बुधवार 15 अप्रैल 2026 - 07:11
मानवता के खिलाफ़ अमेरिका और इज़रायल के षडयंत्र

मानवता के अस्तित्व के लिए आवशयक है कि उन षडयंत्रो का पर्दा फ़ाश किया जाए। अमेरिका और इज़रायल का यह शांति गठबंधन, न्याय और समानता के हर अंतर्राष्ट्रीय मानक का उल्लंघन करता है। इतिहास साक्षी है कि मज़लूम कौम सदैव जीवित रहती है और अत्याचारी अपने चमचमाते भवनो के मलबे तले दब जाते है। अलहम्दोलिल्लाह मानव ज़मीर जाकरूक हो रहे है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, क़ुम अल मुक़द्देसा के निवासी भारतीय शिया धर्म गुरू मौलाना डॉ सय्यद अब्बास महदी हसनी ने मानवता के ख़िलाफ़ अमेरिका और इज़ारयल के षडयंत्रो के शीर्षक से अपने एक लेख मे कहा कि मानवता का इतिहास घावो से लथपथ और खून से रंगीन है। जहा एक ओर मानवीय मूल्यो पर आधारित सभ्यता (शुद्ध मुहम्मदी इस्लाम) मानव मित्रता का नारा लगाती है, वही दूसरी ओर शैतान सिफ़्त शक्तिया मानवता और मानवीय मूल्यो के खिलाफ़ षडयंत्रो मे सरगर्म रहती है। अमेरिका और इज़रायल का गठबंधन आज इन्ही काले कारनामो का सर्वोत्तम उदाहरण है जो अपने अहंकार के लिए पूरी मानवता को क़ुर्बान करने पर तुले है।

1948 मे इज़रायल की स्थापना के बाद से फ़िलिस्तीनी जनता को अपने ही देश और घर मे नरसंहार का निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिका ने सदैव इज़रायल को राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य ढाल उपलब्ध कराई। फ़िलिस्तीन के खिलाफ़ युद्ध अपराध, बच्चो और निर्दोष नागरिको का नरसंहार, पानी, खाद्य और दवा की नाकाबंदी यह सब मानवता के खिलाफ़ स्पष्ट अपराध है।

फ़िलहाल मानव विरोधी षडयंत्रो के कुछ तर्को का उल्लेख करना मक़सूद है

पहला तर्क ग़ज़्ज़ा मे नरसंहार है

संयुक्त राष्ट्र और मानवधिकार के विभिन्न संगठनो के अनुसार ग़ज़्ज़ा पट्टी मे 2008 से लेकर आज तक हज़ारो फ़िलिस्तीनी नागरिक - जिनमे बड़ी संख्या मे महिलाए और बच्चो की है- इज़रायली बमबारी मे मारे जा चुके है। अमेरिका के उपलब्ध कराए गए आधुनिक हथियारो से स्कूलो, अस्पतालो और शर्राणथी शिविरो को निशाना बनाया गया। यह एक नियोजित नरसंहार है।

दूसरा तर्क आर्थिक घेराबंदी और सामूहिक दंड है

इज़रायल ने ग़ज़्ज़ा को एक बड़ी जेल मे परिवर्तित कर दिया है। अमेरिका इस घेराबंदी को न केवल यह कि वैध बताता है बल्कि इज़रायल को हर प्रकार का राजनीतिक समर्थन भी प्रदान करता है। 

तीसरा तर्क ड्रोन हमला और टारगेट क्लिंग है

अमेरिका ने ईरान, लबनान, इराक़ और यमन तथा ग़ज़्ज़ा मे ड्रोन हमलो के माध्यम से हज़ारो निर्दोष नागरिको की हत्या की ड्रोन ऑपरेटर्स की ज़बानी शहादते बाताती है कि वह शादीयो, शवो और बाज़ारो को निशाना बनाते है सितम बाला ए सितम यह है कि इन अपराधो पर कभी कोई क़ानूनी कार्रवाई नही हुई।

चौथा तर्क भ्रष्ट मीडिया और प्रोपेगंडा है 

अमेरिका और इज़रायल ने वैश्विक मीडिया पर अपना वर्चस्व स्थापित कर रखा है। प्रतिरोध मोर्चे के निर्दोष इंसानो के नरसंहार को अपनी "आत्मरक्षा" और उनके प्रतिरोध को "आंतकवाद" का नाम दिया जाता है। पश्चिमी मीडिया मे मीनाब के निर्दोष स्कूली छात्राओ के शवो के टुक्ड़ो की अनदेखी की जाती है जबकि इज़रायली सैनिको की हत्या को महत्वपूर्ण खबर बनाई जाती है। 

ईरान मे इज़रायल और अमेरिका ने मिल कर स्कूलो, अस्पतालो, यूनिवर्सिटीयो, आवासीय स्थानो ... पर बम और मीसाइल बरसाए जोकि युद्ध अपराध के उदाहरण है।

मानवता के अस्तित्व के लिए आवशयक है कि उन षडयंत्रो का पर्दा फ़ाश किया जाए। अमेरिका और इज़रायल का यह शांति गठबंधन, न्याय और समानता के हर अंतर्राष्ट्रीय मानक का उल्लंघन करता है। इतिहास साक्षी है कि मज़लूम कौम सदैव जीवित रहती है और अत्याचारी अपने चमचमाते भवनो के मलबे तले दब जाते है। अलहम्दोलिल्लाह मानव ज़मीर जाकरूक हो रहे है।

इंशाल्लाह एक दिन यह षडयंत्र स्वंय, षडयंत्र रचयताओ के लिए वबाल जान बन जाएंगे।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha