हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व-ए-तशय्यु के वरिष्ठ मरजए तक़लीद, उच्च कोटि के फ़क़ीह और ज्ञान एवं नैतिकता के प्रतीक हज़रत आयतुल्लाह हाज सैयद मूसा शुबैरी ज़ंजानी क़द्दसल्लाहु नफ़सहुल-ज़किय्या की मजलिस-ए-ताज़ियत कुछ देर पहले रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़िलाब-ए-इस्लामी की ओर से हज़रत फ़ातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के रौज़े के शबिस्तान इमाम ख़ुमैनी (रह.) में शुरू हुई।
हज़रत करीमा-ए-अहले-बैत सलामुल्लाह अलैहा के रौज़े-ए-मुबारक में आज रात एक विशेष माहौल है। बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग यहां जमा हैं, ताकि आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में शामिल होकर शिया मरजइयत तथा फ़िक़्ह, ईमान, नैतिकता और धार्मिक निष्ठा की एक महान हस्ती को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
इस मजलिस में आयतुल्लाहों, उलमा और बुज़ुर्गों, मराजे-ए-इज़ाम के कार्यालयों के प्रतिनिधियों के अलावा आयतुल्लाह आराफ़ी, ईरान के हौज़ा इल्मिया के प्रमुख, आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी, क़ुम हौज़ा इल्मिया की जामेआ मुदर्रिसीन के प्रमुख, आयतुल्लाह मुहम्मद मेहदी शब-ज़िंदादार और हौज़ा इल्मिया की अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां भी शामिल हैं।
हौज़ा इल्मिया के शिक्षक और विद्वान, जामेआ मुदर्रिसीन और हौज़ा-ए-इल्मिया की उच्च परिषद के सदस्य, हौज़वी अधिकारी, नागरिक एवं सैन्य अधिकारी, मजलिस-ए-ख़ुबरेगान रहबरी के सदस्य तथा समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े मोमिन लोग भी नम आंखों के साथ इस मजलिस में शामिल हैं।
ज्ञान और धार्मिक समझ से जुड़े लोगों तथा विशेष रूप से विद्वानों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने शिया मरजइयत के इस दुख में लोगों के गहरे जुड़ाव को उजागर किया है। यह सभा केवल एक मजलिस-ए-ताज़ियत नहीं, बल्कि धार्मिक मरजइयत और धर्मनिष्ठ जनता के बीच गहरे संबंध और श्रद्धा का एक स्पष्ट उदाहरण भी है।
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