हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के हौज़ा इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने कहा कि हौज़ा इल्मिया की जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत और इबादती मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव विज्ञान और समाज की विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में इस्लामी दृष्टिकोण प्रस्तुत करना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने नए शैक्षणिक वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए इमाम-ए-ज़माना (अ) की सेवा में सलाम पेश किया और इमाम हसन अस्करी (अ) के शुभ जन्मदिवस पर बधाई दी। उन्होंने आयतुल्लाह मिस्बाह यज़्दी (र) की शैक्षिक और वैचारिक सेवाओं को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लिए इस्लामी व्यवस्था आवश्यक
आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि हौज़ा इल्मिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लिए इस्लामी व्यवस्था और सिद्धांत प्रस्तुत करना शामिल है। हर समाज को शासन, न्यायपालिका, अर्थव्यवस्था, परिवार और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा कि इस्लामी शासन में इन सभी व्यवस्थाओं की नींव इस्लाम पर आधारित होनी चाहिए। शिया फ़िक़्ह में कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से न्याय व्यवस्था के बारे में विस्तृत चर्चा मौजूद है। हालांकि, कुरआन, सुन्नत और फ़िक़्ही सिद्धांतों के आधार पर समाज के अन्य क्षेत्रों के लिए भी इस्लामी व्यवस्था विकसित करने की क्षमता मौजूद है। हौज़ा इल्मिया को इस क्षेत्र में मौजूद कमी को पूरा करना होगा।
फ़िक़्ह को केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं करना चाहिए
ईरान के हौज़ा इल्मिया के प्रमुख ने कहा कि इमाम ख़ुमैनी (र) ने नजफ़ अशरफ़ में विलायत-ए-फ़क़ीह के सिद्धांत को स्पष्ट करके शोध का एक नया मार्ग खोला। इस्लामी क्रांति के बाद यह मार्ग सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ा, लेकिन आज भी समाज के कुछ क्षेत्रों में समस्याएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि फ़िक़्ह को केवल व्यक्तिगत और इबादती आदेशों तक सीमित नहीं किया जा सकता। हौज़ा इल्मिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह भी है कि वह मानव विज्ञान और सामाजिक व्यवस्था के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाए।
मानव विज्ञान में इस्लामी विचार प्रस्तुत करना जरूरी
आयतुल्लाह आराफी ने मानव विज्ञान को वर्तमान विश्व व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पश्चिम ने पुनर्जागरण के बाद दर्शन के आधार पर विभिन्न विज्ञानों को विकसित किया और उनका उपयोग मानव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में किया। इससे कुछ सफलताएं हासिल हुई हैं, लेकिन इन विचारों की बुनियाद में कुछ बुनियादी समस्याएं भी मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन विचारों का अध्ययन करना, उनमें सुधार करना और इस्लामी आधार पर मानव विज्ञान को आगे बढ़ाना हौज़ा इल्मिया के विद्वानों की महत्वपूर्ण और बड़ी जिम्मेदारी है।
अभी बहुत काम बाकी है
आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि पिछले चार दशकों में इमाम ख़ुमैनी, शहीद रहबर, अल्लामा तबातबाई, शहीद सद्र और अल्लामा मिस्बाह यज़्दी जैसे महान विद्वानों के विचारों से लाभ उठाते हुए मानव विज्ञान में बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। लेकिन अभी बहुत काम बाकी है और इस मार्ग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास की आवश्यकता है।
उन्होंने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के प्रतिरोध युद्धों में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह हुआ है कि अमेरिका के साथ सीधे मुकाबले का डर कम हुआ है। उनके अनुसार, इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर मौजूद शक्ति व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती पैदा की है।
दुनिया में इस्लामी विचार को मजबूत करने की जरूरत
आयतुल्लाह आराफी ने कहा कि प्रतिरोध के मार्ग में महान हस्तियों का नुकसान एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनके संघर्ष ने यह स्पष्ट किया है कि हमें वैश्विक स्तर पर वैचारिक और सैद्धांतिक क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि सैन्य और राजनीतिक क्षेत्र में बदलाव से पहले वैचारिक आधार में बदलाव जरूरी है। इस्लामी दर्शन और वास्तविक फ़िक़्ह से प्राप्त विचारों को कुरआन और सुन्नत की रोशनी में व्यवस्थित किया जाना चाहिए, ताकि मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति से पहले कई इस्लामी विचार केवल किताबों और शैक्षिक चर्चाओं तक सीमित थे, क्योंकि उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने का अवसर नहीं था। लेकिन आज इस्लामी व्यवस्था की मौजूदगी में इन विचारों को व्यावहारिक क्षेत्र में प्रस्तुत करने का अवसर मौजूद है।
बुनियादी इस्लामी विचारों पर और अधिक काम की जरूरत
आयतुल्लाह आराफी ने नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत पर छात्रों और शिक्षकों के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि हौज़ा इल्मिया को बुनियादी इस्लामी विचारों पर व्यवस्थित रूप से काम करना चाहिए और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं का जवाब देना चाहिए।
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