मंगलवार 22 सितंबर 2026 - 03:28
आयतुल्लाहिल उज़्मा शुबैरी ज़ंजानी का निधन हौज़ा-ए-इल्मिया और अहले ईमान के लिए बड़ा नुकसान है

आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी ने आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर गहरे दुख और शोक का इज़हार करते हुए उनकी इल्मी और दीनी सेवाओं को श्रद्धांजलि पेश की और उनके निधन को हौज़ा-ए-इल्मिया तथा सभी अहले ईमान के लिए बड़ा और दर्दनाक नुकसान बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी ने ताज़ियती बयान जारी किया।

आयतुल्लाहिल उज़्मा बशीर नजफ़ी के ताज़ियती बयान का पूरा पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

सारी तारीफ़ उस अल्लाह के लिए है, जिसके अलावा किसी अप्रिय घटना पर किसी और की प्रशंसा नहीं की जा सकती। और किसी में कोई ताकत और शक्ति नहीं, सिवाय महान और सर्वोच्च अल्लाह के।

मुझे अत्यंत दुख और शोक के साथ जलीलुल क़द्र आलिम-ए-दीन, जनाब आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसल्लाहु नफ़्सहु़ज़् ज़किय्यह के निधन की खबर मिली। उनकी पूरी मुबारक ज़िंदगी इल्मी सेवाओं, दीन और मज़हब की सेवा, उलमा और फ़ुज़ला की शिक्षा-दीक्षा तथा हौज़ा-ए-इल्मिया और अहले ईमान को इल्म और मारिफ़त से लाभ पहुंचाने में गुज़री।

निस्संदेह ऐसे जलीलुल क़द्र आलिम-ए-दीन का निधन, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने बुज़ुर्ग पूर्वज हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की शरीअत और मक्तब-ए-अहले-बैत अलैहिमुस्सलाम की सेवा में गुज़ार दी, हौज़ा-ए-इल्मिया और सभी अहले ईमान के लिए एक बड़ा और दर्दनाक नुकसान है। उनके निधन से उन सभी लोगों के दिलों में गहरी कमी पैदा हो गई है, जो उनके इल्मी स्थान और श्रेष्ठता से परिचित थे, उनके शागिर्द थे या उनसे प्रेम और श्रद्धा रखते थे।

इस दुखद अवसर पर मैं अपने आका और मौला, हज़रत वली-उल्लाहिल आज़म, साहिबुल-अस्र वज़्ज़मान अरवाहुना लितुराबि मुक़द्दमिहिल फ़िदा, हौज़ात-ए-इल्मिया, सम्मानित उलमा और सभी अहले ईमान, विशेष रूप से उनके सम्मानित परिवार, शागिर्दों और श्रद्धालुओं की सेवा में दिली ताज़ियत और हार्दिक संवेदना पेश करता हूं।

हम अल्लाह सुब्हानहू व तआला से दुआ करते हैं कि वह इस खुशनसीब दिवंगत को अपनी वसीअ रहमत और रिज़वान में स्थान प्रदान करे, उन्हें हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम और उनकी पाकीज़ा आल पर सलवातुल्लाहि अलैहिम अजमईन के साथ महशूर फरमाए और उनकी पाक दादी, सिद्दीक़ा-ए-कुबरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शफ़ाअत नसीब फरमाए।

इससे बढ़कर उनके लिए और क्या सौभाग्य और खुशनसीबी हो सकती है कि वे अपने पाक पूर्वजों की रहमत के साए में जाने के लिए दुनिया से विदा हुए।

इन्ना लिल्लाहे वा इन्ना इलैहे राजेऊन।

वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीइल अज़ीम।

बशीर हुसैन नजफ़ी

21 सितम्बर 2026

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