सोमवार 13 जुलाई 2026 - 19:57
हम होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन में अमेरिकी हस्तक्षेप को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।खातमुल अम्बिया मुख्यालय

हौज़ा / खातमुल अम्बिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी क्षेत्रीय देश का सैन्य सहयोग ईरान की संप्रभुता के खिलाफ कदम माना जाएगा, जबकि अमेरिकी कार्रवाइयों से यदि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को खतरा पहुँचा तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , खातम अल-अंबिया सेंट्रल डिफेंस मुख्यालय के प्रवक्ता ने आबनाए-हुरमुज़ में अमेरिका की लगातार दखलअंदाज़ी और उकसाने वाली गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान किसी भी स्थिति में वॉशिंगटन को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगा।

प्रवक्ता कर्नल ज़ुल्फ़िकारी ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी सेना द्वारा आबनाए-हुरमुज़ के प्रशासनिक क्षेत्र में प्रवेश की कोशिशें न केवल क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा हैं, बल्कि कुछ पड़ोसी देशों का अमेरिका के साथ सहयोग पूरे क्षेत्र में संघर्ष को और बढ़ा सकता है।

उन्होंने कहा कि ईरान पहले भी इस संबंध में चेतावनी दे चुका है और एक बार फिर स्पष्ट करता है कि अमेरिका को आबनाए-हुरमुज़ के प्रबंधन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बयान में आगे कहा गया कि यदि अमेरिकी सेना ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों से हटकर या ईरानी सशस्त्र बलों की अनुमति के बिना व्यापारिक जहाज़ों और तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा डालने अथवा असुरक्षा पैदा करने का प्रयास करता है, तो ईरानी सशस्त्र बल कड़ी कार्रवाई करेंगे। हाल के दिनों में इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और ईरानी सेना की कार्रवाइयाँ इसी नीति का व्यावहारिक उदाहरण हैं।

प्रवक्ता ने क्षेत्रीय देशों के नेताओं को भी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का सैन्य या लॉजिस्टिक सहयोग ईरान की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध कदम माना जाएगा। यदि क्षेत्र में युद्ध फैलता है, तो उसके प्रभाव सभी क्षेत्रीय देशों को प्रभावित करेंगे।

बयान के अंत में कहा गया कि क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली किसी भी अस्थिरता या सैन्य तनाव की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर होगी। साथ ही, ईरान की सशस्त्र सेनाएँ हर संभावित खतरे पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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