हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,ऐसे समय में जबकि सऊदी पक्ष अब भी यमन द्वारा पवित्र स्थलों पर हमले के संबंध में अपने प्रचारात्मक दावों और कथित झूठे बयानों को दोहरा रहा है, यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के सलाहकार मुहम्मद ताहिर अनअम ने आज कहा कि यमन में अपने सैन्य और आर्थिक उद्देश्यों को हासिल करने में सऊदी शासन की विफलता ने उसे अपने राजनीतिक और मीडिया विमर्श में मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों का दुरुपयोग करने की ओर धकेल दिया है।
मुहम्मद ताहिर अनअम ने कहा कि सऊदी पक्ष द्वारा हरमैन शरीफैन (मक्का और मदीना के दो पवित्र स्थल) के मुद्दे को उठाना और इन पवित्र स्थलों का दुरुपयोग करना उसकी राजनीतिक उलझन की सीमा को दर्शाता है। यह सऊदी शासक व्यवस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इन धार्मिक स्थलों के महत्व का फायदा उठाने की कोशिश का हिस्सा है।
उन्होंने अल-मसीरा वेबसाइट के साथ बातचीत में कहा कि यमन द्वारा पहले मक्का और फिर मदीना को निशाना बनाए जाने के संबंध में सऊदी अरब के दावों और इसी दौरान धार्मिक फतवों के जारी होने से यह सवाल उठता है कि, आने वाले चरण में सऊदी शासन किस तरह के क़दम उठा सकता है, विशेष रूप से तब जब उसे सैन्य और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
इस यमनी अधिकारी ने ज़ोर देकर कहा कि, सऊदी शासन द्वारा जारी किए गए आंकड़े और बयान उन बातों की पुष्टि करते हैं, जिन्हें अरब और मुस्लिम कार्यकर्ताओं, राजनीतिज्ञों तथा मीडिया हस्तियों ने पहले भी राजनीतिक विमर्श में हरमैन शरीफैन की स्थिति के दुरुपयोग के संबंध में कहा है। उन्होंने कहा कि, जब भी रियाद को लगता है कि उसकी छवि और स्थिति कमज़ोर हो रही है या उसमें गिरावट आ रही है, वह मक्का और मदीना के ख़िलाफ़ कथित ख़तरे को प्रमुखता से सामने लाने का सहारा लेता है।
यमन की सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के सलाहकार ने कहा कि जब भी सऊदी शासन किसी बड़े सैन्य टकराव में उलझता है या उसे राजनीतिक और मैदानी स्तर पर हार का सामना करना पड़ता है, तो वह इन दावों को दोहराता है और संघर्ष को धार्मिक युद्ध तथा पवित्र स्थलों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत करता है, ताकि मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को उकसाकर समर्थन हासिल किया जा सके।
मुहम्मद ताहिर अनअम ने कहा कि सऊदी शासन द्वारा हरमैन शरीफैन का कथित दुरुपयोग आर्थिक क्षेत्र तक भी फैला हुआ है। इसमें हज और उमरा की ऊँची लागत तथा वीजा, होटल, रेस्तरां, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े आर्थिक हित शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, हज और उमरा की ऊँची लागत ने बड़ी संख्या में मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना की यात्रा को कठिन बना दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि हज की लागत हजारों डॉलर तक पहुँच जाती है और इस धन का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के खज़ाने में जाता है। उनके अनुसार, इसका अर्थ वास्तव में मुसलमानों की पवित्र स्थलों तक पहुँच को सीमित करना है, जबकि पवित्र स्थलों की सेवा राजनीतिक और आर्थिक हितों से अलग होनी चाहिए।
अनअम ने कहा कि सनआ कभी भी इस लड़ाई को यमन के भीतर का आंतरिक संघर्ष दिखाने की अनुमति नहीं देगा और सऊदी शासन को इस युद्ध का मुख्य पक्ष तथा समस्या की जड़ मानता है। उन्होंने कहा कि, संकट को केवल यमन की सीमाओं के भीतर सीमित करने और रियाद को इस परिदृश्य से बाहर करने के प्रयासों से स्थिति की वास्तविक प्रकृति नहीं बदलेगी।
इस यमनी अधिकारी ने अंत में ज़ोर देकर कहा कि, यमन ने युद्ध को सऊदी अरब के भीतर तक पहुँचा दिया है और “हमारे लड़ाके” अब भी सऊदी अरब के भीतर संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं, जिनमें नजरान, जिज़ान, अबहा, खमीस मुशैत, अल-उला और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का भविष्य रियाद को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करने और इस स्थिति को यमन तथा सऊदी शासन के बीच सीधे मुद्दे के रूप में देखने से जुड़ा हुआ है।
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