हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , एक विशेष साक्षात्कार में अब्दुलवाहिद अबू रास ने यमन की मौजूदा स्थिति,सऊदी अरब के साथ तनाव, फिलिस्तीन, इजराइल और अमेरिका के साथ टकराव तथा पाकिस्तान और तुर्किये की संभावित भूमिका सहित विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर यमन का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि यमनी जनता पिछले कई वर्षों से युद्ध, बमबारी और नाकाबंदी का सामना कर रही है। सना हवाई अड्डे, बंदरगाहों और जमीनी रास्तों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आम नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, यमन की मूल मांग नाकाबंदी खत्म करना और जनता को सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है।
यमनी अधिकारी ने कहा कि अतीत में यमन और सऊदी अरब के बीच एक रोडमैप पर सहमति बनी थी, लेकिन उस पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका और हालात फिर तनाव की ओर बढ़ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यमन की नाकाबंदी जारी रही तो यमनी पक्ष भी सऊदी अरब के खिलाफ अपने कदमों को इसी संदर्भ में देखेगा।
अब्दुलवाहिद अबू रास ने यमन पर मक्का मुकर्रमा या अन्य पवित्र स्थलों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यमनी जनता हमेशा हरमैन शरीफैन और पवित्र कुरआन के सम्मान पर जोर देती रही है। उन्होंने पवित्र स्थलों के प्रबंधन और सुरक्षा में इस्लामी देशों की साझा जिम्मेदारी और सहयोग का प्रस्ताव भी दिया।
उन्होंने फिलिस्तीन और गाज़ा के समर्थन को यमन की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि यमन ने फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में इजराइल के खिलाफ कार्रवाई की है।
अमेरिका के साथ तनाव के बारे में उन्होंने कहा कि यमन के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयां अपने इच्छित परिणाम हासिल नहीं कर सकीं और बाद में वाशिंगटन ने ओमान के माध्यम से तनाव कम करने के लिए संपर्क किया।
पाकिस्तान और तुर्किये से युद्ध से दूर रहने की अपील:
अब्दुलवाहिद अबू रास ने पाकिस्तान और तुर्किये से अपील की कि वे यमन के खिलाफ किसी सैन्य मोर्चे का हिस्सा न बनें और क्षेत्र में तनाव बढ़ाने से बचें। उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यमनी जनता के मन में पाकिस्तानी जनता के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना है। उनके अनुसार, पाकिस्तान को सऊदी अरब और यमन के बीच सैन्य मोर्चे का हिस्सा बनने के बजाय ईरान और ओमान के साथ मिलकर कूटनीतिक और मध्यस्थता के प्रयासों में भूमिका निभानी चाहिए, जिसका यमन स्वागत करेगा।
उन्होंने सना में स्थापित प्रशासन को यमनी जनता के बड़े हिस्से का प्रतिनिधि शासन बताया और रियाद में मौजूद यमनी सरकार के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया। हालांकि, यमन में राजनीतिक सत्ता और प्रतिनिधित्व का मुद्दा अभी भी विवादित है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार और सना में मौजूद हूती प्रशासन के बीच मतभेद जारी हैं।
यमनी अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर सऊदी अरब या कोई अन्य विदेशी शक्ति यमन में जमीनी सैन्य कार्रवाई करती है तो यमनी जनता और सशस्त्र बल अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिरोध करेंगे।
उन्होंने कहा कि यमन युद्ध का इच्छुक नहीं है, बल्कि आपसी सम्मान के आधार पर सभी देशों के साथ संबंध चाहता है। उनके अनुसार, संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय नाकाबंदी खत्म करने, रोडमैप पर अमल करने और यमनी पक्षों के बीच राजनीतिक वार्ता के जरिए तलाश किया जाना चाहिए।
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