सोमवार 21 सितंबर 2026 - 17:13
आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी की रेहलत अज़ीम इल्मी नुक़सान है : मौलाना सय्यद अशरफ़ अली अल-ग़रवी

मरजा-ए-आली-क़द्र आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रिज़वानुल्लाह अलैह की रेहलत पर मरजा-ए-आला दीनी आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद अली हुसैनी सीस्तानी द०ज़ि० के नुमाइंदा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैय्यद अशरफ़ अली अल-ग़रवी ने ये ताज़ियती पैग़ाम जारी किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मरजा-ए-आली-क़द्र आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी रिज़वानुल्लाह अलैह की रेहलत पर मरजा-ए-आला दीनी आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद अली हुसैनी सीस्तानी द०ज़ि० के नुमाइंदा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सैय्यद अशरफ़ अली अल-ग़रवी ने ये ताज़ियती पैग़ाम जारी किया।

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

निहायत रंज व ग़म के साथ और अल्लाह तआला की क़ज़ा व क़द्र पर राज़ी रहते हुए ये अलमनाक ख़बर मिली है कि मरजा-ए-दीनी कबीर, फ़क़ीह-ए-अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़ुद्दिसा सिर्रुहु रेहलत फ़रमा गए हैं।

आप जलीलुल-क़द्र आलिम-ए-रब्बानी, बुलंद-पाया फ़क़ीह, मोहक़्क़िक और अहल-ए-इल्म के मुरब्बी थे। आपने अपनी पूरी बा बरकत ज़िन्दगी उलूम-ए-आले-मुहम्मद अलैहिमुस्सलाम के प्रचार-प्रसार, फ़िक़्ह व शरीअत की ख़िदमत, हौज़ा-ए-इल्मिया की इल्मी व रूहानी तरक़्क़ी, उलमा व फ़ुज़ला की तरबियत और मोमिनीन की दीनी रहनुमाई में गुज़ारी। फ़िक़्ह व उसूल में आपकी इल्मी कोशिशें और आपकी तदरीसी ख़िदमात हौज़ा-ए-इल्मिया के इल्मी विरसे का बहुमूल्य हिस्सा हैं।

आपकी रेहलत सिर्फ आपके ख़ानदान, शागिर्दों और चाहने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि तमाम हौज़ात-ए-इल्मिया और पूरी दुनिया-ए-तशय्यो के लिए एक बहुत बड़ा इल्मी नुक़सान है। आपने इल्म को तहक़ीक़, तदरीस को तरबियत और फ़ेक़ाहत को दीनी रहनुमाई से जोड़े रखा। आपकी इल्मी ज़िन्दगी आने वाली नस्लों के लिए इल्म, तक़वा और दीन की ख़िदमत का रौशन नमूना रहेगी।

इस जानकाह हादसे पर हम हज़रत वली-ए-अस्र इमाम महदी अज्जलल्लाहु फ़रजहुश-शरीफ़, मराजे-ए-एज़ाम, हौज़ात-ए-इल्मिया, आपके मोअज़्ज़म ख़ानदान, तमाम शागिर्दों, मुतअल्लिक़ीन, मुहिब्बीन और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा की ख़िदमत में दिल से ताज़ियत पेश करते हैं।

हम बारगाह-ए-ख़ुदावंदी में दुआगो हैं कि अल्लाह तआला मरहूम को अपनी वसीअ रहमत व मग़फ़िरत से नवाज़े, उनकी इल्मी व दीनी ख़िदमात को क़बूल फ़रमाए, उन्हें हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम और आले-ताहिरीन अलैहिमुस्सलाम के जवार-ए-रहमत में जगह अता करे, उनके दर्जात को इल्लियीन में बुलंद करे और उनके इल्म, अमल, तक़वा और ख़िदमत-ए-दीन को उनके लिए ज़ख़ीरा-ए-आख़िरत बनाए।

अल्लाह तआला मोहतरम ख़ानदान, शागिर्दों, मुतअल्लिक़ीन और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील और अज्र-ए-अज़ीम अता करे और हौज़ात-ए-इल्मिया व उम्मत-ए-मुस्लिमा को इस बड़े इल्मी नुक़सान पर सब्र व इस्तिक़ामत दे।

अल्लाह इस आलिम-ए-रब्बानी पर अपनी बेपायां रहमत नाज़िल फ़रमाए, उनके दर्जात बुलंद करे और उन्हें मुहम्मद व आले-मुहम्मद के साथ महशूर फ़रमाए।

वला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीय्यिल अज़ीम

सैय्यद अशरफ़ अली अल-ग़रवी
नुमाइंदा, मर्जा-ए-आला आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद अली सीस्तानी द०ज़ि०
बाब-उन-नजफ़, सज्जाद बाग़ कॉलोनी, लखनऊ

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