गुरुवार 18 जून 2026 - 18:03
नमाज़ में ख़ाक ए शफ़ा पर सजदा करने का रहस्य; आयतुल्लाह अल-उज़्मा वहीद खुरासानी का बयान

मरजए तकलीद आयतुल्लाहिल उज़्मा वहीद खुरासानी ने अहले-बैत (अ) की रिवायतों की रोशनी में हज़रत इमाम हुसैन (अ) की पवित्र मिट्टी पर सजदे की फ़ज़ीलत और उसके आध्यात्मिक रहस्यों को बयान किया है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र मिट्टी पर सजदा न केवल ज़मीन की सातों परतों को नूरानी बनाता है, बल्कि बंदे और उसके पालनहार के बीच मौजूद सात परदों को भी हटाने की क्षमता रखता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह वहीद खुरासानी ने अहले-बैत (अ) से वर्णित हदीसों का हवाला देते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ) की मिट्टी पर सजदा नमाज़ में अल्लाह के क़रीब होने का एक अनोखा और श्रेष्ठ माध्यम है।

उन्होंने शेख़ सदूक़ की पुस्तक “मन ला यहज़ुरहु अल-फ़कीह” में वर्णित इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की रिवायत का उल्लेख किया:

“इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र की मिट्टी पर सजदा करना सातों ज़मीनों को रोशन कर देता है।”

आयतुल्लाह वहीद खुरासानी ने इस रिवायत की महानता की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह एक आश्चर्यजनक वास्तविकता है कि कर्बला की यह पवित्र मिट्टी पर किया गया सजदा पूरी धरती की सात परतों तक रोशनी और नूर पहुँचाता है।

उन्होंने एक और रिवायत का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम (अ) हमेशा एक पीले रेशमी थैले में इमाम हुसैन (अ) की मिट्टी अपने साथ रखते थे। जब नमाज़ का समय आता, तो वे उसी पवित्र मिट्टी पर सजदा करते थे।

आयतुल्लाह वहीद खुरासानी के अनुसार, इमाम (अ) ने इस कार्य की वजह बताते हुए फ़रमाया:

“इमाम हुसैन (अ) की मिट्टी पर सजदा सात परदों को चीर देता है।”

मरजए तकलीद ने कहा कि इन रिवायतों से यह स्पष्ट होता है कि कर्बला की मिट्टी पर सजदा करना इंसान की रूहानी तरक़्क़ी, अल्लाह के क़रीब होने और दुआ व इबादत की क़बूलियत के लिए असाधारण प्रभाव रखता है। इसी कारण अहले-बैत (अ) ने इस अमल पर विशेष ज़ोर दिया है।

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