब देते के लिए निरंतर बयान दिए है कि ईरान किसी भी प्रकार के विदेशी हस्तक्षेप या धमकीयो से नही डरेगा। ईरान की राजनीति मे आंतरिक स्तर पर भी जनता का समर्थन प्राप्त है, जो अपनी सरकार के राष्ट्रीय संप्रभूता की प्रतिरक्षा के लिए एकजुट है।

आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत एक नया अज़्म

ईरान मे आयतुल्लाह ख़ामेनई की शहादत ने एक नया मोड़ लिया है। यह घटना न केवल ईरान के लिए बड़ा नुकसान है, बल्कि ईरानी जनता मे प्रतिशोध की एक नई लहर भी पैदा कर चुकी है। आयतुल्लाह ख़ामेनई की शख्सीयत जो एक रूहानी नेता और राजनीतिक लीडर दोनो के रूप मे जानी जाती थी, ने अपनी जनता मे एक ऐसा इरादा पैदा किया था। उनकी शहादत के बाद ईरान की जनता का भरपूर प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया कि वह अपने सुप्रीम लीडर के रक्त का प्रतिशोध लेने के लिए किसी भी चैलेंज का सामना करने के लिए तैयार है।

ईरान के कई शहरो मे प्रदर्शन इस बात को स्पष्ट कर रहे है कि ईरानी जनता अपने नेता के खून का हिसाब लेने के लिए एक नया आंदोलन मे शामिल हो गई है। यह आंदोलन न केवल धार्मिक इरादे को इजहार है बल्कि राष्ट्रीय संप्रभूता के लिए एक शक्तिशाली संदेश भी है। ईरानी सरकार ने इस अवसर पर अपनी जनता से वादा किया है कि वह अपने लीडर के खून का प्रतिशोध अवश्य लेगे। और इस इरादे को वैश्विक स्तर पर दिखाया जा रहा है कि ईरान किसी भी प्रकार के विदेशी हस्तक्षेप और दबाव अथवा धमकीयो से नही डरेगा।

परिणाम

निश्चित रूप से ट्रम्प की धमकिया एक और कठोर अध्याय का आरम्भ है। मगर ईरानी जनता का इतिहास और सरकार की दृढता को देखते हुए यह कहना मुशकिल है कि ईरान इन धमकीयो से किसी बड़े परिवर्तन की ओर आकर्षित होगा। ईरान ने हमेशा अपनी जनता और संप्रभूता और क्षेत्रीय लाभो का भरपूर रक्षा की है और भविष्य मे भी यही हिकमत अमली इख्तियार करने की संभावना है।

जहा तक वैश्विक संबंधो का सम्बध है, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और भरोसा न होने की फ़िजा बाकी रहने की संभावना है, और ट्रम्प की धमकीया इसमे अधिक तनाव का कारण बन सकती है, मगर ईरानी जनता धमकीयो से प्रभावित होने के बजाय उनका सामना करने के लिए तैयार नज़र आती है।

ईरान के नेतृत्व ने यह संदेश दे दिया है कि हमारी जनता नतो भयभीत होगी और न ही कभी अपने सिद्धांतो से पीछे हटेगी कर्बला के जानिसार हुसैनी नजरयात के अनुसरण कर्ताओ और ईरानी जनता अपने लीडर के खून का प्रतिशोध लेने के लिए हर चैलेंज का सामना करने के लिए तैयार है। उनका ईमान मौत पर नही बल्कि हक़ की बक़ा पर है।

डरते नही है मौत से डरती है हमसे मौत

हम लोग कर्बला से कफन लेके आते है  

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