हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मानवीय जिम्मेदारी और धार्मिक चेतना से उपजी एक अनोखी पहल का आज दिल्ली साक्षी बना। 'नूरुल इस्लाम अकादमी ट्रस्ट', 'सत्येर पाथे' और 'अहले बैत-जिला सफर' के संयुक्त प्रयास से जमा की गई कुछ राशि आज मौलाना डॉ. रिज़वानुस सलाम खान ने दिल्ली में ईरानी प्रतिनिधियों को आर्थिक सहायता के रूप में सौंपी।
यह सहायता स्वर्गीय रहबर आयतुल्लाह अली खामेनई (र) के भारतीय प्रतिनिधि आयतुल्लाह डॉ. हाकिम इलाही को प्रदान की गई। इस अवसर पर उन्हें धन के साथ-साथ रहबर की फ्रेमयुक्त विशेष तस्वीर और एक भावपूर्ण शोक संदेश भी सौंपा गया। यह पूरा आयोजन एकजुटता, सहानुभूति और विश्वास का एक सजीव प्रतिबिंब था।
उल्लेखनीय बात यह है कि पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों के दूर-दराज के गांवों, कस्बों और शहरों में जाकर 'नूरुल इस्लाम अकादमी ट्रस्ट', 'सत्येर पाथे' और 'अहले बैत-जिला सफर' के संयुक्त प्रयास से दावती कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस दावती प्रयास के माध्यम से कई महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे प्रचलित सुन्नी मसलक से अहले बैत के मरतबे से संबंधित मसलक को अपना चुके हैं।
उनमें से जिन लोगों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग प्रदान किया है, उस जमा किए गए धन को एकत्रित करके ही ईरान की वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति में सहायता का यह प्रयास साकार किया गया है।
यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, भाईचारे और उम्माह की एकता का प्रतीक है। जिन लोगों ने इस सहायता में भाग लिया है, उनके प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ आयोजकों ने बताया कि प्रत्येक दाता के लिए हार्दिक दुआएँ जारी हैं।
हम आशा व्यक्त करते हैं कि इस प्रकार की पहल भविष्य में भी जारी रहेगी। मानवता के कल्याण और मुस्लिम उम्माह की एकता को मजबूत करने के लिए इस प्रकार के प्रयास निस्संदेह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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