शनिवार 26 सितंबर 2026 - 17:30
राजनीतिक मतभेदों की सज़ा आम नागरिकों को देना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं: मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता

हौज़ा-ए-इमाम-ए-क़ायम दीनीया हैदराबाद दकन के प्रिंसिपल और निदेशक मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान एयर की उड़ानों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ज़ायरीन, छात्रों और मरीजों को होने वाली परेशानियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राजनीतिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय विवादों की सज़ा आम नागरिकों को देना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा-ए-इमाम-ए-क़ायम दीनीया हैदराबाद दकन के प्रिंसिपल और निदेशक मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान एयर की उड़ानों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ज़ायरीन, छात्रों और मरीजों को होने वाली परेशानियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि राजनीतिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय विवादों की सज़ा आम नागरिकों को देना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने अपने एक बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान और अन्य ईरानी एयरलाइनों पर लगाए गए प्रतिबंधों तथा ईरान एयर की उड़ानों पर रोक के कारण भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों से ईरान और इराक जाने वाले ज़ायरीन, हौज़ा-ए-इल्मिया में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र और इलाज के लिए यात्रा करने वाले मरीज गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नजफ़-ए-अशरफ़ और अन्य पवित्र स्थलों की ज़ियारत के लिए यात्रा करने वाले हजारों ज़ायरीन की आवाजाही प्रभावित होना बेहद चिंता का विषय है, जिसे केवल राजनीतिक संघर्ष के दृष्टिकोण से नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने कहा कि ज़ायरीन की धार्मिक आस्था, छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं और मरीजों के इलाज को राजनीतिक प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। यदि प्रतिबंधों के कारण मरीज इलाज से वंचित हो जाएं, छात्र अपनी शिक्षा जारी न रख सकें और ज़ायरीन अपने धार्मिक और आध्यात्मिक सफर में परेशानियों का सामना करें, तो यह मानवाधिकार और मानवीय संवेदना की बुनियादी आवश्यकताओं के खिलाफ है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय विवादों की सज़ा आम नागरिकों को देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का प्रभाव केवल राजनीतिक और सरकारी हलकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका बोझ आम नागरिकों, निर्दोष यात्रियों, मरीजों, छात्रों और धार्मिक ज़ायरीन को भी उठाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की राजनीतिक नीतियों से असहमति का यह मतलब नहीं है कि उस देश के लोगों को बुनियादी मानवीय सुविधाओं, इलाज, शिक्षा, धार्मिक ज़ियारत और स्वतंत्र यात्रा के अधिकार से वंचित कर दिया जाए। मानवता का तकाज़ा है कि अंतरराष्ट्रीय मतभेदों के बावजूद आम नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का सम्मान किया जाए।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने अमेरिका से मांग की कि वह आम नागरिकों, ज़ायरीन, छात्रों और मरीजों को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों की तुरंत समीक्षा करे और मानवीय आधार पर हवाई यात्रा की सुविधा बहाल करे। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से उन सभी बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए, जो ईरान और इराक के बीच ज़ायरीन, छात्रों और मरीजों की आवाजाही में कठिनाइयां पैदा कर रही हैं।

उन्होंने पड़ोसी देशों से भी अपील की कि मानवीय संवेदना, आपसी अधिकारों और पड़ोसी होने के तकाज़ों को ध्यान में रखते हुए अपने हवाई अड्डों पर ईरान की उड़ानों को उतरने की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे के अधिकारों का ध्यान रखना और जनता की परेशानियों को समझना ज़रूरी है।

उन्होंने इराक की सरकार और संबंधित अधिकारियों से विशेष अपील करते हुए कहा कि नजफ़-ए-अशरफ़ और अन्य पवित्र स्थलों की ज़ियारत के लिए आने वाले ज़ायरीन की परेशानियों को समझा जाए और उनके लिए हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों से आने वाले ज़ायरीन बिना किसी रुकावट के अपनी धार्मिक यात्रा जारी रख सकें।

उन्होंने कहा कि इराक और ईरान के बीच हवाई आवाजाही में रुकावट से केवल आम यात्री ही प्रभावित नहीं हो रहे हैं, बल्कि उन ज़ायरीन को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जो नजफ़-ए-अशरफ़ और अन्य पवित्र स्थलों की ज़ियारत के लिए यात्रा करते हैं। इसलिए इस समस्या को मानवीय और धार्मिक आधार पर हल करने की आवश्यकता है।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने सऊदी अरब के अधिकारियों से भी अपील की कि जहां मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा जैसे पवित्र स्थल स्थित हैं, वहां मानवीय आधार पर ईरान एयर की उड़ानों को अपने हवाई अड्डों पर उतरने की अनुमति दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से उन मरीजों की परेशानियों की ओर ध्यान दिलाया, जिन्हें इलाज के लिए यात्रा करना आवश्यक है।

उन्होंने सीरिया सहित अन्य देशों के अधिकारियों से भी अपील की कि वे मौजूदा स्थिति में मानवीय संवेदना का प्रदर्शन करते हुए ईरान एयर की उड़ानों के लिए अपने हवाई अड्डे खोलें, ताकि आम नागरिकों, मरीजों, छात्रों और ज़ायरीन को यात्रा संबंधी परेशानियों से राहत मिल सके।

उन्होंने कहा कि हक़, इंसाफ़ और मानवीय संवेदना का तकाज़ा है कि पड़ोसी देश राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता की परेशानियों को समझें और उन्हें दूर करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएं। धार्मिक ज़ायरीन की आवाजाही, छात्रों की शिक्षा और मरीजों के इलाज को राजनीतिक संघर्ष से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम देशों की सरकारों से भी अपील की कि वे इस मानवीय समस्या का गंभीरता से संज्ञान लें और प्रभावित ज़ायरीन, छात्रों, मरीजों तथा अन्य यात्रियों की परेशानियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

उन्होंने आगे कहा कि मानव जीवन, इलाज, शिक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को राजनीतिक हितों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। किसी भी प्रतिबंध के कारण यदि निर्दोष नागरिकों का जीवन, शिक्षा, इलाज और धार्मिक यात्रा प्रभावित होती है, तो उसके मानवीय प्रभावों पर अवश्य ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और सभी संबंधित देशों को चाहिए कि आम नागरिकों को राजनीतिक संघर्ष के प्रभावों से सुरक्षित रखने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएं और ज़ायरीन, छात्रों तथा मरीजों के लिए बिना किसी रुकावट के हवाई यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

मौलाना अली हैदर फ़रिश्ता ने ज़ोर देते हुए कहा कि इंसानियत, पड़ोसी होने के तकाज़े और धार्मिक स्वतंत्रता की मांग है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता की परेशानियों को दूर किया जाए और ऐसे कदम उठाए जाएं, जिनसे आम नागरिकों को वर्तमान यात्रा संबंधी कठिनाइयों से राहत मिल सके।

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