शनिवार 30 मई 2026 - 19:13
ईरानी सरकार ने युद्ध मे भी जनता को किसी चीज़ की कोई कमी नही होने दी

जब जंग के हालात होते है तो उसमे आर्थिक चुनौतिया सामने आती है। महंगाई और बेरोज़गारी भी बढ़ती है। लेकिन यहा की सरकार का हमेशा से यह रहा है कि जनता की ज़रूरीयात पर पूरी नज़र होती है और काफ़ी मदद भी करती है और अबी भी किसी भी चीज़ की किसी भी प्रकार से कोई कमी नही होने दी है

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, मौलाना डॉ. सय्यद अब्बास महदी हसनी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने ईरान अमेरिका इज़रायल अतिक्रमण मे और उसके बाद होने वाली पेश आने वाली कठिनाईयो और चुनैतीयो पर बात चीत की। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।

हौज़ाः ईरान इन दिनों आर्थिक मोर्चे पर किन प्रमुख चुनौतियों का सामना कर रहा है? महंगाई और बेरोजगारी की वर्तमान स्थिति क्या है?

डॉ अब्बास महदी हसनीः ज़ाहिर सी बात है जब जंग के हालात होते है तो उसमे आर्थिक चुनौतिया सामने आती है। महंगाई और बेरोज़गारी भी बढ़ती है तो ईरान मे भी उसको देखा जा रहा है महसूस किया जा रहा है लेकिन यहा की सरकार का हमेशा से यह रहा है कि जनता की ज़रूरीयात पर पूरी नज़र होती है और काफ़ी मदद भी करती है और अबी भी किसी भी चीज़ की किसी भी प्रकार से कोई कमी नही होने दी है और सरकार पूरी तरह से जनता की सहायत कर रही है जिसकी वजह से जनता को किसी भी चीज़ की कमी महसूस नही हो रही है।

हौज़ाः पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान की जनता के दैनिक जीवन और स्वास्थ्य सेवाओं पर कैसा असर डाला है?

डॉ अब्बास महदी हसनीः पश्चिमी प्रतिबंधो के बारे मे बता दू कि वो सब ज़ालेमाना है अवैध है बस वो यही चाहते है कि उनके मुक़ाबले मे कोई दूसरा देश विकास करे उनका उद्देश्य यह था जो प्रतिबंध लगाया उन्होने ताकि यहा कि जनता सरकार से नाराज़ हो और फ़िर वो सड़को पर आए और धरना दें फ़िर बाहर से अमेरिका और इज़रायल आए और आने के बाद यहा पर सरकार परिवर्तन करे लेकिन उसमे सफल नही हुए आज सब देख रहे है जनता सड़को पर है और सरकार के समर्थन मे है ज़ाहिर सी बात है जब प्रतिबंध होता है तो उसका असर होता है दैनिक जीवन पर विशेष रूप से यह जो प्रतिबंध लगाते है इनके प्रतिबंध मानवता से दूर होते है इसलिए हम देखते है कि इन्होने कुछ ऐसी दवाओ पर भी प्रतिबंध लगाया हुआ है जिसके कारण ईरान मे काफ़ी मरीज़ो की मृत्यु हो चुकी है तो यह कैसी मानवता है कि दवाओ पर प्रतिबंध लगाया जाए जिसकी वजह से मरीज़ो की मृत्यु हो।

हौजाः ईरान और इज़राइल के बीच हाल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सैन्य टकराव (जैसे एयर स्ट्राइक, साइबर अटैक) ने क्षेत्रीय संतुलन को कैसे प्रभावित किया है?

डॉ अब्बास महदी हसनीः देखिए इसका जवाब यह है कि अभीतक लोगो को मालूम नही था कि ईरान भी इतनी बड़ी ताकत है विशेष रूप से ईरान की मीज़ाइल और ड्रोन की ताकत। अमेरिका और इज़रायाल के बारे मे तो मशहूर है कि दोनो बहुत बड़ी ताक़त है लेकिन ईरान ने, विशेषकर ईरान का मीज़ाइली जो हमला था उसने सभी के लिए स्पष्ठ कर दिया कि उसका कोई जवाब नही है। हालाकि अमेरिका और इज़रायल तो खाड़ी के देशो की धरती का इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन ईरान जो मीज़ाइल फ़ायर कर रहा था और इतने देशो से होकर गुज़र रहे थे और उनको रोका जा रहा था आयरन डोम से गुज़र कर उद्देशित बिंदु पर लगना इनसे इज़रायल का काफ़ी नुक़सान भी हुआ तो इससे पता चलता है कि ईरान अमेरिका और इज़रायल मे जो जंग हुई है ईरान एक बड़ी ताक़त बनकर उभरा है और जंग मे जो नुक़सान हुआ था उसकी ईरान ने भरपाई कर ली है। और अब हर तरह का जवाब देने के लिए ईरान तय्यार है।

हौजाः ईरान का सीरिया, लेबनान (हिजबुल्लाह), इराक और यमन (हौसी) में क्या रणनीतिक हित है और क्या उसकी यह ‘प्रॉक्सी नीति’ अब बदल रही है?

डॉ अब्बास महदी हसनीः इस सवाल के जवाब मे कहना चाहूंगा कि यमन, सीरिया और लेबनान जो है इन सभी का एक साझा उद्देश्य है कि वह यह कि जो भी ज़ालिम है चाहे अमेरिका की शक्ल मे हो या इज़रायल की शक्ल मे हो जिस प्रकार से इन्होने ग़ज़्ज़ा मे नुक़सान पहुंचाया है और अभी तक पहुंचा रहे है दुनिया मे जहा भी ज़ालिम सर उठाते है उनके पीछे अमेरिका और इज़रायल का हाथ होता है इन सभी का उद्देश्य यह है कि दुनिया मे जहा भी अत्याचार हो उसका मिलके मुकाबला किया जाए और इन लोगो ने मिलकर एक मोर्चा बनाया है यह एक मानवता का मोर्चा है शैताना शक्तियो के मुक़ाबले मे जहा जहा भी मानवता खतरे मे होती है मानव वैल्यूज़ खतरे मे होती है वहा यह तीनो ताकते एक हो जाती है यह लोग आपस मे एक दूसरे की मदद करते है। वास्तव मे एक प्रतिरोधी मोर्चा है और इनका उद्देश्य है कि ज़ालिमो का मुक़ाबला हो और मजलूमो की मदद हो।   

हौजाः ईरान में युवा पीढ़ी (खासकर शिक्षित युवा) की मानसिकता क्या है? क्या वे प्रवास (Migration) को बेहतर विकल्प मान रही हैं?

डॉ अब्बास महदी हसनीः ईरान मे जो शिक्षित युवा है उनकी मानसिकता यह है कि वो ज़रूरत पड़ने पर बाहर भी जा सकते है लेकिन बाहर जाके वापस ईरान आके अपने देश के विकास मे भूमिका अदा करेंगे और उनका यह है कि उनको अपने देश को आगे लेके जाना है और ज़रूरत पड़ने पर जाते भी है और इस मानसिकता के साथ जाते है कि हमे वहा जाना है और जो वहा सीख कर आना है उसको हमे अपने देश के विकास और उसकी जनसंख्या और उसके प्रोग्रेस के लिए प्रयास करना है।

हौज़ाः ईरान में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कितना नियंत्रण है? क्या VPN और प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म (जैसे Instagram, Twitter) का उपयोग आम है?

डॉ अब्बास महदी हसनीः ज़ाहिर सी बात है कि ईरान मे इंटरनेट का मिस यूज़ अधिक किया गया था 12 दिव्सीय युद्ध मे उसके बाद यह जंग जो 40 दिन चली उसमे भी उसका मिस यूज़ शुरू हो गया था तो ईरान ने उस पर प्रतिबंध लगा रखा था व्हाटसऐप और इंस्टाग्राम नही चल पा रहा था हालाकि कुछ लोग वीपीएन के जरिए काम कर रहे है या जो लोग ताजिर है उनको भी एक सिम दिया गया ताकि व्यापार मे कोई कठिनाई ना आए।

शैतानी ताक़ते जो है अमेरिका और इज़रायल जिनमे अमेरिका सबका गुरू है मै यह बात स्पष्ठ कर दूं कि यह क़ानून बनना चाहिए कि यह जो इंटरनेट है कोई भी देश इसका मिस यूज़ नही कर सके दूसरे देश के खिलाफ़ क्योकि इंटरनेट से जहा फ़ायदे है उससे सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जासूसी का सबसे बड़ा जाल यूरोपीय देशो ने बिछा रखा है इसके माध्यम से ना जाने कितनो निर्दोष लोगो की हत्या कर दी और ना जाने इसका कितना मिस यूज़ करते है तो इस मिस यूज़ पर प्रतिबंध लगना चाहिए ऐसा क़ानून बने।

हौजाः ईरान में घरेलू ऊर्जा और पानी का संकट कितना गंभीर है? क्या बिजली कटौती और गैस की कमी जैसे मुद्दे रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहे हैं?

डॉ अब्बास महदी हसनीः ईरान खुद भी यह कोशिश करता है कि जनता को कोई कष्ठ ना हो और हर ज़रूरत पर ईरानी सरकार की नज़र होती है जबकि हम देखते है कि हमारे देशो मे ध्यान नही दिया जाता है कि जनता जो है विशेष कर जो गरीब है किस प्रकार महंगाई से झूज रहे है जबकि ईरान मे पूरी तरह से जो ऊर्जा है पानी है गैस है इन सब मे 24 घंटो मे कोई कटौती नही होती जिसकी वजह से जनता को भी कोई कष्ठ नही होती, जनता पूरी तरह से खुशहाल है।

ठीक है युद्ध के हालात है उसकी वजह से दबाव है थोड़ा बहुत जनता पर, लेकिन रोजमर्रा की जो फैसीलीटीज़ है उनपर सरकार ध्यान रखे हुए है उस पर नज़र रखे हुए है सरकार कोशिश कर रही है कि जो महंगाई बढ़ रही है उसको कंट्रोल करे और जो महंगा सामान बेचते है उनपर भी जुर्माना लगाते है तो इस लिहाज़ से कह सकते है कि ईरान क़ाबिले तारीफ़ है कि जो घरेलू उर्जा है पानी है उस पर पूरी तरह से ध्यान दिया जाता है और जो जनता की आवश्यकता की चीज़े है उनमे कोई कमी नही होने देते।

हौज़ाः एक सामान्य ईरानी नागरिक आज किस चीज़ से सबसे ज़्यादा निराश है और उसे किस चीज़ से सबसे ज़्यादा उम्मीद है – कृपया संक्षेप में बताएं।

डॉ अब्बास महदी हसनीः ज़ाहिर सी बात है जो ईरानी नागरिक है वो बिलकुल भी निराश नही है क्योकि वो इस्लाम पर अमल करते है और इस्लाम कभी भी अपने मानने वालो को निराश नही होने देता जो भी मोमिन है वह कभी निराश नही होता। विशेषकर जब से इस्लामी सरकार बनी है तो यह चीज़ उन्होने अपने ज़हन से निकाल दी है कि हमे कभी भी निराश नही होना है।

क्योकि ईरानी क्रांति है यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जो बनाया गया है ताकि वो जो अक़ीदा है कि सभी धर्मो के मानने वालो को चाहे वह ईसाई हो चाहे वह हिंदू धर्म हो चाहे वह यहूदी धर्म हो कि आने वाला आएगा और वह ज़ुल्म को समाप्त करेगा और दुनिया मे अद्ल व इंसाफ स्थापित करेगा तो उस आने वाले के लिए इस्लामी हुकूमत बनी है और उसी आशा के साथ हर नागरिक जी रहा है और उसी की प्रतीक्षा कर रहा है और उसी लिए प्रयास कर रहा है। दुआए कर रहा है।

ईरानी नागरिको को सबसे ज्यादा बुरी बात जो लगती है वह यही कि यह जो यूरोपीय देश है विशेष कर अमेरिका है इन्होने जो धोखे दिए है उससे बहुत ज़्यादा नाराज़ है क्योकि पहले वार्ता करने के लिए कहा दो बार वार्ता के नाम पर इन्होने ईरान पर हमला किया तो अब अमेरिका पर ईरानीयो का बिलकुल कोई भरोसा नही रह गया है और चूकि देख रहे है कि किस प्रकार से धोखा दे रहे है पहले वार्ता के लिए बुलाते है उसी वार्ता के बीच मे हमला करना शुरू कर देते है।

एक ईरानी नागरिक चूकि मोमिन है उसका अल्लाह पर ईमान है उसको क़यामत पर ऐतेकाद है तो वो कभी अपने अंदर निराशा को जन्म नही लेने देता और हमेशा आशा के साथ जीवन जीता है ।

आज आप देखिए कितना हमला किया अमेरिका और इज़रायल ने बहुत सी तबाही मचाई और कितने निर्दोषो को मार दिया छोटे छोटे बच्चो पर भी दया नही की इन्होने और यह चाहते थे कि ईरान को छोटे छोटे टुक्ड़ो मे विभाजित कर दें और सरकार का तख्ता पलट दें और यही जो आम नागरिक है आज सड़को पर है 88 दिन से अधिक बीत चुके है लेकिन वो सड़को पर मौजूद है इस आशा के साथ कि इंशाल्लाह जो आने वाला कल है वो ईरानीयो के लिए ना केवल ईरानीयो के लिए बल्कि दुनिया के इंसान जो चाहते है और खुशहाली चाहते है उनके लिए और आनेवाले जो दिन है वो अच्छे दिन होंगे इंशाल्लाह।

हौज़ाः अंत मे युवाओ विशेषकर ईरानी जनता और युवाओ को क्या संदेश देना चाहेंगे।

डॉ अब्बास महदी हसनीः मैं सभी ईरानी युवाओं और आम जनता को जो संदेश देना चाहता हूँ, वह यह है:

आप विश्वास रखिए कि जिस रास्ते को आपने चुना है, वही सही रास्ता है, वही हक़ (सत्य) का रास्ता है। और जो दुश्मन मुकाबले में है, वह बातिल (असत्य) के रास्ते पर है। इसके अलावा जो भी रास्ता होगा, वह बातिल ही होगा।

इस लिहाज़ से आप मुबारकबाद के काबिल हैं। हम आपके लिए कुछ और नहीं कर सकते, लेकिन दुआ ज़रूर कर सकते हैं कि जिस उद्देश्य को लेकर आप चल रहे हैं और जिस रास्ते को आपने चुना है, अल्लाह आप सबको उसी पर बाक़ी रखे।

और यक़ीन रखिए कि जीत हक़ (सत्य) की ही होगी। जितनी भी बातिल ताकतें हैं — अमेरिका, इज़राइल, और कोई भी बातिल ताकतें हों — वे सब निस्तोनाबूद (तबाह और नष्ट) हो जाएँगी।

क्योंकि आपने हक़ का परचम (झंडा) बुलंद किया है, जो मानवता का झंडा है, जो इंसानी मूल्यों का झंडा है, जो सत्य का झंडा है।

इस झंडे को आप लोग कभी न गिरने दीजिएगा। क्योंकि यह वह झंडा है, जिसने सभी स्वतंत्र इंसानों को, आज़ादी के दीवानों को, एक साथ जमा कर दिया है।

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