सोमवार 22 जून 2026 - 14:17
लोगों का हक़ीक़ी चेहरा कठिनाइयों और परीक्षाओं का सामना करते समय ज़ाहिर होता है

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन तवक्कुल ने कहा कि गुनाह मानव आत्मा पर धीरे-धीरे लेकिन अत्यंत गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि गुनाह प्रारंभ में हृदय पर केवल एक काला धब्बा उत्पन्न करता है, लेकिन यदि तौबा और अल्लाह की ओर लौटकर उसे साफ न किया जाए, तो यह अंधकार पूरे हृदय को अपने घेरे में ले लेता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद रहीम तवक्कुल ने क़ुम में आयोजित मुहर्रमुल हराम की छठी मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए अमीरुल मोमेनीन इमाम अली इब्न अबी तालिब की इस नूरानी हदीस, “परिस्थितियों के बदलने से लोगों के वास्तविक गुण और व्यक्तित्व पहचाने जाते हैं”, की व्याख्या की।

उन्होंने कहा कि समय के परिवर्तन तथा जीवन के उतार-चढ़ाव ऐसे मैदान हैं जिनमें मनुष्यों की वास्तविकता और उनके अस्तित्व का सार पहचाना जाता है। कठिनाइयों और परीक्षाओं का सामना करते समय ही लोगों का असली चेहरा सामने आता है।

उन्होंने सूर ए आले-इमरान की आयत 142, “क्या तुम यह समझते हो कि तुम जन्नत में प्रवेश कर जाओगे जबकि अभी तक अल्लाह ने यह स्पष्ट नहीं किया कि तुममें से कौन संघर्ष करता है और कौन धैर्य रखने वाला है”, का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह मोमिनों को सचेत करता है कि केवल ईमान का दावा कर लेने से जन्नत प्राप्त नहीं होती, बल्कि संघर्ष, धैर्य और ईश्वरीय परीक्षाओं में सफलता ही सच्चे ईमान की कसौटी है।

हौज़ा इल्मिया के शिक्षक ने सूर ए मुनाफ़ेक़ून की तीसरी आयत का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्लाह मुनाफ़िक़ों के बारे में फ़रमाता है: “वे पहले ईमान लाए, फिर उन्होंने कुफ़्र का मार्ग अपना लिया; परिणामस्वरूप उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई, इसलिए वे समझने की क्षमता से वंचित हो गए।”

उन्होंने आगे कहा कि जब मनुष्य का हृदय भटकाव और गुनाहों के कारण मुहरबंद हो जाता है, तो सत्य की बातें भी उस पर प्रभाव नहीं डालतीं। यही कारण था कि इमाम हुसैन इब्न अली के उपदेश, कथन और नसीहतें भी कूफ़ा के लोगों के दिलों में प्रवेश न कर सकीं।

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