मंगलवार 30 जून 2026 - 06:24
ईरान की अमेरिका को चेतावनी / हुर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर फिर बढ़ा तनाव

हौज़ा / अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस बीच ईरान ने हुर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि अगले एक महीने तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरानी सेना का नियंत्रण रहेगा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इस बीच ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि अगले एक महीने तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर ईरानी सेना का नियंत्रण रहेगा और किसी भी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका के साथ हुए MoU के तहत हुर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और नियंत्रण ईरान के जिम्मे रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हाल के दिनों में हुर्मुज के आसपास एक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। इसके अलावा अमेरिका ने ईरानी ठिकानों और संपत्तियों पर कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

बढ़ते विवाद को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान इस सप्ताह कतर की राजधानी दोहा में आमने-सामने बैठ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्ष हालिया हमलों के बाद बातचीत के जरिए समाधान तलाशने पर सहमत हुए हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में हुर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय स्थिरता प्रमुख मुद्दे होंगे।

हुर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

ईरान का कहना है कि हुर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग सभी देशों के जहाजों के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या बाधा के खुला रहे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।

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