हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम सादिक़ निज़ाद ने कहा, इमाम अली (अ) के दृष्टिकोण से निराशा मानव आत्मा के सबसे बड़े अभिशापों में से एक है जो समस्याओं का सामना करने की इच्छाशक्ति और प्रतिरोध की क्षमता को नष्ट कर देती है।
हुज्जतुल इस्लाम साद़िक़ निज़ाद हज़रत इमाम रज़ा (अ) के दीवानों के राष्ट्रीय समूह के प्रमुख ने तबरीज़ में हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के संवाददाता से बात करते हुए नहजुल-बलाग़ा में इच्छाशक्ति और सहनशीलता का जिक्र करते हुए इमाम अली (अ) की शिक्षाओं के बारे में बताया कि कैसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए इच्छाशक्ति, मानसिक दृढ़ता और सहनशीलता को बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने आज की तनावपूर्ण दुनिया में दृढ़ इच्छाशक्ति रखने की आवश्यकता की ओर इशारा करते हुए नहजुल-बलाग़ा को कठिनाइयों के प्रबंधन के लिए एक सामरिक और व्यावहारिक खजाना बताया और कहा: यह मूल्यवान पुस्तक एक प्रतिरोधी और आशावान व्यक्तित्व के निर्माण के लिए व्यावहारिक सिद्धांतों का एक सेट प्रदान करती है।
हुज्जतुल इस्लाम साद़िक़ निज़ाद ने 'सहनशीलता' को सक्रिय और आस्थावान धैर्य के रूप में परिभाषित किया और कहा،नहजुल-बलाग़ा में धैर्य के दो आयाम हैं - (१) नफ्स के प्रलोभनों के खिलाफ तर्कसंगत और जागरूक धैर्य, (२) ईश्वरीय शक्ति पर भरोसे के साथ आस्थावान धैर्य जो हृदय को शांति और संतुष्टि प्रदान करता है।
उन्होंने इच्छाशक्ति को सद्कर्मों को आगे बढ़ाने वाली शक्ति बताया और याद दिलाया मजबूत इच्छाशक्ति व्यक्ति को फिसलन से दूर रखती है और उसे उच्च लक्ष्यों के मार्ग पर स्थिर रखती है।
हज़रत इमाम रज़ा (अ) के दीवानों के राष्ट्रीय समूह के प्रमुख ने नहजुल-बलाग़ा में कमजोर इच्छाशक्ति की बाधाओं की जड़ों का जिक्र करते हुए कहा: दुनिया का प्यार लालच, निराधार भय, हताशा और आंतरिक प्रतिभाओं से अनभिज्ञता, इच्छाशक्ति और सहनशीलता को कमजोर करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।
उन्होंने कहा, इमाम अली (अ) ने नहजुल-बलाग़ा में इच्छाशक्ति को मजबूत करने के लिए प्रभावी रणनीतियों का एक सेट प्रस्तुत किया है, जिसमें शामिल हैं गंभीर प्रयास के बाद ईश्वर पर तवक्कुल निर्णय लेने में बुद्धि और योजना का उपयोग, नैतिक साहस और असत्य के खिलाफ खड़ा होना, न्याय-केंद्रितता और मानसिक संतुलन बनाना, भावनाओं का प्रबंधन और हताशा से बचना, तथा संकटों के लिए तैयारी और पूर्वानुमान।
हुज्जतुल इस्लाम सादिक़ निज़ाद ने कहा,उनके खिलाफ हुए उथल-पुथल अपने साथियों के बीच एकता बनाए रखना और संदेहों का तर्कसंगत जवाब देना, इमाम अली (अ) की खिलाफत के दौरान दृढ़ इच्छाशक्ति और लचीलेपन के सबसे अच्छे उदाहरण हैं।
उन्होंने नहजुल-बलाग़ा को एक प्रतिरोधी और ईश्वर-केंद्रित जीवन शैली के लिए एक व्यापक विश्वकोश बताया और स्पष्ट किया,इन शिक्षाओं पर अमल करने से दृढ़ विश्वास, मजबूत इच्छाशक्ति और व्यक्तिगत एवं सामाजिक संकटों से पार पाने की क्षमता वाली पीढ़ी के निर्माण की नींव पड़ेगी।
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