रविवार 26 अप्रैल 2026 - 19:15
दिल्ली में जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण के लिए भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन; वक्ताओं का सऊदी शासकों से आग्रह: पवित्र कब्रिस्तान की खोई हुई महानता और महत्ता को बहाल करें

जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण और पवित्र इस्लामी धरोहर की बहाली की मांग को लेकर दिल्ली में अल-बक़ीअ ऑर्गनाइज़ेशन और सूफी इस्लामिक मिशन के तत्वावधान में एक भव्य अंतर-धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं के विद्वानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं तथा फ़िदायान-ए-रसूल (स) की बड़ी संख्या ने भाग लिया। वक्ताओं ने सऊदी अधिकारियों से जोरदार मांग की कि मदीना मुनव्वरा के ऐतिहासिक कब्रिस्तान जन्नत-उल-बक़ी की खोई हुई महानता को बहाल करते हुए उसका तत्काल पुनर्निर्माण किया जाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली / जन्नत-उल-बक़ी के पुनर्निर्माण, पवित्र इस्लामी धरोहर की बहाली और अहल-ए-बैत (अ) तथा सहाबा-ए-रसूल (स) की मज़ारों की खोई हुई महानता को बहाल करने की मांग को लेकर भारत की राजधानी दिल्ली में अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन, सूफी इस्लामिक बोर्ड और सूफी इस्लामिक मिशन के तत्वावधान में एक भव्य अंतर-धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न विचारधाराओं के विद्वानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं, धार्मिक हस्तियों तथा फ़िदायान-ए-रसूल (स) की बड़ी संख्या ने भाग लिया। सम्मेलन में सऊदी अधिकारियों से जोरदार मांग की गई कि मदीना मुनव्वरा के ऐतिहासिक और पवित्र कब्रिस्तान जन्नत-उल-बक़ी का तत्काल पुनर्निर्माण करके उसकी ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और इस्लामी हैसियत को बहाल किया जाए।

दिल्ली में जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण के लिए भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन; वक्ताओं का सऊदी शासकों से आग्रह: पवित्र कब्रिस्तान की खोई हुई महानता और महत्ता को बहाल करें

सम्मेलन आयवान-ए-ग़ालिब, नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जहाँ जन्नत-उल-बक़ी में दफ़न अहल-ए-बैत (अ), सहाबा-ए-किराम, ताबेईन, अंबिया-ए-किराम और अन्य धर्म-बुजुर्गों की महानता और गरिमा को उजागर करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह मसला किसी एक मज़हब या फिरके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के साझा धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर का मसला है।

गौरतलब है कि जन्नत-उल-बक़ी मदीना मुनव्वरा का अत्यंत पवित्र कब्रिस्तान है, जहाँ दूख़्तर-ए-रसूल (स) हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.), इमाम-ए-अतहार (अ), हज़ारों सहाबा-ए-किराम और ताबेईन दफ़न हैं। नबी-ए-करीम (स) का इस स्थान से विशेष लगाव और यहाँ दफ़न व्यक्तियों के लिए उनकी दुआ-ए-मग़फ़िरत इसकी महानता को और अधिक उजागर करती है।

सम्मेलन की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जबकि ज़ैशान आज़मी ने निज़ामत (संचालन) के कर्तव्यों का पालन किया, जबकि इस भव्य सम्मेलन को सफल बनाने में सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार जनाब सलमान अब्बास रज़वी ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की और अथक मेहनत की।

मौलाना कल्ब जवाद: यह पूरी उम्मत की साझा आध्यात्मिक पूंजी है

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना सैयद कल्ब जवाद नकवी ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी किसी एक धर्म, मज़हब या फिरके की विरासत नहीं है, बल्कि पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा की साझा आध्यात्मिक पूंजी है। उन्होंने कहा कि यहाँ दूख़्तर-ए-रसूल (स) हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स), इमाम-ए-अतहार (अ), अंबिया और असहाब-ए-किराम दफ़न हैं, इसलिए यह सऊदी शासकों पर अनिवार्य है कि वे इस पवित्र कब्रिस्तान का पुनर्निर्माण करके इसकी खोई हुई महानता और ऐतिहासिक महत्ता को बहाल करें।

दिल्ली में जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण के लिए भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन; वक्ताओं का सऊदी शासकों से आग्रह: पवित्र कब्रिस्तान की खोई हुई महानता और महत्ता को बहाल करें

सैयद फ़ज़ल मोईन चिश्ती: यह विश्व आध्यात्मिक धरोहर का मसला है

अजमेर शरीफ के ख़ुद्दाम (सेवकों) के प्रतिनिधि सैयद फ़ज़ल मोईन चिश्ती ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी का पुनर्निर्माण केवल एक धार्मिक मांग नहीं है, बल्कि इस्लामी सभ्यता, आध्यात्मिक धरोहर और पवित्र ऐतिहासिक निशानियों के संरक्षण की विश्वव्यापी पुकार है। उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ सदैव सच्चाई, प्रेम और एकता की आवाज़ का केंद्र रहा है, और आज दिल्ली से यही आवाज़ पूरी दुनिया तक पहुँच रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पवित्र मज़ारों की बहाली पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के एकता की निशानी बन सकती है।

मौलाना महबूब आबिदी: विश्व मंचों पर मसला उठाया जाना चाहिए

अमेरिका में रहने वाले प्रतिष्ठित धर्म विद्वान मौलाना सैयद महबूब महदी आबिदी ने विशेष रूप से भाग लेते हुए कहा कि जन्नत-उल-बक़ी अहल-ए-बैत (अ.स.) और इस्लामी इतिहास से मुहब्बत रखने वाले हर मुसलमान के दिल की धड़कन है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर, विशेष रूप से पश्चिमी देशों में रहने वाले मुसलमान भी इस पवित्र स्थान के पुनर्निर्माण के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं और इस मसले को विश्व मंचों पर और मजबूत ढंग से उठाया जाना चाहिए।

मौलाना सैयद असलम रज़वी: यह हर मुसलमान के ईमान का मसला है

शिया उलेमा बोर्ड महाराष्ट्र के प्रमुख मौलाना सैयद असलम रज़वी ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी का पुनर्निर्माण उम्मत-ए-मुस्लिमा की धार्मिक भावनाओं, ऐतिहासिक चेतना और रसूल-ए-अकरम (स.अ.) से मुहब्बत की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक विचारधारा का मसला नहीं है, बल्कि हर उस मुसलमान का मसला है जो अहल-ए-बैत (अ.स.) और सहाबा-ए-किराम से मुहब्बत रखता है।

दिल्ली में जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण के लिए भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन; वक्ताओं का सऊदी शासकों से आग्रह: पवित्र कब्रिस्तान की खोई हुई महानता और महत्ता को बहाल करें

इस अवसर पर मौलाना अज़ादार हुसैन ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी की महानता का अंदाज़ा स्वयं रसूल-ए-इस्लाम (स.अ.) के व्यवहार से लगाया जाना चाहिए, क्योंकि आप (स.अ.) स्थायी रूप से वहाँ जाते थे और दफ़न व्यक्तियों के लिए दुआ करते थे।

रोज़नामा सहाफ़त के प्रधान संपादक अमान अब्बास ने कहा कि यह मामला आले-नबी (स.अ.) से संबंधित है, इसलिए सभी मुसलमानों को मसलकी भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होना चाहिए और पवित्र रौज़ों (मज़ारों) के पुनर्निर्माण के लिए आगे आना चाहिए।

दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन के सैयद अनफ़ाल निज़ामी ने कहा कि यह समय मतभेदों को भूलाकर एकता का रास्ता अपनाने का है, क्योंकि दुश्मन-ए-इस्लाम एकजुट होकर उम्मत की ज़मीन तंग करने की साजिश कर रहे हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के हाफ़िज़ मंज़ूर अली ख़ान ने कहा कि जिन व्यक्तियों से हुज़ूर-ए-अकरम (स.अ.) मुहब्बत करते थे, उनसे मुहब्बत करना भी ईमान का हिस्सा है, और हुज़ूर (स.अ.) की आल (संतान) को याद रखना हमारी धार्मिक जिम्मेदारी है।

दिल्ली में जन्नत-उल-बक़ीअ के पुनर्निर्माण के लिए भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन; वक्ताओं का सऊदी शासकों से आग्रह: पवित्र कब्रिस्तान की खोई हुई महानता और महत्ता को बहाल करें

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