सोमवार 28 सितंबर 2026 - 10:26
इराकी जनता ईरानियों के लिए अपना हवाई मार्ग बंद न होने दे। हुज्जतुल इस्लाम मोजतबा हसन ज़ादेह

हौज़ा / काशान के जिहादी सेवा समूह अमीरुल मोमिनीन अली (अ.स.) के प्रभारी हुज्जतुल इस्लाम मोजतबा हसन ज़ादेह ने इराकी जनता से अपील की है कि वे ईरानी ज़ायरीन के लिए इराक का हवाई मार्ग बंद किए जाने का विरोध करें और कर्बला की ज़ियारत के रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का समर्थन न करें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,काशान के जिहादी सेवा समूह हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली (अ.स.) के प्रभारी हुज्जतुल इस्लाम मोजतबा हसनज़ादे ने इराकी जनता से अपील की है कि वे ईरानी नागरिकों के लिए इराक का हवाई मार्ग बंद किए जाने का विरोध करें। उन्होंने कहा कि कर्बला की ज़ियारत करने वाले ईरानी ज़ायरीन को इराक आने से रोकना दोनों देशों के धार्मिक और मानवीय संबंधों को प्रभावित करेगा।

हसनज़ादे ने अपने अरबी संदेश में इमाम हुसैन (अ.स.) के संघर्ष और उनके स्वतंत्रता व अत्याचार के विरोध के संदेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भी किसी भी तरह के अन्याय और दबाव के सामने झुकना उचित नहीं है और इराकी जनता को अपने देश के फैसलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईरानी नागरिकों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो कर्बला की ज़ियारत, इलाज, शिक्षा और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इराक की यात्रा करते हैं। उनके अनुसार, हवाई मार्ग बंद होने से ज़ायरीन के साथ-साथ मरीजों, छात्रों और व्यापारियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

हसनज़ादे ने इराक के कुछ राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के बयानों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने ईरान से हवाई उड़ानों पर रोक के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इराकी जनता से कहा कि वह ऐसे किसी निर्णय का हिस्सा न बने जिससे देश की संप्रभुता और ईरान-इराक के ऐतिहासिक संबंध प्रभावित हों।

उन्होंने यह भी कहा कि हवाई मार्ग बंद होने के बावजूद ईरान और इराक के बीच कई ज़मीनी सीमा मार्ग खुले हैं। उन्होंने कर्बला की ज़ियारत के प्रति लोगों की आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि ज़ायरीन ज़मीनी रास्तों से भी कर्बला पहुंच सकते हैं।

संदेश के अंत में मोजतबा हसनज़ादे ने इराकी जनता से अपील की कि वे कर्बला और अहले-बैत (अ.स.) से जुड़े ईरान-इराक के धार्मिक संबंधों को कमजोर न होने दें। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) की शिक्षाओं के अनुसार अत्याचार के सामने खड़े होना और इंसाफ व स्वतंत्रता की रक्षा करना ज़रूरी है।

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