शनिवार 28 मार्च 2026 - 12:14
इराकी हुकूमत को चाहिए कि वह इस्राईल और अमरीका के खिलाफ जंग में अपना अमली मौक़िफ़ बयान करे

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सदरुद्दीन क़बानची ने कहा, इराक की आला मरजइयत अपना मौक़िफ़ पहले ही बयान कर चुकी है, अवाम भी अपनी बात कह चुकी है, और हश्दुश्शाबी ने भी अपना स्टैंड वाज़ेह कर दिया है; अब इराक की हुकूमत की बारी है कि वह कोई अमली क़दम उठाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,नजफ़ अशरफ़ के इमाम-ए-जुमा हुज्जतुल इस्लाम सैयद सदरुद्दीन क़बानची ने कहा कि इराक की हुकूमत अब अमली (प्रैक्टिकल) तौर पर अपना मौक़िफ़ वाज़ेह करे, ख़ास तौर पर इस जंग के सिलसिले में जो इस्राईल और अमरीका की तरफ़ से ईरान के ख़िलाफ़ चल रही है।

उन्होंने कहा कि इराक की मरजइयत अपना मौक़िफ़ पहले ही बयान कर चुकी है, अवाम भी अपनी राय दे चुकी है, और हश्दुश्शाबी ने भी अपना स्टैंड साफ़ कर दिया है, अब हुकूमत की बारी है कि वो भी अमली क़दम उठाए।जुमआ के ख़ुत्बे में उन्होंने कहा कि इस जंग में हक़ के साथ खड़ा होना ज़रूरी है।

हौज़ा-ए-इल्मिया को बंद करना दरअसल एकजुटता दिखाने और तमाशाई न बनने के लिए था। आयतुल्लाह सिस्तानी की तरफ़ से भी बयान आया जिसमें जंग से मुतास्सिर लोगों की मदद को वाजिब-ए-किफ़ाई बताया गया और ईरान पर हमले की मज़म्मत की गई।

उन्होंने कहा कि दुश्मन धमकी दे रहा है कि मरीन फ़ोर्स ईरान में दाख़िल होगी, लेकिन ईरान ने भी एक मिलियन मुजाहिदीन तैयार कर रखे हैं। ईरान की शर्तें ये हैं:फ़िलिस्तीन को उसके असली लोगों के हवाले किया जाए,जंग के नुक़सान की भरपाई हो,इस्राईली रहनुमाओं पर मुक़दमा चलाया जाए

उन्होंने कहा कि इराक के लोग सियासी पार्टियों से नाराज़ हैं क्योंकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के इंतिख़ाब में देर हो रही है। साथ ही लोग इस बात से भी नाखुश हैं कि हुकूमत ईरान और लेबनान के मसले पर मज़बूत मौक़िफ़ नहीं ले रही। अवाम चाहती है कि ईरान और लेबनान की सियासी, माली और मीडिया के ज़रिये मदद की जाए।

उन्होंने हुकूमत से ये भी कहा कि जॉर्डन को मुफ्त तेल देना बंद किया जाए, क्योंकि वो तेल आगे इस्राईल तक पहुँचता है।क़तर के मौक़िफ़ की तारीफ़ करते हुए कहा कि उसने बहादुरी से अपने पड़ोसियों का साथ देने का एलान किया।

उन्होंने पानी के ज़ख़ीरे के लिए डैम बनाने पर ज़ोर दिया और ताजिरों से कहा कि महंगाई में ग़ैर-मुनासिब इज़ाफ़ा न करें।

रसूल-ए-अकरम स.ल. और अहलेबैत (अ.स.) से तवस्सुल इस्लामी तहज़ीब का हिस्सा है और ये सिर्फ़ शिया तक सीमित नहीं।जन्नतुल बक़ी में इमामों की क़ब्रों को गिराना मुसलमानों को उनकी तारीख़ से काटने की कोशिश थी।

5 शव्वाल को हज़रत मुस्लिम बिन अकील (अ.) का कूफ़ा आना हुआ था, जो कर्बला के वाक़िये का अहम हिस्सा था। इमाम हुसैन (अ.स.) ने यज़ीद जैसे शख़्स की बैअत से इंकार किया क्योंकि वो नालायक हाकिम था।

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