शनिवार 28 फ़रवरी 2026 - 07:02
एक महिला अपने चरित्र और कर्म से पूरे समाज को प्रभावित कर सकती है

पैग़म्बर मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पत्नि उम्मुल मोमेनीन हज़रत खदीजा (स) के वफ़ात दिवस पर हौज़ा न्यूज़ के पत्रकार ने भारतीय लेखक और अहले बैत (अ) फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद तक़ी अब्बास कलकतवी से एक विशेष इंटरव्यू किया जोकि हज़रत ख़दीजा (स) की आध्यात्मिक महानता, त्याग, सब्र, विनम्रता और इस्लाम के लिए उनके अतुलनीय योगदान को उजागर करता है। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है। 

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, पैग़म्बर मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पत्नि उम्मुल मोमेनीन हज़रत खदीजा (स) के वफ़ात दिवस पर हौज़ा न्यूज़ के पत्रकार ने भारतीय लेखक और अहले बैत (अ) फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद तक़ी अब्बास कलकतवी से एक विशेष इंटरव्यू किया जोकि हज़रत ख़दीजा (स) की आध्यात्मिक महानता, त्याग, सब्र, विनम्रता और इस्लाम के लिए उनके अतुलनीय योगदान को उजागर करता है। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है। 

हौज़ा: हज़रत खदीजा (स) की शख्सियत आज की महिलाओं के लिए किस तरह मिसाल है?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: खदीजा बिन्त ख़ुवैलिद (स) की ज़िंदगी आज की महिलाओं के लिए एक संपूर्ण आदर्श है। उनकी पवित्रता, उच्च नैतिक मूल्य, सादगी, इबादत में लगन, पति और परिवार के प्रति समर्पण आज की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। यदि महिलाएँ उनके जीवन से सब्र, त्याग, सेवा और अल्लाह पर भरोसे का पाठ सीखें, तो वे अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक ज़िंदगी को बेहतर बना सकती हैं। उनकी ज़िंदगी यह सिखाती है कि एक महिला अपने चरित्र और कर्म से पूरे समाज को प्रभावित कर सकती है।

हौज़ा: हज़रत खदीजा (स) का इस्लाम के प्रारंभिक दौर में क्या योगदान रहा?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: मुहम्मद (स) पर ईमान लाने वाली वह पहली महिला थीं। उन्होंने न केवल पैगंबर-ए-इस्लाम का साथ दिया, बल्कि अपने धन, प्रभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा को इस्लाम की मजबूती के लिए समर्पित कर दिया। कठिन परिस्थितियों, सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक संकट के समय उन्होंने पैगंबर का मनोबल बढ़ाया और हर तरह से सहयोग किया। उनका योगदान इस्लाम की बुनियाद को मजबूत करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

हौज़ा: हज़रत खदीजा (स) को किन-किन उपाधियों से याद किया जाता है और क्यों?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: हज़रत खदीजा (स) को उनके महान गुणों के कारण कई सम्मानजनक उपाधियाँ दी गईं, जैसे— मलीकतुल अरब (अरब की रानी), नसीरतुर-रसूल (रसूल की सहायक), मुहसिनतुल-इस्लाम (इस्लाम की उपकारी), उम्मुल-मसाकीन (गरीबों की माँ), और उम्मुल-अयताम (अनाथों की संरक्षक)। ये उपाधियाँ उनकी दरियादिली, उदारता, सामाजिक सेवा, और इंसानियत के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती हैं। वे अपने समय की प्रभावशाली और सम्मानित महिला थीं, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्ति को समाज और दीन की भलाई में लगा दिया।

हौज़ा: उनकी वैवाहिक जीवन से आज के दंपतियों को क्या शिक्षा मिलती है?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: उनका जीवन पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और सहयोग की मिसाल है। उन्होंने हर परिस्थिति में पैग़म्बर-ए-इस्लाम का साथ दिया। उन्होंने यह दिखाया कि विवाह केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, त्याग और एक-दूसरे के सपनों को पूरा करने का माध्यम है। एक पत्नी अपने पति के लिए सुकून, सहारा और प्रेरणा बन सकती है। उनका जीवन बताता है कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज की नींव होता है।

हौज़ाः शादी के चयन के बारे में उन्होंने क्या संदेश दिया?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: हज़रत खदीजा (स) की शादी यह संदेश देती है कि विवाह का आधार धन-दौलत नहीं, बल्कि ईमान, नेक चरित्र और नैतिकता होना चाहिए। उन्होंने पैग़म्बर-ए-इस्लाम के चरित्र और सच्चाई को देखकर विवाह का निर्णय लिया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि जीवनसाथी चुनते समय धार्मिकता, सच्चाई, और अच्छे संस्कार को प्राथमिकता देनी चाहिए।

हौज़ाः इस्लाम के प्रचार में उनके आर्थिक सहयोग की क्या भूमिका रही?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति इस्लाम की राह में खर्च कर दी। सामाजिक बहिष्कार और कठिन समय में उनका धन मुसलमानों की मदद, कर्ज़ चुकाने, अनाथों और गरीबों की सहायता के लिए उपयोग हुआ। पैग़म्बर-ए-इस्लाम स्वयं फरमाते थे कि उन्हें किसी धन से उतना लाभ नहीं हुआ जितना खदीजा (स) के धन से हुआ। उनके आर्थिक सहयोग ने इस्लाम की प्रारंभिक संघर्षपूर्ण अवस्था को स्थिरता प्रदान की।

हौज़ा: आज के समाज में महिलाओं की क्या भूमिका है?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: यदि आज की महिलाएँ हज़रत खदीजा (स) के आदर्शों को अपनाएँ, तो समाज में फैली कई बुराइयों—जैसे तलाक़ की बढ़ती समस्याएँ, पारिवारिक विघटन और नैतिक पतन—को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को शिक्षा, नैतिकता, इबादत और पारिवारिक जिम्मेदारियों में संतुलन स्थापित करने की सलाह दी।

हौज़ा: हज़रत खदीजा (स) की ज़िंदगी से उम्मत-ए-मुस्लिम को क्या व्यापक संदेश मिलता है?

अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष: उनकी ज़िंदगी त्याग, समर्पण, सेवा और सच्चाई की मिसाल है। उन्होंने अपनी दौलत, प्रतिष्ठा और आराम को दीन की सेवा में लगा दिया। उनका जीवन बताता है कि सच्ची सफलता अल्लाह की राह में त्याग और इंसानियत की सेवा में है। वे न केवल महिलाओं बल्कि पूरी उम्मत के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी याद हमें यह सिखाती है कि मजबूत ईमान और अच्छे चरित्र से ही समाज में स्थायी सुधार संभव है।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha