आयतुल्लाह बहजत (10)
-
म्यांमार के सुन्नी विद्वान:
धार्मिकविद्वानों के वाक़ेआत | इमाम हुसैन (अ) की मजलिस मे आने वाले अज़ादारो का सम्मान
आयतुल्लाह बहजत (र) इमाम हुसैन (अ) की मजलिसों में स्वयं कई काम किया करते थे। वे दरवाज़े के पास खड़े होकर आने वाले अज़ादारो का सम्मान करते थे, मेहमाननवाज़ी और स्वागत की व्यवस्था की निगरानी करते…
-
गैलरीवीडियो / मरहूम आयतुल्लाहिल उज़्मा बहजत की बरसी के अवसर पर एक ऐतिहासिक वीडियो क्लिप जारी
यह ऐतिहासिक वीडियो हिजरी शम्सी सन 1380 (लगभग 25 वर्ष पूर्व) के समय का है, जब क़ुम में हज़रत मासूमा (स) के पवित्र रौज़े की ज़रीह मुबारक स्थापित की जा रही थी। उस समय रब्बानी आरिफ़, हज़रत आयतुल्लाहिल…
-
उलेमा और मराजा ए इकरामइमाम ज़माना (अ) की निगाह में पसंदीदा अमल
एक बुज़ुर्ग को शरफ़-ए-मुलाकात हासिल हुआ, मगर वह जान न सके कि सामने कौन है। इमाम ज़माना (अ) ने खुद उन्हें बताया कि मेरी निगाह में सबसे ज़्यादा पसंदीदा अमल यह है कि अज़ान की पहली आवाज़ पर "अल्लाहुम्मा…
-
उलेमा और मराजा ए इकरामआप रोज़े से हैं या नहीं??? एक ऐसा सवाल जो हराम हो सकता है
हौज़ा / मरहूम आयतुल्लाह मुजतहिदी तेहरानी ने अपनी एक तक़रीर में बे-जा सवालात और उनके गुनाह-आलूद नताइज की तरफ़ तवज्जोह दिलाते हुए फ़रमाया कि इंसान को ऐसी बातें और सवालात छोड़ देने चाहिए जो उसके…
-
उलेमा और मराजा ए इकरामराहे सआदत, तज़्किया नफ़्स से होकर गुज़रती है
हौज़ा /आयतुल्लाह बहजत ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया है कि पवित्र कुरान में, मुक्ति और सफलता तज़्किया नफ़्स से जुड़ी है, न कि सिर्फ़ इज्तिहाद या एकेडमिक डिग्री से।
-
उलेमा और मराजा ए इकरामआयतुल्लाह बहजत की ज़बानी, महबूब ए ख़ुदा बनने का आसान तरीका
हौज़ा / इंसान स्वभाविक रूप से अपने आप से और अल्लाह से प्यार करता है और जीवन का मकसद इसी इलाही प्यार को ज़ाहिर करना है। जो शख़्स अपनी ज़िंदगी में अल्लाह से दोस्ती बढ़ाना चाहता है, वह दरअसल कमाल…
-
आयतुल्लाह बहजत:
ईरानदुआ का प्रभाव कभी-कभी देर से अवश्य हो सकता है, लेकिन दुआ कभी भी बेअसर नहीं होती
हौज़ा / दुआ ईमान वाले इंसान का सबसे प्रभावी और श्रेष्ठतम साधन है, और यदि इसका प्रभाव तुरंत दिखाई न भी दे, तो उचित समय पर अवश्य प्रकट होता है। दुआ का प्रभाव कभी खत्म नहीं होता, बस कभी-कभी देर…
-
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा बहजत कुद्दसा सिर्रोह:
धार्मिकअहले-बैत (अ) के प्रति प्रेम सभी सिद्धियों और सफलताओं का आधार और मूल है
हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा बहजत कुद्दसा-सिर्रोह अहले-बैत (अ) के प्रति प्रेम को सभी सिद्धियों और सफलताओं का आधार और मूल मानते थे और इस बात पर ज़ोर देते थे कि इस अमूल्य निधि को कभी नज़रअंदाज़…
-
उलेमा और मराजा ए इकरामअव्वले वक़्त नमाज़ पढ़ो, गरीबी दूर होगी: आयतुल्लाह बहजत
हौज़ा/ आयतुल्लाह बहजत (र) ने आयतुल्लाह सय्यद अब्दुल हादी शिराज़ी के एक ख़्वाब का ज़िक्र किया, जिसमें मृतक के पिता ने उन्हें सलाह दी कि वे अपने परिवार को अव्वले वक़्त नमाज़ पढ़ने के लिए प्रेरित…
-
आयतुल्लाह बहजत की नसीहत:
धार्मिकजब मजलिस ए अज़ा में आँसू न आएँ तो क्या करें?
हौज़ा / आयतुल्लाह बहजत नसीहत करते हैं कि अहले बैत अ.स. की मजालिस में उनके फ़ज़ाइल और मनाकिब बयान करने के साथ-साथ, अगर आँखों से आँसू न भी आएँ तो चेहरे पर रोने की हालत पैदा करें, दिल में ग़म पैदा…