यह ऐतिहासिक वीडियो हिजरी शम्सी सन 1380 (लगभग 25 वर्ष पूर्व) के समय का है, जब क़ुम में हज़रत मासूमा (स) के पवित्र रौज़े की ज़रीह मुबारक स्थापित की जा रही थी। उस समय रब्बानी आरिफ़, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा बहजत की उपस्थिति ने उस पल को नूरानियत और आध्यात्मिकता से भर दिया। वीडियो में श्रद्धा, आध्यात्मिकता और अहल-ए-बैत (अ) से प्रेम के हृदय को भाने वाले दृश्य देखे जा सकते हैं। ये आध्यात्मिक पल आज भी अहल-ए-दिल के लिए यादगार बने हुए हैं।
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