दिन कि हदीस (191)
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धार्मिकदिन की हदीस | हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) की फ़ज़ीलत
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ने एक हदीस में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) के बुलंद मक़ाम का उल्लेख किया है।
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उलेमा और मराजा ए इकरामहज़रत ज़ैनब (स) ने इब्ने ज़ियाद के दरबार में सिद्धांत-ए-जबर को चुनौती दी, उनका मौक़िफ़ ऐतिहासिक था: आयतुल्लाह जवादी आमोली
आयतुल्लाहिल उज़मा जवाद आमुली ने कहा कि उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद के दरबार में सिद्धांत-ए-जबर के खिलाफ हज़रत ज़ैनब कुबरा (स.) का मौक़िफ़ ऐतिहासिक था। आपने “मा रअयतु इल्ला जमीला” यानी “मैंने सुंदरता…
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धार्मिकदिन की हदीस | बीमार की सेवा करने का सवाब
पैगंबर-ए-अकरम (स) ने एक रिवायत में दूसरों की मदद और सेवा करने की अहमियत बयान की है।
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धार्मिकदिन की हदीस | तोहमत लगाना सबसे बुरा नैतिक आचरण
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में तोहमत लगाने को सबसे बुरे नैतिक व्यवहारों में से एक बताया है।
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धार्मिकदिन की हदीस| सदक़ा: अल्लाह के साथ व्यापार
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में सदक़ा देने को तंगहाली दूर करने और आर्थिक कठिनाइयों से राहत पाने का माध्यम बताया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | दूसरों से पहले अपना सुधार करें
अमीरुल मोमिनीन हजरत अली (अ) ने एक हदीस में दूसरों के सुधार की कोशिश करने से पहले स्वयं को सुधारने पर जोर दिया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | ईर्ष्यालु व्यक्ति को कभी दिल का सुकून नहीं मिलता
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक हदीस में ईर्ष्या को दिल का सुकून छिन जाने का कारण बताया है।
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अम्बा चौक भावनगर गुजरात, ख़ोजा जामा मस्जिद में ख़ुत्बा-ए-जुमाः
भारतअल्लाह पर ईमान और उसके बंदों को फ़ायदा पहुँचाना सबसे बड़ी नेकी हैः हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद तहक़ीक़ हुसैन
भावनगर के इमामे जुमा ने ख़ुत्बा-ए-जुमा में तक़वा-ए-इलाही अपनाने, इबादत व इताअत और क़ुरआन मजीद की शिक्षाओं पर अमल करने की नसीहत करते हुए कहा कि इस्लाम का उद्देश्य केवल व्यक्ति को नेक बनाना नहीं,…
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धार्मिकदिन की हदीस | जुमा के दिन नेक कामों का दोगुना सवाब
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक हदीस में जुमा के दिन अधिक से अधिक इबादत और नेक काम करने पर ज़ोर दिया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | ईमान की निशानी
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में ईमान की एक निशानी का उल्लेख किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | तौबा किए हुए गुनाह पर लताड़ने का परिणाम
पैग़म्बर ए इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में उस व्यक्ति को लताड़ने से मना किया है, जिसने अपने गुनाह से तौबा कर ली हो।
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धार्मिकआसान शादी, आज के युवाओं की जरूरत और शहीद रहबर की सोच
जब निकाह मुश्किल हो जाए और उसमें सादगी खत्म हो जाए तो परिवार भी अपनी वास्तविक आत्मा खो देता है। जब गुनाह आसान और हलाल रास्ता मुश्किल दिखाई देने लगे तो युवा लड़के-लड़कियां गुनाह की राह पर चल पड़ते…
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धार्मिकदिन की हदीस | तकलीफ़ों के बदले मोमिन का इनाम
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में तकलीफ़, बीमारी, दुख और चिंता के सामने मोमिन को मिलने वाले इनाम का उल्लेख किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | जुमा के दिन सलवात की फज़ीलत
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके अहलेबैत (अ) पर जुमा के दिन सलवात भेजने की फज़ीलत पर ज़ोर दिया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | स्वास्थ्य और अधिक भोजन
इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में अधिक भोजन और अच्छे स्वास्थ्य के बीच असंगति की ओर संकेत किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस । बंदो की तौबा से अल्लाह की खुशी
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में बंदों की तौबा से अल्लाह की खुशी और प्रसन्नता का उल्लेख किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | क्रोध पर काबू रखना
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में क्रोध को पी जाने की विशेषता और उसके अच्छे परिणामों का उल्लेख किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | सलाम करने में पहल करने की फज़ीलत
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.) ने एक रिवायत में सलाम करने में पहल करने की फज़ीलत और अल्लाह तथा उसके रसूल के निकट उसके स्थान का उल्लेख किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | बुराई के प्रति जिम्मेदारी
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में बुराई के प्रति इंसान की जिम्मेदारी और उसे दिल, हाथ और ज़बान से रोकने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
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धार्मिकआज की हदीस । ज़ुहूर के लिए इंतेज़ार
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में इमाम-ए-ज़माना (अ) के ज़ुहूर का हमेशा इंतज़ार करने पर जोर दिया है।
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धार्मिकदिन की हदीस । कंजूसी और दिल की कठोरता
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक रिवायत में कंजूस लोगों को देखने और उनके साथ उठने-बैठने के मनुष्य के दिल और आत्मा पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर इशारा किया है।
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धार्मिकदिन की हदीस | बच्चों को धार्मिक शिक्षा देना
इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम ने एक रिवायत में बच्चों को “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” सिखाने की फ़ज़ीलत और बच्चे, शिक्षक तथा माता-पिता के लिए इसके सवाब का उल्लेख किया है।
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धार्मिकलोगो के बीच लोकप्रियता
इमाम हसन असकरी (अ) ने एक हदीस में इंसान के लोगों के बीच लोकप्रिय होने के एक कारण की ओर संकेत किया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकपरिवार के साथ अच्छा व्यवहार
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में परिवार के साथ अच्छे व्यवहार के इंसान की उम्र पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर इशारा किया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकएक-दूसरे के लिए मग़फ़ेरत की दुआ करना
इमाम-ए-जमाना (अ) ने एक रिवायत में मोमिनों के एक-दूसरे के लिए मग़फ़ेरत की दुआ करने के महत्व और खास शियो की एक निशानी का उल्लेख किया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकमोमिनों के बीच मोहब्बत और मेल-मिलाप
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक हदीस में मोमिनों के बीच प्रेम, आपसी लगाव और भाईचारा पैदा करने के महत्व की ओर संकेत किया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकशुक्रगुज़ारी की निशानी
इमाम मूसा काज़िम (अ.) ने एक रिवायत में अल्लाह की नेमतों का वर्णन करने को शुक्रगुज़ारी की निशानी बताया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकमृत्यु के बाद भी बाकी रहने वाली तीन चीजें
पैग़म्बर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ने एक हदीस में ऐसे तीन नेक कार्यों का उल्लेख किया है, जिनका लाभ इंसान की मृत्यु के बाद भी जारी रहता है।
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धार्मिकइल्म के बग़ैर अमल
इमाम जाफर सादिक (अ) ने एक रिवायत में इल्म पर अमल करने की जरूरत और आलिम तथा जाहिलो के बीच इल्म के प्रति उनके रवैये के अंतर पर जोर दिया है।
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दिन की हदीसः
धार्मिकशुक्रवार के दिन सवाब और अज़ाब का कई गुना बढ़ जाना
इमाम बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में शुक्रवार के दिन की अहमियत और इस दिन अच्छे और बुरे कर्मों के प्रभाव के कई गुना बढ़ जाने की ओर इशारा किया है।