हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हाजेबी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लाम महिलाओं को बेमिसाल दर्जा देता है। उन्होंने कहा,हम महिला की गरिमा की रक्षा के मामले में दुनिया के सामने दावा रखते हैं, जवाबदेह नहीं हैं। हमें तर्क और अपने व्यवहार से दुनिया को दिखाना होगा कि इस्लाम की शिक्षा में महिला सम्मान और प्रतिरोध का स्रोत है।
उन्होने ने ईरान की वतन परस्त बेटियों की एक भव्य सभा में कहा कि हज़रत फातिमा मासूमा (स) का उदाहरण इस्लामी सभ्यता के विकास में मार्गदर्शक है। उनके अनुसार, मुस्लिम महिला और बेटी इस्लामी समाज को आकार देने में अद्वितीय भूमिका रखती हैं।
उन्होंने कहा,हज़रत मासूमा (स.ल. ने क़ुम से ईरान, इराक़ और बहरीन के क्षेत्रों तक इस्लामी सभ्यता के लिए संघर्ष किया, और उनके जिहाद की बदौलत क़ुम शहर इस्लामी दुनिया का आध्यात्मिक केंद्र बना।
उन्होंने शहीदों की माताओं और बेटियों को वैश्विक अत्याचार के सामने डटे रहने का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा,मीनाब की शहीद बेटियों ने जो मजलूमियत का झंडा उठाया, उसने उपनिवेशवाद की नींव हिला दी, क्योंकि ये बेटियाँ रहबर के स्कूल और जिहाद की संस्कृति में पली-बढ़ी थीं।
उन्होने ने आगे कहा,वतन परस्त बेटियों का यह प्रतीकात्मक आंदोलन दुश्मनों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, अगर ज़रूरत पड़ी, तो ये हथियार से वतन की रक्षा करेंगी, और अगर ज़रूरत हुई तो उनकी क्लास का कमरा दुश्मन से जंग का मैदान बन जाएगा। यही ईरानी मुस्लिम बेटी के धैर्य और साहस की भावना है।
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