बुधवार 11 मार्च 2026 - 13:37
हम अपने खून की अंतिम बूंद तक आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई के आदेशों के आज्ञा का पालन करेंगे

हौज़ा / आयतुल्लाह रजबी ने अपने एक पैग़ाम में नए रहबर ए इंक़ेलाब ए इस्लामी के चुनाव पर मुबारकबाद देते हुए कहा,मैं पूरी अजज़ी के साथ वली-ए-फ़क़ीह और नाइब-ए-इमाम-ए-ज़मान अ.त.फ.स. की बैअत का एलान करता हूँ और दिल की गहराइयों से, विलायत-ए-फ़क़ीह के इस मोहतरम नज़रिए पर पूरा यक़ीन रखते हुए जो इस्लाम-ए-नाब-ए-मुहम्मदी की फ़िक्र का मरकज़ है, अपनी जान की आखिरी सांस तक उनके आदेशों की इताअत करूँगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मजलिस ए खुबरेगान-ए-रहबरी के सदस्य आयतुल्लाह महमूद रजबी ने अपने पैग़ाम में हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई दामत बरकातुहु को इस्लामी इंक़िलाब के तीसरे रहबर चुने जाने पर मुबारकबाद पेश की है।

بسم اللہ الرحمن الرحیم

ما نَنْسَخْ مِنْ آیَةٍ أَوْ نُنْسِها نَأْتِ بِخَیْرٍ مِنْها أَوْ مِثْلِها أَ لَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اَللّهَ عَلی کُلِّ شَیْءٍ قَدِیرٌ

हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई दामत बरकातुहु व अदामल्लाहु ज़िल्लहु

मैं आपके गिरामी वालिद और उम्मत के अज़ीम क़ाइद, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा इमाम सैय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई क़ुद्दसल्लाहु नफ़्सहुज़ ज़किय्या की शहादत पर आपकी खिदमत में तअज़ियत और तबरीक शोक और बधाई पेश करता हूँ।

इसी तरह मैं मिल्लत के अमीनों और मजलिस-ए-खुबरेगान के इस हकीमाना और दानिशमंदाना क़दम पर भी आपको मुबारकबाद पेश करता हूँ कि उन्होंने आपको जो अपने वालिद के हक़ीकी जानशीन, आलिम, सालेह, शुजा (बहादुर), बसीर और हकीम हैं, इस्लामी इंक़िलाब के रहबर के तौर पर मुंतख़ब किया।

यह शाइस्ता इंतेख़ाब दरअसल हकीम-ए-खुदा की ख़ास मेहरबानी और हज़रत बक़िय्यतल्लाहिल आज़म (अ.त.फ.स.) की ख़ुसूसी इनायत का मज़हर (प्रतीक) है, जो साबिर, मुजाहिद, वफ़ादार और विलायत से वाबस्ता ईरानी क़ौम के लिए अता हुआ है।

इंशाअल्लाह आपकी क़यादत, जिसने पूरी उम्मत-ए-इस्लामिया ख़ुसूसन ईरान के मोहतरम अवाम के दिलों को इत्मीनान बख्शा और दुश्मनान-ए-इंक़िलाब को मायूस किया है, इमाम-ए-राहिल  और इंक़िलाब के शहीद इमाम के नूरानी रास्ते के तसल्सुल की बशारत देगी।

मैं बतौर तालिब-ए-इल्म हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम पूरी अजज़ी के साथ वली-ए-फ़क़ीह और नाइब-ए-इमाम-ए-ज़मान (अ.त.फ.स.) के साथ अपनी बैअत का एलान करता हूँ और दिल की गहराइयों से, विलायत-ए-फ़क़ीह के इस मोहतरम नज़रिए पर ईमान रखते हुए जो इस्लाम-ए-नाब-ए-मुहम्मदी की फ़िक्र का मरकज़ है, अपने खून के आखिरी क़तरे तक आपके आदेशों की इताअत का अहद करता हूँ।

महमूद रजबी

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