हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू कश्मीर के प्रमुख धार्मिक विद्वान हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद ज़ाकिर हुसैन जाफ़री ने नई दिल्ली में तैनात ईरानी राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहअली से मुलाकात में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इसराइल की जारी आक्रामक, ज़ालिमाना और कायराना जंग की कड़े शब्दों में निंदा की और वली-ए-अम्र-ए-मुस्लिमीन हज़रत इमाम खामनेई की दर्दनाक और ग़मनाक शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि हज़रत इमाम खामनेई की मज़लूमाना और ग़मनाक शहादत ने दुनिया भर के आज़ादी-पसंद मुस्लिम और गैर-मुस्लिम हलकों को बेदार और नज़दीक कर दिया है।

उन्होंने कहा कि शहीद इमाम खामनेई की मज़लूमाना शहादत के परिणामस्वरूप दुनिया भर के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम हलकों में जागरूकता की एक बड़ी लहर पैदा हो गई है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर अमेरिका को ऐतिहासिक हार और नाकामी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के सहयोगी देश भी अमेरिका का साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं। ईरान ने अमेरिका के घृणित और नापाक चेहरे को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।
हुज्जतुल-इस्लाम सय्यद ज़ाकिर हुसैन जाफ़री ने कहा कि ईरान ने अमेरिका और इसराइल की आक्रामकता का करारा जवाब देकर उन्हें अपने लक्ष्यों तक पहुँचने में बुरी तरह नाकाम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि शहीद इमाम खामनेई की मज़लूमाना शहादत के बाद दुनिया को सच्चे इस्लाम और इस्लाम-ए-नाब-ए-मुहम्मदी को पहचानने में बड़ी मदद मिली है। जो लोग कल तक शियावत (शियावाद) और शिया मुसलमानों के खिलाफ गलत और गुमराह करने वाला प्रचार कर रहे थे, वे आज शियावत की हक़ीक़त और असलियत का इक़रार कर रहे हैं। क्योंकि सच्चा इस्लाम कल भी कर्बला वालों के हाथ में था और आज भी कर्बला वालों के हाथ में है।
इस मुलाकात में ईरानी राजदूत ने भारतीय जनता के विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक हलकों की ओर से सहानुभूति प्रकट करने और संदेशों के लिए धन्यवाद अदा करते हुए कहा कि ईरान और भारत के संबंध मैत्रीपूर्ण और ऐतिहासिक हैं और दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थिर संबंधों की कड़ी जारी और सलामत रहेगी।

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