शनिवार 5 सितंबर 2026 - 20:14
नए शैक्षणिक वर्ष पर हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए 10 महत्वपूर्ण बिंदु; संकल्प करें कि हम «अदऊ ऐलल्लाह» के मिसदाक़ बनेंगे

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को समय के हालात, समाज की आवश्यकताओं और दुनिया में होने वाले बदलावों की सही पहचान के साथ अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाना चाहिए और धार्मिक शिक्षाओं की व्याख्या तथा इस्लाम के संदेश के प्रसार के रास्ते में आगे बढ़ना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने आज 5 सितंबर 2026 को शनिवार के दिन क़ुम के मदरसा-ए-मुबारका फ़ैज़िया में हौज़ा-ए-इल्मिया के नए शैक्षणिक वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने सूरह यूसुफ़ की आयत «قُلْ هَٰذِهِ سَبِيلِي أَدْعُو إِلَى اللَّهِ ۚ عَلَىٰ بَصِيرَةٍ أَنَا وَمَنِ اتَّبَعَنِي وَسُبْحَانَ اللَّهِ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ» की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस पवित्र आयत में तीन बुनियादी बातें बयान की गई हैं, जो वास्तव में हौज़ा-ए-इल्मिया और धार्मिक छात्रों की पहचान की बुनियाद हैं।

अल्लाह की ओर बुलाना; हौज़ा-ए-इल्मिया के मिशन का मूल आधार

उन्होंने कहा: इस आयत का पहला केंद्र अल्लाह तआला की ओर बुलाना है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) का रास्ता यह था कि समाज और पूरी मानवता को अल्लाह तआला की ओर बुलाया जाए और यही हौज़ा-ए-इल्मिया के मिशन और गतिविधियों का भी मूल आधार है।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने आगे कहा: नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत पर हम सभी को अल्लाह तआला से यह वचन और संकल्प करना चाहिए कि हम इस रास्ते को जारी रखेंगे; ऐसा रास्ता जिसकी मंज़िल «एलल्लाह» यानी अल्लाह की ओर है और जो अल्लाह तआला की असीम शक्ति के केंद्र और क़िले की ओर बढ़ने का रास्ता है।

आयतुल्लाह आराफी ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि इंसान और पूरी कायनात पर अल्लाह तआला की पूर्ण सत्ता इस रास्ते का आधार है, कहा: अल्लाह की ओर बुलाने का अर्थ यह है कि इंसान की सभी गतिविधियां, प्रयास और दिशा-निर्धारण तौहीद के केंद्र और ईश्वरीय इच्छा के रास्ते पर आधारित हों।

धार्मिक बसीरत और जागरूकता; इलाही रास्ते पर चलने की शर्त

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने पवित्र आयत के दूसरे केंद्र को «बसीरत» बताते हुए कहा: यह निमंत्रण धर्म के बारे में जागरूकता, ज्ञान और बसीरत के साथ होना चाहिए। मुफस्सिरीन के अनुसार «बसीरत» की व्याख्या फ़िक़्ह, गहरी समझ और धर्म के विभिन्न पहलुओं की जानकारी के रूप में की गई है। इसलिए हौज़ा-ए-इल्मिया को धर्म, उसके रास्ते तथा समाज में उसके क्रियान्वयन और उसे व्यवहार में लाने के तरीकों के बारे में गहरी बसीरत और समझ हासिल करनी चाहिए।

उन्होंने कहा: ईश्वरीय मार्गदर्शन का यह रास्ता केवल पैग़म्बरे इस्लाम (स) तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमीरुल मोमिनीन (अ) और आइम्मा-ए-अतहार (अ) के अस्तित्व में भी जारी रहा और उसके बाद धार्मिक नेतृत्व, मरजइयत और विलायत-ए-फ़क़ीह ने इस कठिन रास्ते को आगे बढ़ाया।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: यह रोशन रास्ता एक ऐतिहासिक और निरंतर सिलसिला है, जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) से शुरू हुआ, आइम्मा-ए-अतहार (अ) की इमामत में जारी रहा और इतिहास के विभिन्न दौरों में फ़ुक़हा, विद्वानों और धार्मिक बुज़ुर्गों के माध्यम से आगे बढ़ता रहा।

छात्रों का अल्लाह से हौज़ा-ए-इल्मिया के एक हज़ार वर्ष पुराने रास्ते को जारी रखने का संकल्प

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया के छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा: प्यारे और युवा छात्रों! हमारी और आपकी पहचान इसी रास्ते में निर्धारित होती है। आप वे प्रिय छात्र हैं जो आज ज्ञान, संघर्ष और शहादत के इस केंद्र यानी मदरसा फ़ैज़िया में मौजूद हैं। देशभर में इस वार्ता को सुनने वाले सभी प्रिय छात्रों को भी नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत पर अल्लाह तआला और वली-ए-अस्र (अ) से वचन और संकल्प करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा: हमें संकल्प करना चाहिए कि हम इस पवित्र आयत, रसूले ख़ुदा (स) की रिसालत, आइम्मा-ए-अतहार (अ) की इमामत और नेक बुज़ुर्गों, फ़ुक़हा तथा धार्मिक विद्वानों के रास्ते को जारी रखेंगे। इन महान लोगों ने एक हज़ार वर्षों से अधिक समय तक इस रोशन मिशन को अपने कंधों पर उठाए रखा और समाज को प्रकाश से रोशन किया।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने पिछले विद्वानों और फ़ुक़हा को इस रास्ते में पेश आने वाली कठिनाइयों और परेशानियों की ओर संकेत करते हुए कहा: धार्मिक बुज़ुर्गों ने इतिहास के दौरान ईश्वरीय शिक्षाओं की रक्षा और उनके प्रसार के लिए अनगिनत कठिनाइयों और परेशानियों को सहन किया तथा इस रास्ते में अनेक बलिदान दिए। आज यह मूल्यवान विरासत हमारे और आपके हवाले है।

नए शैक्षणिक वर्ष पर हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए 10 महत्वपूर्ण बिंदु; संकल्प करें कि हम «अदऊ ऐलल्लाह» के मिसदाक़ बनेंगे

संकल्प करें कि «अदऊ एलल्लाह» के मिदाक़ बनें

आयतुल्लाह आराफी ने कहा: हमें सर्वशक्तिमान अल्लाह और उन सभी महान लोगों से यह संकल्प करना चाहिए कि हम पवित्र आयत «अदऊ एलल्लाह» के मिदाक बनेंगे। «एलल्लाह» से शुरुआत करेंगे, केवल अल्लाह तआला को अपने सामने रखेंगे और अपने जीवन तथा गतिविधियों के सभी मामलों को उसी की ओर मोड़ेंगे।

उन्होंने कहा: इस रास्ते के साथ धर्म के बारे में बसीरत और जागरूकता भी आवश्यक है। हमें शरीअत को सही ढंग से सीखना, इस्लामी शिक्षाओं की गहरी और सही समझ हासिल करना तथा दुनिया में शरीअत का प्रकाश फैलाने की क्षमता पैदा करनी होगी।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया का मिशन केवल ज्ञान और शिक्षाओं के एक संग्रह को सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हौज़ा-ए-इल्मिया को धर्म की गहरी समझ हासिल करके समाज और दुनिया में उसके क्रियान्वयन, उसकी व्याख्या और उसके प्रसार के लिए प्रयास करना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया के मिशन का वैश्विक दृष्टिकोण

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया की ऐतिहासिक जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हुए कहा: हमें आज और भविष्य के इतिहास के लिए इस वचन और संकल्प को जारी रखना चाहिए, क्योंकि आज दुनिया में बहुत से लोगों की निगाहें हौज़ा-ए-इल्मिया और उसकी क्षमताओं पर केंद्रित हैं।

गार्डियन काउंसिल के फ़ुक़हा के सदस्य ने आगे कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को समय के हालात, समाज की आवश्यकताओं और दुनिया में होने वाले बदलावों की सही पहचान के साथ अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाना चाहिए और धार्मिक शिक्षाओं की व्याख्या तथा इस्लाम के संदेश के प्रसार के रास्ते में आगे बढ़ना चाहिए।

मदरसा फ़ैज़िया; इस्लामी क्रांति के महान आंदोलन का प्रारंभिक केंद्र

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने इस्लामी क्रांति के गठन और उसके निरंतर विकास में हौज़ा-ए-इल्मिया की भूमिका की ओर संकेत करते हुए कहा: इस्लामी क्रांति भी इसी महान आदर्श की कोख से अस्तित्व में आई और हमारे महान इमाम ने इसी फ़ैज़िया से इस आंदोलन का झंडा बुलंद किया। हमारे शहीद रहबर और इमाम-ए-राहिल ने भी इस रास्ते को जारी रखा और आज मरजइ-ए-तक़लीद के महान विद्वानों, सर्वोच्च रहबर और आप हौज़वियों की जिम्मेदारी है कि इस रास्ते को आगे बढ़ाएं।

उन्होंने आगे कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को एक हज़ार वर्ष पुरानी फ़िक़्ह, ज्ञान, संघर्ष और विद्वानों की मेहनत की मूल्यवान विरासत की रक्षा करते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना चाहिए और साथ ही समाज तथा पूरी उम्मते-इस्लामिया की नई आवश्यकताओं का जवाब देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

नए शैक्षणिक वर्ष के लिए हौज़ा-ए-इल्मिया की कार्य योजना

आयतुल्लाह आराफी ने कहा: इस पवित्र आयत के आईने में हमारी पहचान निर्धारित होती है। नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत पर यह आयत हौज़ा-ए-इल्मिया के आंदोलन के लिए मार्गदर्शक और रास्ता दिखाने वाली साबित हो सकती है। अल्लाह की ओर बुलाना, धार्मिक बसीरत और जागरूकता के आधार पर आगे बढ़ना, पैग़म्बरे इस्लाम (स), आइम्मा-ए-अतहार (अ) और महान फ़ुक़हा के रास्ते को जारी रखना तथा शरीअत का प्रकाश फैलाने का प्रयास हौज़ा-ए-इल्मिया की योजनाओं और नीतियों में सबसे ऊपर होना चाहिए।

उन्होंने कहा: नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत इस बात का अवसर है कि हम सभी एक बार फिर अल्लाह तआला, वली-ए-अस्र (अ) और हौज़ा-ए-इल्मिया के ऊंचे लक्ष्यों से संकल्प करें और नए उत्साह तथा दृढ़ इरादे के साथ इस रोशन रास्ते को जारी रखें।

हौज़ा-ए-इल्मिया दृढ़ संकल्प के साथ विकास और पूर्णता का सफर जारी रखेगा

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद, हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रशासन और हौज़वी संस्थानों के हौज़ा-ए-इल्मिया के विकास और पूर्णता के सफर को जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्प पर ज़ोर देते हुए कहा: आज के कठिन हालात में हौज़ा-ए-इल्मिया को विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभाने के साथ-साथ इस्लामी क्रांति, इमाम-ए-राहिल, शहीदों और हमारे शहीद व प्रिय रहबर के आदर्शों के संबंध में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा: संभव है कि कुछ अवसरों पर सीमाओं या आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध न होने के कारण सभी कार्य वांछित सटीकता और गति से आगे न बढ़ सकें। लेकिन हम ईलाही दरबार और अपनी जिम्मेदारियों के सामने यह संकल्प करते हैं कि हौज़ा-ए-इल्मिया के विकास, उसकी प्रतिष्ठा और आज के गंभीर तथा संवेदनशील दौर में उसकी प्रभावी भूमिका के लिए किसी भी प्रयास से पीछे नहीं हटेंगे।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को इस्लामी क्रांति, इमाम-ए-शहीदां, हमारे शहीद व प्रिय रहबर और सभी मूल्यवान शहीदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी बेहतरीन ढंग से निभानी चाहिए और इस रास्ते में अपनी सभी क्षमताओं और ऊर्जा को इस्तेमाल करना चाहिए।

विभिन्न सरकारी संस्थानों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

आयतुल्लाह आराफी ने इस्लामी गणराज्य के विभिन्न संस्थानों और केंद्रों के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी देते हुए कहा: इन समझौता ज्ञापनों के तहत विभिन्न संस्थानों की आवश्यकताओं की पहचान करके उन्हें हौज़ा-ए-इल्मिया तक पहुंचाया गया है, ताकि इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक, शोध, शिक्षण और विशेषज्ञता संबंधी क्षमताओं का उपयोग किया जा सके।

उन्होंने कहा: इन समझौता ज्ञापनों ने हौज़ा-ए-इल्मिया और व्यवस्था के विभिन्न संस्थानों के बीच अधिक व्यवस्थित संबंध तथा मौजूदा क्षमताओं से पारस्परिक लाभ उठाने की बुनियाद उपलब्ध कराई है।

शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए केंद्रों और ढांचों की स्थापना

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया में नए केंद्रों और ढांचों की स्थापना की जानकारी देते हुए कहा: पिछले वर्षों के दौरान रोज़मर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने और जिम्मेदारियों को निभाने के लिए कई आवश्यक नए केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही हौज़वी संस्थानों की समन्वय परिषद भी बनाई गई है, ताकि विभिन्न हौज़वी संस्थानों के बीच अधिक समन्वय और आपसी सहयोग पैदा किया जा सके।

नए शैक्षणिक वर्ष पर हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए 10 महत्वपूर्ण बिंदु; संकल्प करें कि हम «अदऊ ऐलल्लाह» के मिसदाक़ बनेंगे

सामाजिक समस्याओं के लिए विभिन्न समितियों की स्थापना

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया की सामाजिक गतिविधियों के विस्तार की ओर संकेत करते हुए कहा: सामाजिक समस्याओं के क्षेत्र में लगभग 30 महत्वपूर्ण समितियां बनाई गई हैं। ये समितियां जनसंख्या, पर्यावरण, हिजाब, अम्र बिल मारूफ़ और अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं में हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक और शोध क्षमताओं का उपयोग करते हुए सामाजिक समस्याओं और चुनौतियों के उचित समाधान पेश करने का प्रयास करती हैं।

आर्टीफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) और संज्ञानात्मक विज्ञान के विवेकपूर्ण उपयोग पर ज़ोर

आयतुल्लाह आराफी ने आधुनिक तकनीक को हौज़ा-ए-इल्मिया के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल बताते हुए कहा: तकनीकों और आर्टीफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) की नीति-निर्माण के लिए एक परिषद बनाई गई है और हौज़ा-ए-इल्मिया संज्ञानात्मक विज्ञान तथा आधुनिक तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। नई तकनीकों का सामना करते हुए हमें न तो निष्क्रिय होना चाहिए और न ही उनसे बेखबर रहना चाहिए, बल्कि जागरूकता, समझदारी और सक्रिय तरीके से इन विज्ञानों तथा तकनीकों की क्षमताओं का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को वैज्ञानिक और तकनीकी बदलावों की सही पहचान के साथ इन क्षेत्रों में मौजूद क्षमताओं को अपनी शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया और व्यवस्था की आवश्यकताओं से संबंधित शोध का समर्थन

आयतुल्लाह आराफी ने अपनी वार्ता के एक अन्य भाग में शोध परियोजनाओं के समर्थन की ओर संकेत करते हुए कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया की महत्वपूर्ण गतिविधियों में से एक ऐसे शोध का समर्थन करना है, जो हौज़ा और व्यवस्था की वास्तविक आवश्यकताओं का अध्ययन करते हैं। अब तक बड़ी संख्या में अध्ययन परियोजनाओं का समर्थन और सहायता की जा चुकी है तथा व्यवस्था के विभिन्न संस्थानों को विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक विषय शोधकर्ताओं को सौंपे गए हैं, ताकि उनका वैज्ञानिक और विशेषज्ञतापूर्ण अध्ययन किया जा सके।

उन्होंने कहा: यह तरीका हौज़वी शोध और समाज तथा व्यवस्था की वास्तविक समस्याओं के बीच संबंध को और मजबूत कर सकता है तथा देश की आवश्यकताओं के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक उत्तर तैयार करने में सहायक हो सकता है।

हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम के सौ वर्ष के इतिहास से 15 लाख दस्तावेज़ एकत्र

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने हौज़ा-ए-इल्मिया और उलेमा के दस्तावेज़ केंद्र की गतिविधियों की ओर संकेत करते हुए कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया और रूहानियत का दस्तावेज़ केंद्र हौज़ा-ए-इल्मिया की ऐतिहासिक विरासत की रक्षा और उसके दस्तावेज़ीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक है।

उन्होंने इस केंद्र में मौजूद दस्तावेज़ों की ओर संकेत करते हुए कहा: अब तक हौज़ा-ए-इल्मिया क़ुम के पिछले एक सौ वर्षों के इतिहास से संबंधित लगभग 15 लाख दस्तावेज़ एकत्र किए जा चुके हैं, जिनमें लगभग 5 लाख लिखित दस्तावेज़ हैं। दस्तावेज़ों का यह विशाल संग्रह पिछले एक सौ वर्षों के दौरान क़ुम के हौज़ा-ए-इल्मिया के इतिहास और बदलावों के एक हिस्से को अपने अंदर सुरक्षित रखता है और इसे इस दौर में हौज़ा-ए-इल्मिया के महान शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक बदलावों के आईने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

धर्म और साइबर स्पेस के क्षेत्र में विशेषज्ञ गतिविधियों का विस्तार

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने धर्म और साइबर स्पेस के क्षेत्र में विशेषज्ञ गतिविधियों की ओर भी संकेत करते हुए कहा: «विशेषज्ञता केंद्र धर्म और साइबर स्पेस» उन संस्थानों में शामिल है, जो नई आवश्यकताओं तथा संचार और सोशल मीडिया सहित साइबर स्पेस के क्षेत्र में होने वाले बदलावों का जवाब देने के लिए सक्रिय हैं।

गार्डियन काउंसिल के फ़ुक़हा के सदस्य ने आधुनिक संचार और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हौज़ा-ए-इल्मिया की सक्रिय मौजूदगी की आवश्यकता की ओर संकेत करते हुए कहा: सोशल मीडिया और उसकी क्षमताओं पर ध्यान देना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से है और हौज़ा-ए-इल्मिया को इस क्षेत्र में भी प्रभावी, शैक्षणिक और उद्देश्यपूर्ण मौजूदगी कायम करनी चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया और उलेमा के शैक्षणिक एवं पहचान संबंधी सम्मेलनों का सिलसिला जारी

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़ा-ए-इल्मिया और रूहानियत के स्थायी सम्मेलनों के सचिवालय की गतिविधियों की ओर संकेत करते हुए कहा: इस संबंध में कई कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं और यह सिलसिला जारी है।

शैक्षणिक पुस्तकों की तैयारी और प्रस्तुति के माध्यम से अरबी साहित्य की बुनियाद मजबूत करने पर ज़ोर

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने अरबी साहित्य की बुनियाद मजबूत करने के लिए नए कार्यक्रम शुरू किए जाने की जानकारी देते हुए कहा: इस संबंध में अरबी साहित्य के क्षेत्र में नई पुस्तक और शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का काम शुरू किया गया है, ताकि छात्रों की साहित्यिक बुनियाद मजबूत हो सके।

आयतुल्लाह आराफी ने हौज़वी उलूम की शिक्षा में अरबी साहित्य के महत्व की ओर संकेत करते हुए कहा: अरबी साहित्य पर पकड़ धार्मिक और शैक्षणिक ग्रंथों को समझने की महत्वपूर्ण बुनियादों में से एक है और इस क्षेत्र को मजबूत करने से छात्रों के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा करने तथा शैक्षणिक स्रोतों और धार्मिक ग्रंथों से बेहतर लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यक्रमों और प्रयासों की ओर संकेत करते हुए कहा: इस संबंध में विभिन्न विषयों और कार्यों की योजना बनाई गई है। इनमें से कुछ को इस समारोह में पेश किया गया, जबकि अन्य मामलों का विवरण भविष्य की विस्तृत रिपोर्टों में प्रकाशित किया जाएगा। ये कार्य और कार्यक्रम शैक्षणिक, शिक्षण, शोध, प्रचार और सामाजिक क्षेत्रों में जारी हैं और इनका उद्देश्य हौज़ा-ए-इल्मिया की क्षमताओं को मजबूत करना तथा उसके मिशन को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना है।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: इन कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए हौज़ा-ए-इल्मिया के सभी विभागों की भागीदारी आवश्यक है। यदि हौज़ा-ए-इल्मिया को इन सभी क्षेत्रों में प्रगति करनी है और अपनी जिम्मेदारियों को अपेक्षित रूप से पूरा करना है, तो हौज़ा-ए-इल्मिया की विभिन्न क्षमताओं को एकजुट करना और सभी विभागों की शैक्षणिक, शिक्षण तथा कार्यान्वयन संबंधी क्षमताओं से लाभ उठाना होगा। हौज़ा-ए-इल्मिया में आगे बढ़ने के लिए व्यापक सहयोग और आपसी समन्वय आवश्यक है। शिक्षक, मदरसे, संस्थान और छात्र, सभी इस रास्ते को पूरा करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

हौज़ा-ए-इल्मिया की क्षमताओं से उसके मिशन को पूरा करने के लिए लाभ उठाना

हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद के सदस्य ने इन गतिविधियों को जारी रखने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को अपने मिशन को पूरा करने के लिए शैक्षणिक, शिक्षण, शोध, प्रचार, सामाजिक और सांस्कृतिक विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय और प्रभावी मौजूदगी कायम करनी चाहिए। विशेषज्ञता केंद्रों और कार्यालयों की स्थापना, शैक्षणिक और शोध गतिविधियों का विस्तार, बुनियादी शिक्षाओं को मजबूत करना, सोशल मीडिया पर ध्यान देना और प्रचार गतिविधियों को बढ़ावा देना, ये सभी हौज़ा-ए-इल्मिया की ओर से समाज की आवश्यकताओं का जवाब देने और अपने मिशन को निभाने के लिए जारी हैं।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: उम्मीद है कि शिक्षकों, संस्थानों, मदरसों और छात्रों के सहयोग से ये कार्यक्रम और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेंगे और हौज़ा-ए-इल्मिया शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास तथा अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की दिशा में और अधिक प्रभावी कदम उठा सकेगा।

उन्होंने इमाम-ए-राहिल, सुप्रीम लीडर, मरजइ-ए-तक़लीद के महान विद्वानों, हौज़ा-ए-इल्मिया के बुज़ुर्गों और हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद के निर्देशों की ओर संकेत करते हुए कहा: नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत पर आवश्यक है कि इमाम-ए-राहिल की विचारधारा और जीवन-पद्धति, इस्लामी क्रांति के शहीद रहबर के निर्देशों, मरजइ-ए-तक़लीद के महान विद्वानों और हौज़ा-ए-इल्मिया के बुज़ुर्गों के संदेशों से मार्गदर्शन लेते हुए हौज़ा-ए-इल्मिया के आंदोलन को अधिक सटीकता और गंभीरता के साथ आगे बढ़ाया जाए।

नए शैक्षणिक वर्ष के लिए हौज़ा-ए-इल्मिया के 10 महत्वपूर्ण बिंदु

पहला: शैक्षणिक पिछड़ेपन की भरपाई; हौज़ा-ए-इल्मिया की पहली प्राथमिकता

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने पिछले वर्षों और महीनों में सामने आए कुछ घटनाक्रमों और परिस्थितियों की ओर संकेत करते हुए कहा, जिनकी वजह से शिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों की प्रक्रिया प्रभावित हुई, कि एक समय हमें कोरोना और थोपी गई जंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिनकी वजह से शैक्षणिक गतिविधियों में कुछ हद तक रुकावट आई और संभव है कि कुछ क्षेत्रों में पिछड़ापन पैदा हुआ हो। इस वर्ष शिक्षकों, प्रबंधकों और हौज़ा-ए-इल्मिया के सभी सक्रिय लोगों को संभावित शैक्षणिक पिछड़ेपन की भरपाई गंभीरता के साथ करनी चाहिए। हमारी मांग है कि शैक्षणिक पिछड़ेपन की भरपाई हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रशासनिक विभागों और सम्मानित शिक्षकों की योजनाओं तथा गतिविधियों की मूल प्राथमिकताओं में शामिल हो।

आयतुल्लाह आराफी ने आगे कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को अपनी सभी जिम्मेदारियों पर ध्यान देते हुए ज्ञान, शोध, फ़िक़्ह, उसूल, इस्लामी शिक्षाओं और छात्रों के शैक्षणिक प्रशिक्षण के स्थान को अपनी बुनियादी नींवों में से एक के रूप में सुरक्षित और मजबूत रखना चाहिए।

दूसरा: हौज़ा-ए-इल्मिया राष्ट्र और सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में मौजूद रहेगा

उन्होंने इस्लामी क्रांति और देश की रक्षा के संबंध में हौज़ा-ए-इल्मिया के रुख पर ज़ोर देते हुए कहा: आज हम एक साथ ईरान, इस्लाम और इस्लामी क्रांति के दुश्मनों तथा अपने मित्रों के सामने यह घोषणा करते हैं कि हौज़ा-ए-इल्मिया अब भी इस्लामी क्रांति, मैदान में मौजूदगी और इस्लाम, ईरान तथा इस्लामी क्रांति के दुश्मनों के सामने डटे रहने को मूल महत्व देता है।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: सम्मानित प्रबंधकों और शिक्षकों से मेरा अनुरोध है कि जहां भी उन्हें महसूस हो कि सशस्त्र बलों के समर्थन और जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए मैदान, सड़कों और व्यावहारिक मोर्चे पर मौजूदगी आवश्यक है, वहां इस मौजूदगी को प्राथमिकता दें।

तीसरा: इस्लामी गणराज्य ईरान खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार है

आयतुल्लाह आराफी ने विभिन्न खतरों और बदलावों का मुकाबला करने के लिए इस्लामी गणराज्य ईरान की तैयारी पर ज़ोर देते हुए कहा: पूरी दुनिया को मालूम होना चाहिए कि ईरानी राष्ट्र सर्वोच्च रहबर-ए-इंक़िलाब के नेतृत्व का पालन करते हुए इस्लाम और इस्लामी क्रांति को आगे बढ़ाने के रास्ते में ज़रा भी कोताही नहीं करेगा।

गार्डियन काउंसिल के सदस्य ने ईरानी राष्ट्र के साथ हौज़ा-ए-इल्मिया की एकजुटता और हौज़ा-ए-इल्मिया के मार्गदर्शन में मरजइ-ए-तक़लीद के महान विद्वानों के स्थान की ओर संकेत करते हुए कहा: हम मरजइ-ए-तक़लीद के महान विद्वानों का अनुसरण करते हुए राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और दुश्मन के सामने हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं।

चौथा: युद्ध के सबक से हौज़वी और सामाजिक प्रशिक्षण में लाभ उठाना

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने युद्ध के सांस्कृतिक, नैतिक और प्रशिक्षण संबंधी परिणामों से लाभ उठाने को हौज़ा-ए-इल्मिया की महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल बताते हुए कहा: हमें थोपी गई जंग के परिणामों से हौज़वी लोगों, समाज, छात्रों और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए लाभ उठाना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद के सदस्य ने आगे कहा: शिक्षा मंत्री से मुलाकात के दौरान मैंने कहा कि यह जंग एक राष्ट्र के ईमान का पूरा आईना थी और वास्तव में इसने हमारे सामने नैतिक और प्रशिक्षण संबंधी सबक की एक पूरी किताब खोल दी। हौज़ा-ए-इल्मिया, शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालयों के हमारे शिक्षकों को राष्ट्र और शहीदों के ईमान, त्याग, बलिदान और जान की बाज़ी लगाने के इन उदाहरणों को सभ्यता और प्रशिक्षण की किताब का हिस्सा बनाना चाहिए।

उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा: सम्मानित शिक्षकों से उम्मीद है कि वे इस विषय पर विशेष ध्यान देते हुए इन घटनाओं की प्रशिक्षण संबंधी और नैतिक क्षमताओं से अगली पीढ़ी के प्रशिक्षण के लिए लाभ उठाएंगे और धार्मिक तथा सामाजिक प्रशिक्षण की प्रक्रिया में त्याग, प्रतिरोध, बलिदान और शहादत की संस्कृति को ध्यान में रखेंगे।

पांचवां: मरजइयत और विलायत-ए-फ़क़ीह को मजबूत बनाना

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने हौज़ा-ए-इल्मिया के ढांचे में मरजइयत और नेतृत्व के स्थान की ओर संकेत करते हुए कहा: मरजइयत हौज़ा-ए-इल्मिया की एक मूल संस्था के रूप में ध्यान और मजबूती की हकदार है और विशेष रूप से सर्वोच्च रहबर के नेतृत्व की शुरुआत के समय हौज़ा-ए-इल्मिया की इस मजबूत परंपरा को पूरी शक्ति के साथ जारी रहना चाहिए। हम हौज़ा-ए-इल्मिया के बुज़ुर्गों के साथ खड़े हैं और विलायत-ए-फ़क़ीह हमारे मार्गदर्शन का दीपक है। यही हौज़ा-ए-इल्मिया का रोशन रास्ता है और इसे शक्ति तथा दृढ़ता के साथ जारी रहना चाहिए।

छठा: इस्लामी क्रांति के दोनों इमामों और हौज़ा-ए-इल्मिया के बुज़ुर्गों की विचारधारा से परिचित होना

आयतुल्लाह आराफी ने इमाम ख़ुमैनी और इस्लामी क्रांति के शहीद रहबर तथा हौज़ा-ए-इल्मिया के बुज़ुर्गों की विचारधारा से परिचित होने को हौज़ा-ए-इल्मिया की बुनियादी गतिविधियों में शामिल बताते हुए कहा: इमाम-ए-राहिल और क्रांति के बुज़ुर्गों, विशेष रूप से इस्लामी क्रांति के दोनों इमामों की विचारधारा से परिचित होना हौज़ा-ए-इल्मिया की गतिविधियों की मूल प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। इमाम-ए-राहिल और हमारे शहीद इमाम की विचारधारा पर हौज़ा-ए-इल्मिया में गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए और नई पीढ़ी के छात्रों तथा विद्वानों को इमाम और इस्लामी क्रांति के नेताओं की वैचारिक, राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक बुनियादों की गहरी और निरंतर जानकारी हासिल करनी चाहिए।

सातवां: जिहाद-ए-तबईन; हौज़ा-ए-इल्मिया की दिन-रात की जिम्मेदारी

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने जिहाद-ए-तबईन और इस्लामी क्रांति की सही कहानी दुनिया के सामने पेश करने को हौज़ा-ए-इल्मिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताते हुए कहा: ईरान और दुनिया में इस्लामी क्रांति की महानता को स्पष्ट करना और उसकी सही कहानी पेश करना हम सभी की दिन-रात की जिम्मेदारी है। हम सभी को अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार इस्लामी क्रांति की महानता, उसकी उपलब्धियों और इस आंदोलन की वैचारिक तथा मूल्य आधारित बुनियादों को समाज और दुनिया के सामने पेश करना चाहिए।

आयतुल्लाह आराफी ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को व्याख्या, जागरूकता पैदा करने और शंकाओं के जवाब देने के क्षेत्र में सक्रिय होना चाहिए तथा अपनी शैक्षणिक, वैचारिक और प्रचार संबंधी क्षमताओं का उपयोग करते हुए इस्लामी क्रांति और देश में होने वाले बदलावों की सही और प्रमाणित कहानी पेश करनी चाहिए।

आठवां: शैक्षणिक और फ़िक़्ही शक्ति; हौज़ा-ए-इल्मिया का मूल केंद्र

हौज़ा-ए-इल्मिया के निदेशक ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि “हौज़ा-ए-इल्मिया का मूल कार्य उसकी शैक्षणिक, फ़िक़्ही और वैचारिक शक्ति है”, कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक शक्ति उसके मूल और अनदेखा न किए जा सकने वाले सिद्धांतों में से एक है।

उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की ओर संकेत करते हुए कहा: इतिहास के दौरान हमारे पास वैचारिक, कलामी, हदीस, तफ़्सीर, फ़िक़्ह और अन्य इस्लामी उलूम के क्षेत्रों में महान और मूल्यवान शैक्षणिक विरासत रही है और इस गहरी शैक्षणिक बुनियाद को सुरक्षित और मजबूत बनाया जाना चाहिए। हौज़ा-ए-इल्मिया को अपनी मूल्यवान शैक्षणिक विरासत की रक्षा करने के साथ-साथ इस्लामी उलूम के और अधिक विकास तथा प्रगति के लिए भी वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए और हौज़ा-ए-इल्मिया की शैक्षणिक तथा वैचारिक बुनियाद को कमजोर या प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

आयतुल्लाह आराफी ने शैक्षणिक क्षमता के साथ आध्यात्मिक, आत्मिक और नैतिक शक्ति को भी हौज़ा-ए-इल्मिया के मूल स्तंभों में शामिल बताते हुए कहा: शैक्षणिक और फ़िक़्ही शक्ति के साथ छात्रों और हौज़वी लोगों की आध्यात्मिक, आत्मिक और नैतिक शक्ति को भी मजबूत बनाना चाहिए। इन दोनों पर, यानी शैक्षणिक क्षमता और आध्यात्मिक तथा नैतिक शक्ति पर एक साथ ध्यान दिया जाना चाहिए।

नौवां: जनता और युवा पीढ़ी के साथ निरंतर संपर्क की आवश्यकता

उन्होंने जनता और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संपर्क को हौज़ा-ए-इल्मिया की एक और महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए कहा: जनता, युवाओं, स्कूल के छात्रों, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, विश्वविद्यालयों से जुड़े लोगों और समाज के सभी वर्गों के साथ संपर्क हौज़ा-ए-इल्मिया के मूल कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने आगे कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया समाज, युवा पीढ़ी की समस्याओं और देश के वैचारिक तथा सांस्कृतिक बदलावों से बेखबर नहीं रह सकता। विद्वानों और छात्रों को जनता के बीच मौजूद रहना चाहिए और विभिन्न पीढ़ियों, विशेष रूप से युवाओं, स्कूल तथा विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने सर्वोच्च रहबर की ओर से “प्रगतिशील और आधुनिक हौज़ा” पर दिए गए ज़ोर की ओर संकेत करते हुए कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, प्रचार और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में अग्रणी, उत्कृष्ट, सक्रिय और जवाबदेह हौज़ा होना चाहिए।

दसवां: इज्तिहादी बुनियादों की रक्षा के साथ आधुनिक तकनीकों का उपयोग

आयतुल्लाह आराफी ने अपनी बातचीत के एक अन्य हिस्से में हौज़ा-ए-इल्मिया की ओर से आधुनिक तरीकों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया और धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सभी आधुनिक तरीकों और आधुनिक तकनीकों से लाभ उठाना चाहिए। हालांकि नए साधनों का उपयोग सही इज्तिहादी बुनियादों और हौज़ा-ए-इल्मिया के गहरे तथा मजबूत पारंपरिक तरीकों की रक्षा के साथ किया जाना चाहिए।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को अपनी मूल शैक्षणिक, फ़िक़्ही और इज्तिहादी बुनियादों का पालन करते हुए आधुनिक तकनीकों की क्षमताओं का उपयोग शिक्षा, शोध, प्रचार, समाज से संपर्क और धार्मिक शिक्षाओं को पहुंचाने के लिए करना चाहिए।

उन्होंने हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा: हम सभी शिक्षकों, मदरसों, संस्थानों और हौज़ा-ए-इल्मिया के विभिन्न केंद्रों से अनुरोध करते हैं कि इस्लामी क्रांति के लिए आवश्यक सभी हितों को ध्यान में रखते हुए मैदान में मौजूदगी, जनता से संपर्क, दर्स और बहस पर ध्यान, वैचारिक तथा शैक्षणिक बुनियाद को मजबूत करना और छात्रों के नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करें।

हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने अंत में उम्मीद जताते हुए कहा: इंशाअल्लाह हम सभी इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम और हज़रत वली-ए-अस्र अरवाहुना फ़िदाह के सच्चे सिपाही बनें और इस्लाम तथा इस्लामी क्रांति के रास्ते को बसीरत, ज्ञान, नैतिकता और क्रांतिकारी भावना के साथ सही ढंग से आगे बढ़ाने में सफल हों।

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