हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , अल-जज़ीरा के हवाले से दक्षिण लेबनान में बचाव एवं राहत संगठन ने बताया कि लेबनानी पत्रकार 'अमल खलील' इज़राइली शासन के सैनिकों द्वारा दक्षिण लेबनान के अत-तीरी गाँव में किए गए हमले में शहीद हो गईं।
यह घटना दक्षिण लेबनान के सैन्य अभियान क्षेत्रों में पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को निशाना बनाए जाने की कड़ी में हुई है।
इस खबर के प्रकाशन से कुछ घंटे पहले लेबनानी सूत्रों ने बताया था कि सियोनी शासन के सैनिकों ने खलील और एक अन्य लेबनानी महिला पत्रकार को दक्षिण लेबनान के अत-तीरी गाँव में घेर लिया था।
लेबनान के सूचना मंत्री पॉल मरक़ुस ने बताया कि वे संयुक्त राष्ट्र की UNIFIL सेनाओं और लेबनानी सेना के साथ मिलकर इस मामले पर नज़र रखे हुए हैं।
उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ इस सियोनी कार्रवाई की निंदा की और इज़राइली शासन को उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया।
अखबार अल-अखबार ने भी रिपोर्ट दी कि इज़राइली सेना ने खलील और ज़ैनब फ़र्राज लेबनानी पत्रकारों को अत-तीरी गाँव में घेर लिया है और रेड क्रॉस तथा लेबनानी सेना को उन तक पहुँचने से रोक रही है।
पत्रकारों और नागरिकों के अत-तीरी गाँव में मौजूद होने के दौरान ही सियोनी शासन ने इस क्षेत्र पर हवाई हमला किया था।
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिण लेबनान में पत्रकारों की शहादत पर प्रतिक्रिया देते हुए इज़राइली सेना के मीडिया कर्मियों पर हमलों को आकस्मिक घटनाओं से परे और एक 'व्यवस्थित दृष्टिकोण' बताया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण लेबनान में पत्रकारों का उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करते हुए निशाना बनाया जाना अब कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह एक 'स्थापित दृष्टिकोण' बन गया है।
सलाम ने कहा कि जिस प्रकार सभी अंतरराष्ट्रीय कानून और परंपराएँ इन कार्यों की निंदा और विरोध करती हैं, हम भी उनकी निंदा और विरोध करते हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निशाना बनाना और राहत टीमों की पहुँच को रोकना 'युद्ध अपराध' का स्पष्ट उदाहरण है।
लेबनान के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों और संबंधित प्राधिकरणों में इन अपराधों की पैरवी करने के लिए किसी भी प्रयास में कमी नहीं करेगी।
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