सोमवार 4 मई 2026 - 18:24
ईरान के खिलाफ अमेरिका की गणना गलत थी।जॉन मीर्षाइमर

हौज़ा / अखबार: जॉन मीर्षाइमर, ईरान के साथ युद्ध को अमेरिकी विदेश नीति के इतिहास की सबसे बड़ी गलती मानते हैं। ईरान की इराक और लीबिया से संरचनात्मक भिन्नता, उसकी निवारण रणनीति और तेहरान का दीर्घकालिक दृष्टिकोण, वाशिंगटन के साथ टकराव को एक ऐसा रणनीतिक जाल बना रहा है, जो अमेरिकी की हार का कारण बन सकता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,अखबार: जॉन मीर्षाइमर, ईरान के साथ युद्ध को अमेरिकी विदेश नीति के इतिहास की सबसे बड़ी गलती मानते हैं। ईरान की इराक और लीबिया से संरचनात्मक भिन्नता, उसकी निवारण रणनीति और तेहरान का दीर्घकालिक दृष्टिकोण, वाशिंगटन के साथ टकराव को एक ऐसा रणनीतिक जाल बना रहा है, जो अमेरिकी की हार का कारण बन सकता है।

जब जॉन मीर्षाइमर जैसा व्यक्तित्व जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यथार्थवादी स्कूल के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतकारों में से एक है कहता है कि ईरान के साथ युद्ध अमेरिकी विदेश नीति के इतिहास की सबसे बड़ी गलती हो सकती है, तो इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए। मीर्षाइमर उन विश्लेषकों में से नहीं है जो भावना या मीडिया के माहौल के आधार पर बोलते हैं; वह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में शक्ति और संतुलन के तर्क से विश्लेषण करते हैं। इसी दृष्टिकोण से वे कहते हैं कि वाशिंगटन एक गलत और भारी कीमत वाले रास्ते पर जा रहा है।

वास्तविकता यह है कि ईरान के सामने अमेरिका की मुख्य समस्या एक बड़ी गणना की भूल है। वाशिंगटन में लंबे समय से यह धारणा थी कि जो मॉडल इराक, लीबिया या कुछ अन्य देशों में काम कर गया, वह ईरान के मामले में भी काम करेगा; यानी आर्थिक दबाव, सैन्य धमकी और मनोवैज्ञानिक अभियानों का संयोजन, जिससे किसी देश की राजनीतिक इच्छाशक्ति तोड़ी जा सके।

लेकिन ईरान मूल रूप से एक अलग समीकरण है। यह देश रक्षात्मक क्षमताओं और राजनीतिक-सामाजिक संरचना दोनों के मामले में उन उदाहरणों से तुलनीय नहीं है।

इस्लामी गणतंत्र ने पिछले कुछ दशकों में एक स्पष्ट रणनीति पर काम किया है: निवारण की क्षमता बढ़ाना और क्षेत्र में रणनीतिक गहराई का विस्तार करना। इस रणनीति का परिणाम यह हुआ है कि ईरान के साथ कोई भी संघर्ष अब एक साधारण और सीमित युद्ध नहीं रहेगा; बल्कि यह जल्दी से एक व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है, जिसकी कीमत अमेरिका के लिए बहुत भारी होगी। यही वास्तविकता कई पश्चिमी रणनीतिकारों को इस निष्कर्ष पर पहुँचाती है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प समाधान होने के बजाय एक रणनीतिक जाल है।

दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण अंतर समय को देखने के नज़रिए में है। अमेरिका में नीति चुनावों और आंतरिक प्रतिस्पर्धाओं से बहुत प्रभावित होती है; यानी निर्णय अक्सर कम अवधि के दृष्टिकोण से लिए जाते हैं। जबकि ईरान में रणनीतिक दृष्टिकोण अधिक दीर्घकालिक (Long-term) है। यही अंतर एक attrition war में उस पक्ष को हाथ देता है, जिसके पास अधिक धैर्य और क्षमता है।

कुल मिलाकर, मीर्षाइमर की चेतावनी वास्तव में पश्चिमी विचारधारा के अंदर से एक स्वीकारोक्ति है: ईरान पर दबाव और टकराव न केवल अमेरिका के लक्ष्यों को पूरा करता है, बल्कि वाशिंगटन के लिए एक बड़ी रणनीतिक हार में बदल सकता है; एक ऐसी हार जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी शक्ति की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाएगी।

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