हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद सईदी ने क़ुम में शुक्रवार की नमाज़ से ख़िताब करते हुए शहीद नेता के ऐतिहासिक जनाज़े इस्लामी क्रांति के इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान और इराक़ में लाखों लोगों की असाधारण भागीदारी इस बात का सबूत है कि शहीद नेता लोगों के दिलों में असाधारण स्थान रखते थे।
उन्होंने कहा कि यह विशाल समागम इस्लामी गणराज्य की आध्यात्मिक, जनसामान्य और सभ्यतागत ताकत का प्रतीक था और इसने प्रतिरोध के मोर्चे की ताकत को दुनिया के सामने उजागर किया।
आयतुल्लाह सईदी ने सशस्त्र बलों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि दुश्मन को दिया गया प्रभावी जवाब स्पष्ट संदेश रखता है। उन्होंने क्षेत्र के मुस्लिम देशों पर जोर दिया कि वे अपनी भूमि को अमेरिका और इज़राइली शासन की आक्रामक कार्रवाइयों के लिए इस्तेमाल न होने दें।
उन्होंने वार्ता के विषय पर कहा कि ऐसे दुश्मन से बातचीत, जो इस्लामी गणराज्य के खिलाफ़ साजिशों में लगा हो, लाभदायक नहीं हो सकती और वास्तविक शांति कमज़ोरी की स्थिति से हासिल नहीं की जा सकती। उनके अनुसार जहाँ प्रतिरोध अपनाया गया, दुश्मन पीछे हटा और जहाँ पीछे हटने की नीति अपनाई गई, वह और अधिक साहसी हो गया।
क़ुम के शुक्रवार इमाम ने लेबनान के प्रतिरोध को मुस्लिम उम्मत के लिए आदर्श बताते हुए कहा कि विश्वास, धैर्य और अल्लाह पर भरोसा ही क्षेत्र के लोगों के उद्धार का मार्ग है।
उन्होंने आगे कहा कि शहीद नेता की महानता उनकी शहादत के बाद पहले से अधिक स्पष्ट हुई और जनता ने उनकी सेवाओं के वास्तविक मूल्य को बेहतर रूप से महसूस किया। आयतुल्लाह सईदी ने सर्वोच्च नेता क्रांति के निर्देशों का पालन, राष्ट्रीय एकता के संरक्षण और दुश्मन के सांस्कृतिक आक्रमण का मुकाबला विश्वास, जागरूकता और प्रभावी कदमों के माध्यम से करने पर भी जोर दिया।
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