हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोअतसिम ख़ान ने बुधवार, 30 सितम्बर 2026 ई को क़ादिमून विश्व महासभा के सहयोग से आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन «बेसअत-ए उम्मत-ए मोहम्मद» में मुस्लिम उम्मत की वैश्विक स्थिति पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अफ्रीका, एशिया, यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले मुसलमान एक ही उम्मत का हिस्सा हैं और पूरी मानवता के प्रति उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने क़ुरआन में वर्णित «उम्मत-ए-वसत» की अवधारणा की ओर संकेत करते हुए कहा कि मुस्लिम उम्मत न तो भौतिकवादी है, जो पूरी जिंदगी को केवल दुनिया तक सीमित कर दे और न ही सांसारिक जीवन से मुंह मोड़ने वाली है। बल्कि उसे दुनिया और आख़िरत के बीच संतुलन कायम करना चाहिए तथा एक बेहतर समाज के निर्माण और उसके संरक्षण के लिए प्रयास करना चाहिए।
मलिक मोअतसिम ख़ान ने कहा कि जिस तरह पैगंबर-ए-इस्लाम (स) पूरी दुनिया के लिए रहमत थे, उसी तरह मुसलमानों को भी मानवता के लिए रहमत का माध्यम बनना चाहिए और इंसानों की समस्याओं के समाधान में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने मुस्लिम उम्मत की जिम्मेदारी का पहला क्षेत्र पर्यावरण और पर्यावरणीय संकटों को बताया। उन्होंने कहा कि सृष्टि की व्यवस्था को सुरक्षित रखना, पेड़-पौधों, समुद्रों, हवा और पानी का ध्यान रखना तथा इंसानों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास करना मुसलमानों की जिम्मेदारियों में शामिल है।
उन्होंने सामाजिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए परिवार को मजबूत बनाने और सामाजिक संरचनाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि समाज को इस तरह व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि सभी इंसानों के लिए सम्मानजनक जीवन जीने की परिस्थितियां उपलब्ध हों।
मलिक मोअतसिम ख़ान ने दुनिया की आर्थिक समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया में बहुत अधिक संपत्ति मौजूद है, लेकिन इस संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा कुछ सीमित लोगों के हाथों में है। इसके परिणामस्वरूप अमीरों और गरीबों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। संपत्ति का न्यायपूर्ण वितरण और गरीबी का मुकाबला करना मानवता की सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में से है।
उन्होंने मुस्लिम उम्मत की जिम्मेदारी का चौथा क्षेत्र राजनीतिक क्षेत्र को बताते हुए न्यायपूर्ण नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम की दृष्टि में वास्तविक संप्रभुता अल्लाह के लिए है और सभी इंसान मानवीय गरिमा और मूल्य की दृष्टि से समान हैं। इसलिए सभी इंसानों, चाहे वे मुसलमान हों या गैर-मुसलमान, के लिए न्याय और समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने अंत में अत्याचार और अन्याय के सामने मुस्लिम उम्मत की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि मुस्लिम उम्मत को रहमत, न्याय तथा अत्याचार और अन्याय के मुकाबले का स्रोत बनना चाहिए। यदि मुसलमान अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाते हैं तो इसका नुकसान केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी मानवता इससे प्रभावित होगी और अल्लाह के सामने भी इस जिम्मेदारी के बारे में उनसे सवाल किया जाएगा।
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