हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हिज्बुल्लाह लेबनान के महासचिव शेख नईम कासिम ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर कहा है कि इजरायली दुश्मन से युद्ध के बीच मोलभाव का अर्थ समर्पण स्वीकार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दुश्मन जमीन पर कब्जे और लगातार हमलों में लिप्त हो, तो उससे बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बनती।
हिज़्बूल्लाह के महासचिव ने कहा कि अमेरिका और इजराइल की ओर से 'ग्रेटर इजराइल' की साजिश रची गई है, जिसके तहत नील से फरात तक के क्षेत्रों पर कब्जे की योजना है। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 नवंबर 2024 के समझौते के बावजूद इजराइल ने 15 महीने तक लगातार आक्रमण जारी रखा।
उन्होंने कहा कि लेबनान के सामने अब केवल दो ही विकल्प हैं—या तो अपनी जमीन, सम्मान और संप्रभुता छोड़ दी जाए, या फिर प्रतिरोध के जरिए दुश्मन के मंसूबों को नाकाम किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध ने यह समय खुद चुना ताकि दुश्मन लेबनान को अकेले निशाना न बना सके।
हिज्बुल्लाह प्रमुख शेख नईम क़ासिम ने इस बात पर जोर दिया कि जब देश पर हमले हो रहे हों, उस समय मोलभाव की बात करना लेबनान की सारी क्षमताओं को समाप्त करने जैसा है। उन्होंने कहा कि जो देश हर दिन हमला कर रहा हो, उसके साथ मूल रूप से कोई वार्ता नहीं हो सकती।
उन्होने सभी नागरिकों, सेना, राजनीतिक दलों और संस्थाओं से इजरायल-अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय एकता ही दुश्मन को निराश कर सकती है। इस घड़ी में सिर्फ एक ही नारा होना चाहिए—आक्रमण रोकना और धरती को मुक्त कराना।"
अपने बयान में शेख नईम क़ासिम ने ईरान का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल जैसी ताकतों के खिलाफ ईरान का संघर्ष सबके लिए सबक है। उन्होंने कहा कि इन ताकतों पर जीत पूरे क्षेत्र के लिए खैरियत लेकर आएगी।
बयान के अंत में उन्होंने प्रतिरोध सेनानियों और आम नागरिकों के बलिदानों को सलाम करते हुए कहा कि यह संघर्ष लेबनान की स्वतंत्रता और गरिमा के लिए है, और इसमें हार नहीं होगी।
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