शनिवार 4 अप्रैल 2026 - 12:11
ईरान कुरआन के वैश्विक वादों की पूर्ति का प्रणेता हैः आयतुल्लाह अराकी

हौज़ा / आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने कहा है कि ईरान की राष्ट्र, विलायत, ईसार,त्याग और शहादत के अलवी व आशूराई जज़्बे के साथ न केवल अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली के मकतब की वास्तविक प्रतिनिधि है, बल्कि कुरान के वैश्विक वादों की पूर्ति में भी केंद्रीय भूमिका निभा रही है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हज़रत फातिमा मासूमा (स.ल.) के हरम में शहीद सैयद अब्दुर्रहीम मूसवी के जनाज़े के अवसर पर खिताब देते हुए आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने कहा कि अमीरुल मोमिनीन (अ.) का मकतब वास्तव में इश्क़-ए-इलाही वफ़ादारी और ख़ुदा की राह में जान न्योछावर करने का मकतब है, और ईरान की राष्ट्र आज इसी अलवी और आशूराई मार्ग पर स्थिर दिखाई देती है।

उन्होंने कुरान की आयत «يُحِبُّهُمْ وَيُحِبُّونَهُ» (वह उनसे प्रेम करता है और वे उससे प्रेम करते हैं) का हवाला देते हुए कहा कि यह वही इलाही शिआर  है जो सबसे पहले अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) के पवित्र व्यक्तित्व में प्रकट हुआ, और आज यही शिआर विलायत के अनुयायियों, विशेषकर ईरान की राष्ट्र की आध्यात्मिक पहचान बन चुका है।

आयतुल्लाह अराकी ने कहा कि ईरानी राष्ट्र को यह ऐतिहासिक विशेषता प्राप्त है कि वह कुरान की उन शुभ सूचनाओं की व्यावहारिक ताबीर (व्याख्या) बन रही है, जिनमें इस्लाम धर्म और कुरानी शिक्षाओं के वैश्विक प्रसार का वादा किया गया है। उनके अनुसार, विलायत से जुड़ाव ने ईरान की राष्ट्र को ऐसा संकल्प, दृष्टि (बसीरत) और दृढ़ता प्रदान की है कि वह अत्याचारी (इस्तिकबारी) ताकतों के मुकाबले डटकर खड़ी है।

उन्होंने शहीद सैयद अब्दुर्रहीम मूसवी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ऐसे ईमानदार, विश्वासी और बलिदानी कमांडर ईरान की राष्ट्र के लिए व्यावहारिक उदाहरण हैं। उनके अनुसार, शहीदों की यही बलिदान की भावना आज ईरान को विभिन्न क्षेत्रों में अद्भुत दृढ़ता और उपस्थिति प्रदान कर रही है।

आयतुल्लाह अराकी ने आगे कहा कि आज ईरान ख़ुदा, रसूले अकरम (स.ल.व.) और अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) के प्रेम का प्रमुख केंद्र बन गया है।

उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र की एक प्रमुख विशेषता यह है कि उसने हमेशा अपने सर्वश्रेष्ठ संतानों को ख़ुदा की राह में प्रस्तुत किया है, और शहीदों का पवित्र रक्त ही इस्लामी क्रांति के जीवन, स्थायित्व और प्रगति की गारंटी है।

भाषण के अंत में आयतुल्लाह अराकी ने जनता, विशेषकर युवाओं से जिहाद और सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि धर्म और वतन की रक्षा के मोर्चे पर खड़ा होना एक महान सम्मान है।

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