हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार: निम्नलिखित रिवायत तोहफ़ उल उक़ूल किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال امیرالمؤمنین عليه السلام:
اَلْعامِلُ بِالظُّلْمِ وَ الْمُعینُ عَلَیْهِ وَ الرّاضِیُ بِهِ شُرَکاءُ ثَلاثَهٌ
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया:
"ज़ुल्म करने वाला, ज़ुल्म में मदद करने वाला और ज़ुल्म पर राज़ी होने वाला — ये तीनों (ज़ुल्म के गुनाह में) साझीदार हैं।"
तोहफ़ उल उक़ूल, भाग 1, पेज 216
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