शुक्रवार 15 मई 2026 - 08:37
जनता की सड़को पर उपस्थिति, परमाणु बम से भी अधिक प्रभावशाली है

क़ुम शहर की इस्लामी शूरा परिषद के प्रतिनिधि ने पिछले कुछ हफ्तों के दौरान सामाजिक परिदृश्यों में लोगों की निरंतर उपस्थिति का उल्लेख करते हुए इसे समकालीन इतिहास में एक दुर्लभ घटना बताया और जोर देकर कहा: देश और अपने आदर्शों के समर्थन के लिए लोगों का स्वैच्छिक रूप से सड़कों पर उपस्थित होना, ऐसी घटना है जिसका उदाहरण न केवल इस्लामी क्रांति के इतिहास में, बल्कि ईरान और यहां तक कि दुनिया के इतिहास में भी कम ही मिलता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के संवाददाता के अनुसार, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन क़ासिम रवानबख्श ने आज रात 'उम्मते मब'ऊस' हौज़ा ए इल्मिया के मीडिया और साइबरस्पेस केंद्र से संबद्ध सेवा शिविर में बयान देते हुए कहा: कि एक राष्ट्र लगातार 75 रातों तक स्वैच्छिक रूप से, हाथों में झंडे लिए सड़कों पर उपस्थित रहे, अपने सिस्टम, देश और अपने नेता का समर्थन करे और अपने आदर्शों पर जान तक न्योछावर कर दे, यह इस्लाम, ईरान और यहां तक कि दुनिया के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है।

विश्व के नेता भी हुए हैरान

हुज्जतुल इस्लाम रवानबख्श ने दावा किया कि ईरान में पिछले 75 दिनों से चल रही जन समर्थन की लहर ने दुनिया के ताकतवर देशों को भी चकित कर दिया है। उन्होंने कहा: "दुनिया के एक बड़े देश के प्रमुख ने माना है कि ईरान की जनता की उपस्थिति ने उन्हें हैरान कर दिया है। आमतौर पर परमाणु महाशक्ति के हमले के बाद लोग मैदान छोड़ देते हैं, लेकिन यहाँ लोग सड़कों पर उतर आए और प्रवासी ईरानी वापस लौट आए।"

उन्होने इस विदेशी नेता के हवाले से उन्होंने तीन मुख्य बातें गिनाईं:

  1. लोगों की उपस्थिति: दुश्मन के हमले के बाद भी जनता का सड़कों पर स्वतः उतरना।

  2. सशस्त्र बलों का साहस: वरिष्ठ कमांडरों के शहीद होने के बावजूद सेना का और अधिक मजबूती से काम करना।

  3. सरकार की एकता: ऐसे संकट में भी किसी अधिकारी का इस्तीफा न देना और पूरी सरकार का एकजुट रहना।

'31 करोड़ से ज्यादा लोग मौत को तैयार'

रवानबख्श ने 'जानफिदा' अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि 31 करोड़ से अधिक ईरानियों ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने का पंजीकरण कराया है। और घोषणा की है कि वे देश की रक्षा के लिए अपना जीवन कुर्बान करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा सिर्फ इंटरनेट का उपयोग करने वालों का है, ऐसे कई अन्य लोग भी हैं जिनके पास यह सुविधा नहीं है या बच्चे और किशोर हैं जो पंजीकरण नहीं करा सकते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा: जब 31 मिलियन से अधिक लोग देश की रक्षा के लिए तैयारी जताते हैं, तो सवाल उठता है कि दुनिया के किस हिस्से में ऐसे लोग रहते हैं।

आलोचकों पर पलटवार

अपने भाषण में उन्होंने उन समूहों पर भी निशाना साधा जो इस जनसमर्थन को कमतर आंक रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जिनकी निगाहें पश्चिम और अमेरिका पर टिकी हैं, वे इन स्वैच्छिक लोगों को 'रेंट-लूटने वाला तबका' कह रहे हैं। रवानबख्श ने कहा:

"यह अजीब है कि उनके खातों में अमेरिकी डॉलर डाले जा रहे हैं और अमेरिका सीधे उन्हें हथियार दे रहा है, फिर भी वे उन लोगों पर झूठे आरोप लगाते हैं जो अपनी जान और माल से देश की खिदमत कर रहे हैं।"

सहनशीलता ही जीत की कुंजी

ईरान को वर्तमान में युद्ध की स्थिति में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस जंग में सहनशीलता ही तय करेगी कि कौन जीतेगा। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र कभी समर्पण नहीं करेगा और प्रतिरोध की कीमत समझौते की कीमत से कहीं कम है।

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